Indore Metro Underground Project: अगस्त के अंत तक शुरू होगा टनल निर्माण कार्य, एयरपोर्ट स्टेशन से उतरेगी टनल बोरिंग मशीन
भूमिगत मेट्रो सुरंग निर्माण की तैयारी तेज
Indore Metro Underground Project : इंदौर मेट्रो परियोजना के अंडरग्राउंड सेक्शन में सुरंग (टनल) बनाने का कार्य अगस्त माह के अंत तक शुरू होने की संभावना है। इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट के तहत मेट्रो ट्रैक के लिए जमीन के भीतर गहरी सुरंगों का निर्माण किया जाएगा।
सबसे पहले एयरपोर्ट स्थित भूमिगत मेट्रो स्टेशन परिसर से दो सुरंगों के निर्माण के लिए टनल बोरिंग मशीन (TBM) को जमीन के भीतर उतारा जाएगा। इसके लिए एयरपोर्ट के पास करीब 20 मीटर गहरा गड्ढा पहले ही तैयार किया जा चुका है।
18 से 20 मीटर गहराई में बनेगी मेट्रो सुरंग
जानकारी के अनुसार, मेट्रो की यह सुरंग जमीन की सतह से लगभग 18 से 20 मीटर की गहराई में बनाई जाएगी। टनल बोरिंग मशीन जमीन के नीचे खुदाई करते हुए मिट्टी को हटाएगी और साथ ही सुरंग की दीवारों पर सीमेंट-कंक्रीट की मजबूत परत का निर्माण करती जाएगी।
इस तकनीक के जरिए भूमिगत मेट्रो कॉरिडोर को सुरक्षित और टिकाऊ बनाया जाएगा। सुरंग निर्माण का कार्य एयरपोर्ट क्षेत्र से शुरू होकर बड़ा गणपति चौराहा की दिशा में आगे बढ़ेगा।
तीन स्थानों से उतारी जाएगी TBM मशीन
इंदौर मेट्रो परियोजना के 31.32 किलोमीटर लंबे रिंग कॉरिडोर में से 12.2 किलोमीटर हिस्सा भूमिगत बनाया जा रहा है। इस हिस्से में तीन अलग-अलग स्थानों से टनल बोरिंग मशीनों को जमीन में उतारा जाएगा।
पहले चरण में 8.7 किलोमीटर के हिस्से में दो स्थानों पर TBM मशीनें लगाई जाएंगी। इनमें एयरपोर्ट स्टेशन के अलावा बड़ा गणपति चौराहा स्थित मेट्रो स्टेशन शामिल है।
इसके अलावा खजराना से रीगल तक के 3.5 किलोमीटर हिस्से में भी सुरंग निर्माण किया जाएगा, जिसके लिए अलग से एजेंसी तय कर तीसरा स्थान चयनित किया जाएगा।
दो सेट TBM मशीनों से होगा काम
मेट्रो अधिकारियों के अनुसार, इस परियोजना में कुल छह टनल बोरिंग मशीनों का उपयोग किया जाएगा। पहले चरण के लिए मशीनें जुलाई माह में इंदौर पहुंचेंगी और एयरपोर्ट स्थित भूमिगत स्टेशन परिसर में इन्हें असेंबल किया जाएगा।
इसके बाद इन मशीनों को लगभग 18 मीटर गहराई में उतारकर सुरंग निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा, जिसकी शुरुआत अगस्त के अंत तक होने की संभावना है।
नवंबर-दिसंबर तक TBM मशीनों का दूसरा सेट भी इंदौर पहुंच जाएगा, जिससे भूमिगत मेट्रो निर्माण कार्य को और गति मिलेगी।
खजराना से रीगल तक बदलेगी योजना
खजराना से रीगल तक का लगभग 3.5 किलोमीटर का हिस्सा पहले एलिवेटेड प्रस्तावित था, जिसे अब भूमिगत किया जा रहा है। इस बदलाव के कारण यहां नई एजेंसी की नियुक्ति की प्रक्रिया भी शुरू की जाएगी।
इस हिस्से में भी सुरंग निर्माण के लिए अलग से TBM मशीन को जमीन में उतारा जाएगा, जिससे पूरे कॉरिडोर को भूमिगत नेटवर्क से जोड़ा जा सके।
31.32 किलोमीटर का पूरा मेट्रो रिंग कॉरिडोर
इंदौर मेट्रो परियोजना के तहत कुल 31.32 किलोमीटर लंबा रिंग बनाया जा रहा है। इसमें लगभग 19 किलोमीटर हिस्सा एलिवेटेड (ऊपर) होगा, जबकि 12.2 किलोमीटर हिस्सा पूरी तरह भूमिगत रहेगा।
भूमिगत हिस्से का निर्माण शहर के व्यस्त इलाकों और संवेदनशील क्षेत्रों को ध्यान में रखते हुए किया जा रहा है, ताकि यातायात और शहरी ढांचे पर न्यूनतम प्रभाव पड़े।
तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण प्रोजेक्ट
मेट्रो विशेषज्ञों के अनुसार, भूमिगत सुरंग निर्माण एक जटिल और तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण प्रक्रिया है। इसमें जमीन के नीचे लगातार खुदाई के साथ-साथ कंक्रीट से मजबूत टनल लाइनिंग भी की जाती है।
इस प्रक्रिया में सुरक्षा, मिट्टी की संरचना और आसपास के ढांचे की स्थिरता का विशेष ध्यान रखा जाता है।
मेट्रो एमडी का बयान
मध्यप्रदेश मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन के एमडी एस. कृष्ण चैतन्य के अनुसार, जुलाई में TBM मशीनें इंदौर पहुंचेंगी और उनका इंस्टॉलेशन एयरपोर्ट भूमिगत स्टेशन परिसर में किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि अगस्त से सुरंग निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा, जबकि नवंबर-दिसंबर तक मशीनों का दूसरा सेट भी प्रोजेक्ट में शामिल हो जाएगा।
निष्कर्ष
इंदौर मेट्रो का भूमिगत प्रोजेक्ट शहर के परिवहन ढांचे में बड़ा बदलाव लाने वाला है। अगस्त के अंत तक टनल निर्माण शुरू होने के साथ ही यह परियोजना एक नए चरण में प्रवेश करेगी।
आधुनिक TBM तकनीक और चरणबद्ध निर्माण प्रक्रिया के माध्यम से इंदौर में एक सुरक्षित, तेज और आधुनिक मेट्रो नेटवर्क विकसित किया जा रहा है, जो आने वाले वर्षों में शहर की यातायात व्यवस्था को नई दिशा देगा।
