*प्राकृतिक खेती और गो-संवर्धन ही आत्मनिर्भर कृषि का आधार : मंत्री डॉ. गौतम टेटवाल*
Naitional MIllets Mission के तहत जिला स्तरीय कृषक संगोष्ठी में कृत्रिम कीट नियंत्रण प्लांट का शुभारंभ, जैविक खेती करने वाले किसानों का हुआ सम्मान
सारंगपुर।
मध्यप्रदेश सरकार द्वारा घोषित किसान कल्याण वर्ष के अंतर्गत Naitional MIllets Mission योजना के तहत सारंगपुर विधानसभा क्षेत्र के ग्राम बिलोदा पूर्विया में प्राकृतिक खेती विषय पर जिला स्तरीय कृषक संगोष्ठी का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम में मध्यप्रदेश शासन के कौशल विकास एवं रोजगार विभाग मंत्री डॉ. गौतम टेटवाल एवं सांसद श्री रोडमल नागर ने सहभागिता करते हुए कृत्रिम कीट नियंत्रण प्लांट का शुभारंभ किया तथा जैविक एवं प्राकृतिक खेती को अपनाने वाले अन्नदाता किसान भाइयों का सम्मान किया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मंत्री डॉ. गौतम टेटवाल ने कहा कि जैविक खेती केवल कृषि का विषय नहीं है, बल्कि यह हमारे स्वास्थ्य, पर्यावरण, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और भारतीय संस्कृति से जुड़ा हुआ विषय है। भारत की पहचान सदियों से कृषि और गौ-आधारित ग्रामीण अर्थव्यवस्था के रूप में रही है। हमारे ऋषियों ने प्रकृति के साथ सामंजस्य स्थापित कर समृद्धि का मार्ग बताया है। भारतीय कृषि व्यवस्था में गौवंश केवल पशु नहीं, बल्कि खेती और ग्रामीण जीवन का आधार रहा है।
मंत्री डॉ गौतम टेटवाल ने कहा कि रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग से भूमि की उर्वरता प्रभावित हो रही है, जल स्रोत प्रदूषित हो रहे हैं और मानव स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। ऐसे समय में जैविक एवं प्राकृतिक खेती एक सशक्त विकल्प के रूप में उभरकर सामने आई है।
गौवंश है जैविक खेती की आधारशिला
मंत्री डॉ. टेटवाल ने कहा कि जैविक खेती का सबसे मजबूत आधार गौवंश है। गोबर और गौमूत्र से निर्मित जीवामृत, घनजीवामृत, पंचगव्य, वर्मी कम्पोस्ट एवं अन्य जैविक उत्पाद भूमि को पुनर्जीवित करने का कार्य करते हैं। एक स्वस्थ गाय केवल दूध ही नहीं देती, बल्कि खेतों के लिए प्राकृतिक उर्वरक और जैविक खेती का आधार भी प्रदान करती है।
उन्होंने शास्त्रों का उल्लेख करते हुए कहा कि “गावः सर्वसुखप्रदाः” अर्थात गौ समस्त सुखों की प्रदाता है। भारतीय संस्कृति में गौमाता को समृद्धि, पोषण और पर्यावरण संरक्षण का प्रतीक माना गया है।

गो-संवर्धन से बढ़ेगी किसानों की आय
मंत्री डॉ. टेटवाल ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश सरकार कृषि और पशुपालन दोनों क्षेत्रों को समान महत्व दे रही है। प्रदेश में गौशालाओं के सुदृढ़ीकरण, गौवंश संरक्षण, प्राकृतिक खेती के विस्तार तथा किसानों को जैविक खेती के लिए प्रोत्साहित करने के लिए अनेक योजनाएं संचालित की जा रही हैं।
मंत्री डॉ गौतम टेटवाल ने कहा कि गो-संवर्धन के माध्यम से किसानों की आय में वृद्धि, रसायन मुक्त एवं स्वास्थ्यवर्धक कृषि उत्पादन तथा पर्यावरण एवं जैव विविधता संरक्षण जैसे महत्वपूर्ण लक्ष्य प्राप्त किए जा सकते हैं। यदि किसान खेती के साथ पशुपालन को जोड़ते हैं तो खेती की लागत में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है तथा मिट्टी की गुणवत्ता और जल धारण क्षमता में भी सुधार होगा।

रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करना समय की आवश्यकता
मंत्री डॉ. टेटवाल ने कहा कि भारत कृषि उत्पादन में अग्रणी देशों में शामिल है, लेकिन आज भी खेती बड़ी मात्रा में रासायनिक उर्वरकों पर निर्भर है। इन उर्वरकों के निर्माण के लिए आवश्यक प्राकृतिक गैस का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करना पड़ता है। अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के कारण उर्वरकों की कीमतों में वृद्धि का सीधा असर किसानों पर पड़ता है। ऐसे में जैविक खेती और गो-आधारित कृषि पद्धति आत्मनिर्भर भारत की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।
सांसद रोडमल नागर ने कहा कि गोबर, गौमूत्र और अन्य जैविक संसाधनों से तैयार उर्वरक न केवल भूमि की उर्वरता बढ़ाते हैं, बल्कि आयातित संसाधनों पर निर्भरता भी कम करते हैं। इससे खेती की लागत घटेगी, विदेशी मुद्रा की बचत होगी और कृषि क्षेत्र अधिक आत्मनिर्भर बनेगा।

कड़लावद में बनेगी 133 एकड़ में कामधेनु गौशाला
मंत्री डॉ. गौतम टेटवाल ने बताया कि निराश्रित गोवंश के संरक्षण एवं जैविक खेती को बढ़ावा देने के उद्देश्य से मध्यप्रदेश सरकार द्वारा स्वावलंबी गौशाला योजना प्रारंभ की गई है। इसके अंतर्गत सारंगपुर विधानसभा क्षेत्र के ग्राम कड़लावद में 133 एकड़ भूमि पर कामधेनु गौशाला की स्थापना की जा रही है।
उन्होंने बताया कि इस गौशाला के माध्यम से क्षेत्र में पर्याप्त जैविक खाद उपलब्ध होगी तथा किसानों को जैविक खेती अपनाने में सहायता मिलेगी। साथ ही गिर, साहीवाल, थारपारकर जैसी उच्च दुग्ध उत्पादन क्षमता वाली देशी नस्लों के संवर्धन का कार्य भी किया जाएगा, जिससे किसानों को गुणवत्तायुक्त गौवंश स्थानीय स्तर पर उपलब्ध हो सकेगा।
बायोगैस एवं बायो-सीएनजी प्लांट से मिलेगा किसानों को लाभ
मंत्री डॉ. टेटवाल ने बताया कि कामधेनु गौशाला में बायोगैस एवं बायो-सीएनजी संयंत्र की स्थापना की जाएगी। इसमें गोबर के साथ-साथ किसानों से खरीदी गई पराली का भी उपयोग किया जाएगा। इससे किसानों को अतिरिक्त आय प्राप्त होगी तथा पराली जलाने से होने वाले पर्यावरणीय नुकसान और भूमि की उर्वरता में कमी जैसी समस्याओं से भी राहत मिलेगी।

जैविक खेती को जनआंदोलन बनाने का आह्वान
अपने संबोधन में मंत्री डॉ. टेटवाल ने किसानों से जैविक एवं प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने, गौवंश संरक्षण एवं संवर्धन में सक्रिय भागीदारी निभाने, रसायन मुक्त कृषि को जनआंदोलन बनाने तथा आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वस्थ भूमि, स्वच्छ जल और सुरक्षित पर्यावरण उपलब्ध कराने का संकल्प लेने का आह्वान किया।
उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि किसानों की मेहनत, कृषि वैज्ञानिकों के मार्गदर्शन और सरकार की प्रतिबद्धता से मध्यप्रदेश जैविक एवं प्राकृतिक खेती के क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य बनेगा।
कार्यक्रम में सांसद श्री रोडमल नागर, किसान मोर्चा प्रदेश उपाध्यक्ष श्री राजेंद्र सिंह राजपूत, भाजपा जिलाध्यक्ष श्री ज्ञानसिंह गुर्जर, किसान मोर्चा जिला अध्यक्ष श्री सतीश बेस, जनपद अध्यक्ष सारंगपुर श्री देवनारायण नागर, जनपद उपाध्यक्ष श्री कैलाश नागर, मंडल अध्यक्ष पचोर श्री विकास दीक्षित, मंडल अध्यक्ष श्री गिरवर नागर, मंडल अध्यक्ष सारंगपुर श्री महेश पुष्पद, जिला मंत्री श्री मनोहर परमार, महिला मोर्चा जिलामंत्री श्रीमती नीलम सक्सेना, पूर्व जिला मंत्री सुश्री किरण सूर्यवंशी, कृषि विभाग के अधिकारी, कृषि वैज्ञानिक प्रबंधक राजपूत, जनप्रतिनिधिगण, सरपंचगण, पदाधिकारी, कार्यकर्ता एवं क्षेत्र के सैकड़ों कृषक बंधु उपस्थित रहे।
