MP Weather Today: मध्य प्रदेश में मानसून की रफ्तार सुस्त, लू, गर्मी और आंधी-बारिश का मिला-जुला असर; किसानों की बढ़ी चिंता
MP में मानसून का इंतजार लगातार लंबा होता जा रहा है। आमतौर पर 15 जून तक प्रदेश में प्रवेश करने वाला मानसून इस बार 22 जून तक भी नहीं पहुंच सका है। मौसम विभाग का अनुमान है कि मानसून की एंट्री अब 25 जून के बाद ही संभव हो सकती है। इस देरी का असर प्रदेश के मौसम और कृषि दोनों पर साफ दिखाई देने लगा है। एक ओर कई जिलों में भीषण गर्मी और लू लोगों को परेशान कर रही है, तो दूसरी ओर कुछ क्षेत्रों में आंधी और बारिश का दौर जारी है। मौसम का यह मिला-जुला स्वरूप आम लोगों के साथ-साथ किसानों के लिए भी चिंता का कारण बन गया है।
कई जिलों में लू का अलर्ट
MP मौसम विभाग ने सोमवार को प्रदेश के कुछ जिलों में लू चलने की चेतावनी जारी की है। विशेष रूप से नरसिंहपुर, जबलपुर, मंडला, उमरिया और डिंडौरी जिलों में हीटवेव जैसी स्थिति बनी रहने की संभावना जताई गई है। इसके अलावा जबलपुर, रीवा और सागर संभाग के कई क्षेत्रों में अगले चार दिनों तक गर्म हवाओं का असर देखने को मिल सकता है।
दिन के समय तेज धूप और गर्म हवाएं लोगों को परेशान कर सकती हैं। हालांकि शाम के समय मौसम में बदलाव आने और कुछ क्षेत्रों में बादल छाने की संभावना बनी हुई है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि मानसून की देरी के कारण प्रदेश में तापमान और उमस दोनों बढ़ रहे हैं।
21 से अधिक जिलों में आंधी और बारिश का अलर्ट
गर्मी और लू के बीच प्रदेश के कई हिस्सों में आंधी और बारिश की गतिविधियां भी जारी हैं। मौसम विभाग ने झाबुआ, अलीराजपुर, धार, बड़वानी, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, सतना, रीवा, सीधी, सिंगरौली, शहडोल, अनूपपुर, कटनी, दमोह, सागर, विदिशा और अशोकनगर समेत 21 से अधिक जिलों में तेज हवा और बारिश की संभावना जताई है।
इन क्षेत्रों में कहीं-कहीं गरज-चमक के साथ बारिश हो सकती है। तेज हवाओं के कारण तापमान में अस्थायी राहत मिल सकती है, लेकिन मौसम की अस्थिरता बनी रहेगी।
रायसेन में सबसे ज्यादा बारिश, भोपाल भी भीगा
रविवार को प्रदेश के कई हिस्सों में मौसम बदला हुआ नजर आया। रायसेन जिले में सबसे अधिक 61 मिलीमीटर यानी करीब ढाई इंच बारिश दर्ज की गई। राजधानी भोपाल में दोपहर बाद तेज बारिश हुई, जिससे लोगों को गर्मी से राहत मिली।
इसके अलावा सतना, जबलपुर, खजुराहो, नौगांव और सिवनी सहित कई जिलों में भी बारिश दर्ज की गई। हालांकि यह बारिश मानसून की औपचारिक एंट्री नहीं मानी जा रही है, बल्कि स्थानीय मौसम प्रणालियों के प्रभाव से हो रही गतिविधियां हैं।
तापमान में उतार-चढ़ाव जारी
बारिश और बादलों की आवाजाही के कारण कई शहरों के तापमान में कमी दर्ज की गई है। भोपाल में अधिकतम तापमान 35.3 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया, जबकि इंदौर में 37.1 डिग्री, उज्जैन में 36 डिग्री और जबलपुर में 38 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज हुआ।
ग्वालियर में तापमान 39.7 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। वहीं दतिया प्रदेश का सबसे गर्म जिला रहा, जहां अधिकतम तापमान 40.6 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। मौसम विभाग का कहना है कि अगले कुछ दिनों तक तापमान में इसी तरह उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।
10 दिन पीछे चल रहा मानसून
सामान्य परिस्थितियों में दक्षिण-पश्चिम मानसून 15 जून तक मध्य प्रदेश में प्रवेश कर जाता है, लेकिन इस वर्ष मानसून की गति अपेक्षाकृत धीमी बनी हुई है। मौसम विभाग के अनुसार मानसून फिलहाल अपनी सामान्य स्थिति से करीब 10 दिन पीछे चल रहा है।
विशेषज्ञों का अनुमान है कि मानसून पहले छत्तीसगढ़ की ओर आगे बढ़ेगा और उसके बाद 25 जून के आसपास मध्य प्रदेश में प्रवेश करेगा। मानसून की देरी का सीधा असर वर्षा के आंकड़ों और कृषि गतिविधियों पर पड़ रहा है।
जून में 48 प्रतिशत कम बारिश
MP में मानसून की देरी का असर बारिश के आंकड़ों में भी दिखाई दे रहा है। जून महीने में अब तक मध्य प्रदेश में सामान्य से 48 प्रतिशत कम बारिश रिकॉर्ड की गई है।
पूर्वी मध्य प्रदेश के जिलों में स्थिति और अधिक चिंताजनक है, जहां सामान्य से 69 प्रतिशत तक कम वर्षा दर्ज की गई है। प्रदेश के कुल 55 जिलों में से 45 जिले बारिश के मामले में पीछे चल रहे हैं। यदि आने वाले दिनों में पर्याप्त वर्षा नहीं होती है तो जल संकट और कृषि संबंधी समस्याएं बढ़ सकती हैं।
किसानों की चिंता बढ़ी
मानसून की देरी का सबसे अधिक असर किसानों पर पड़ रहा है। खरीफ सीजन की फसलें जैसे सोयाबीन, उड़द, मूंग और तुअर की बुवाई बारिश पर निर्भर करती हैं। पर्याप्त वर्षा नहीं होने के कारण कई क्षेत्रों में बुवाई का काम प्रभावित हो रहा है।
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि खेतों में पर्याप्त नमी के लिए कम से कम चार इंच बारिश आवश्यक है। तभी बुवाई सुरक्षित मानी जाती है। कई किसानों ने मानसून आने की उम्मीद में पहले ही सोयाबीन की बुवाई कर दी थी, लेकिन बारिश नहीं होने से बीज खराब होने का खतरा बढ़ गया है।
यदि जल्द बारिश नहीं हुई तो किसानों को दोबारा बुवाई करनी पड़ सकती है, जिससे उत्पादन लागत बढ़ेगी और आर्थिक नुकसान होने की आशंका भी रहेगी।
अगले कुछ दिन अहम
MP मौसम विभाग का मानना है कि अगले चार से पांच दिन प्रदेश के लिए महत्वपूर्ण रहेंगे। कुछ जिलों में लू और गर्मी का असर जारी रहेगा, जबकि कई क्षेत्रों में आंधी और बारिश देखने को मिल सकती है। मानसून की एंट्री के बाद ही प्रदेशभर में मौसम पूरी तरह बदलने की उम्मीद है।
फिलहाल MP में लोग गर्मी, उमस, लू और छिटपुट बारिश के मिश्रित मौसम का सामना कर रहे हैं और सभी की नजरें मानसून की पहली जोरदार बारिश पर टिकी हुई हैं।
