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MP UCC Suggestions 22 June 2026: मध्यप्रदेश में यूनिफाइड सिविल कोड ड्राफ्ट पर अंतिम दिन व्यापक मंथन, सभी वर्गों से लिया जा रहा फीडबैक

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Published On: 22 June 2026
MP UCC Suggestions 22 June 2026: मध्यप्रदेश में यूनिफाइड सिविल कोड ड्राफ्ट पर अंतिम दिन व्यापक मंथन, सभी वर्गों से लिया जा रहा फीडबैक

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MP UCC Suggestions 22 June 2026: मध्यप्रदेश में यूनिफाइड सिविल कोड ड्राफ्ट पर अंतिम दिन व्यापक मंथन, सभी वर्गों से लिया जा रहा फीडबैक

मध्यप्रदेश सरकार द्वारा प्रस्तावित यूनिफाइड सिविल कोड (UCC) को लागू करने की दिशा में चल रही प्रक्रिया अब अपने अंतिम और निर्णायक चरण में पहुंच गई है। 22 जून 2026 को UCC ड्राफ्ट पर सुझाव, दावे और आपत्तियां दर्ज कराने का अंतिम दिन है। इसी के साथ पूरे राज्य में इस विषय को लेकर राजनीतिक, सामाजिक और प्रशासनिक स्तर पर गहन चर्चा और सक्रियता देखने को मिल रही है। यह प्रक्रिया राज्य सरकार के लिए न केवल एक विधायी पहल है, बल्कि इसे सामाजिक सुधार और समान नागरिक व्यवस्था की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में भी देखा जा रहा है।

भोपाल स्थित नरोन्हा प्रशासनिक अकादमी में सुबह 10:30 बजे से शाम 6:00 बजे तक यह विशेष संवाद प्रक्रिया जारी है, जहां विभिन्न वर्गों के नागरिक, विशेषज्ञ, सामाजिक संगठन और प्रशासनिक प्रतिनिधि अपने सुझाव और आपत्तियां दर्ज करा रहे हैं। इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी और संवाद ड्राफ्टिंग कमेटी की अध्यक्ष जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई द्वारा की जा रही है, जो सभी पक्षों से सीधे संवाद कर रही हैं ताकि अंतिम ड्राफ्ट अधिक समावेशी और व्यावहारिक बनाया जा सके।

सभी वर्गों की भागीदारी से तैयार हो रहा व्यापक दृष्टिकोण

UCC ड्राफ्ट को लेकर इस बार सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि हर वर्ग की आवाज इसमें शामिल हो। इसी कारण सामाजिक संगठनों, धार्मिक प्रतिनिधियों, महिला समूहों, युवा संगठनों और आम नागरिकों की बड़ी भागीदारी देखी जा रही है।

लोग अपने-अपने अनुभवों और सुझावों के आधार पर समिति के सामने विचार रख रहे हैं। सरकार का उद्देश्य यह है कि यूनिफाइड सिविल कोड किसी एक वर्ग या समुदाय के दृष्टिकोण तक सीमित न रहकर एक संतुलित और न्यायपूर्ण व्यवस्था के रूप में सामने आए।

आयोगों और विशेषज्ञ समितियों की अहम भूमिका

इस प्रक्रिया में प्रदेश के विभिन्न आयोगों की भागीदारी भी महत्वपूर्ण रही है। महिला आयोग, बाल आयोग, अनुसूचित जाति आयोग, अनुसूचित जनजाति आयोग, ओबीसी आयोग, अल्पसंख्यक कल्याण आयोग सहित अन्य प्रतिनिधिमंडलों को विशेष रूप से आमंत्रित किया गया है।

इन आयोगों के प्रतिनिधि अपने-अपने क्षेत्रों से जुड़े मुद्दों, सामाजिक चुनौतियों और कानूनी जरूरतों को विस्तार से प्रस्तुत कर रहे हैं। इससे नीति निर्माताओं को यह समझने में मदद मिल रही है कि प्रस्तावित कानून विभिन्न वर्गों को किस प्रकार प्रभावित कर सकता है।

इसके अलावा, विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की भागीदारी कानून को अधिक व्यावहारिक और सामाजिक रूप से स्वीकार्य बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

विभागीय प्रस्तुतिकरण से नीति निर्माण को मिल रही दिशा

कार्यक्रम के दूसरे चरण में दोपहर 12:30 बजे से राज्य सरकार के विभिन्न प्रमुख विभागों द्वारा विस्तृत प्रस्तुतिकरण (प्रेजेंटेशन) दिया जा रहा है। इनमें महिला एवं बाल विकास विभाग, गृह विभाग, अनुसूचित जाति एवं जनजाति विभाग, ओबीसी कल्याण विभाग और अल्पसंख्यक कल्याण विभाग शामिल हैं।

इन विभागों द्वारा प्रस्तुत आंकड़ों, नीतिगत सुझावों और कानूनी प्रभावों के विश्लेषण के माध्यम से ड्राफ्टिंग कमेटी को यह समझने में मदद मिल रही है कि प्रस्तावित UCC लागू होने पर प्रशासनिक स्तर पर किस तरह के बदलाव आवश्यक होंगे।

यह चरण विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इसमें कानून को केवल सैद्धांतिक नहीं बल्कि व्यावहारिक दृष्टिकोण से भी परखा जा रहा है।

राजनीतिक दलों और सामाजिक नेताओं के साथ संवाद

दोपहर बाद ड्राफ्टिंग कमेटी ने मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ भी संवाद किया। इस दौरान विभिन्न राजनीतिक दलों ने अपने-अपने दृष्टिकोण और चिंताओं को सामने रखा।

इसके बाद शाम के सत्र में धर्मगुरुओं, समाजसेवियों, बुद्धिजीवियों और जनप्रतिनिधियों के साथ भी व्यापक चर्चा की जाएगी। इस संवाद का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि प्रस्तावित कानून किसी भी प्रकार के सामाजिक असंतुलन को जन्म न दे और सभी समुदायों की भावनाओं का सम्मान किया जा सके।

लिव-इन रिलेशनशिप पर प्रस्तावित प्रावधानों पर चर्चा

UCC ड्राफ्ट में लिव-इन रिलेशनशिप से जुड़े प्रावधानों को लेकर विशेष ध्यान दिया गया है। प्रस्ताव के अनुसार, यदि किसी महिला का लिव-इन संबंध समाप्त हो जाता है, तो उसे अपने साथी से भरण-पोषण (मेंटेनेंस) का अधिकार दिया जा सकता है।

इसके साथ ही ऐसे संबंधों से जन्मे बच्चों को कानूनी पहचान और पैतृक संपत्ति में अधिकार देने का भी प्रस्ताव रखा गया है। इस प्रावधान को महिलाओं और बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

हालांकि, इस विषय पर समाज के विभिन्न वर्गों में अलग-अलग राय देखने को मिल रही है, जिससे यह स्पष्ट है कि अंतिम निर्णय व्यापक विचार-विमर्श के बाद ही लिया जाएगा।

लिव-इन रिलेशनशिप के पंजीकरण का प्रस्ताव

ड्राफ्ट में एक और महत्वपूर्ण प्रस्ताव लिव-इन रिलेशनशिप के पंजीकरण को अनिवार्य बनाने से संबंधित है। सरकार का मानना है कि इससे ऐसे संबंधों में पारदर्शिता आएगी और भविष्य में उत्पन्न होने वाले विवादों को कम किया जा सकेगा।

विशेषज्ञों का कहना है कि यह कदम महिलाओं की सुरक्षा और बच्चों के अधिकारों की रक्षा के लिए उपयोगी साबित हो सकता है, हालांकि सामाजिक स्तर पर इस पर चर्चा जारी है।

महिलाओं को समान अधिकार देने की दिशा में बड़ा कदम

UCC ड्राफ्ट का सबसे प्रमुख उद्देश्य सभी नागरिकों के लिए समान नागरिक संहिता लागू करना है। इसके तहत महिलाओं को संपत्ति, उत्तराधिकार और पारिवारिक अधिकारों में समानता देने का लक्ष्य रखा गया है।

प्रस्तावित प्रावधानों के अनुसार:

  • सभी धर्मों के लिए एक समान नागरिक कानून लागू किया जाएगा
  • महिलाओं को संपत्ति और उत्तराधिकार में समान अधिकार मिलेगा
  • विवाह, तलाक और पारिवारिक विवादों में एक समान कानूनी व्यवस्था लागू होगी
  • भेदभावपूर्ण पारिवारिक कानूनों को समाप्त किया जाएगा

इससे राज्य में कानूनी समानता और सामाजिक न्याय को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है।

प्रशासनिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण पहल

सरकार का मानना है कि UCC लागू होने के बाद विभिन्न धार्मिक और पारिवारिक कानूनों में एकरूपता आएगी, जिससे प्रशासनिक प्रक्रिया सरल और पारदर्शी होगी।

विशेषज्ञों के अनुसार, यह कदम न केवल कानूनी सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण है, बल्कि यह सामाजिक एकता और समानता को भी बढ़ावा दे सकता है।

निष्कर्ष

22 जून 2026 का दिन मध्यप्रदेश के लिए विधायी और सामाजिक दृष्टिकोण से बेहद महत्वपूर्ण साबित हो रहा है। UCC ड्राफ्ट पर अंतिम सुझाव प्रक्रिया के दौरान जिस तरह विभिन्न वर्गों, आयोगों, विशेषज्ञों और राजनीतिक प्रतिनिधियों की भागीदारी देखने को मिल रही है, उससे यह स्पष्ट है कि सरकार एक व्यापक और संतुलित कानून बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है।

आने वाले समय में इन सुझावों के आधार पर तैयार होने वाला अंतिम ड्राफ्ट राज्य की कानूनी और सामाजिक संरचना में महत्वपूर्ण बदलाव ला सकता है। यह प्रक्रिया न केवल नीति निर्माण का हिस्सा है, बल्कि यह एक ऐसे मॉडल की ओर संकेत करती है जहां सभी वर्गों की भागीदारी से कानून तैयार किया जाता है, जिससे उसकी स्वीकार्यता और प्रभावशीलता दोनों बढ़ती हैं।

कुमकुम सोनी स्वराज वाणी न्यूज मे कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है। इन्होंने स्नातक पत्रकारिता एवं जनसंचार से की है। यह विशेषतः राजनीति एवं भू-राजनीति से जुड़े मुद्दों का गहन विशलेषण कर सरल भाषा में आम जनता के समक्ष प्रस्तुत करने का प्रयास करती है।… Read More

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