MP Jail Department में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल: अधीक्षक और डिप्टी जेलरों के तबादले
मध्यप्रदेश में जेल प्रशासन के स्तर पर लंबे समय बाद एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है। राज्य सरकार ने 15 जून 2026, सोमवार को जारी आदेश के तहत Jail Department में व्यापक तबादले किए हैं। इस आदेश में जहां चार जेल अधीक्षकों को इधर से उधर किया गया है, वहीं करीब 20 डिप्टी जेलरों के भी स्थानांतरण किए गए हैं। इस कदम को जेल व्यवस्था में प्रशासनिक कसावट और कार्यकुशलता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
जेल अधीक्षकों के तबादले: प्रमुख बदलाव
जारी आदेश के अनुसार प्रदेश के विभिन्न केंद्रीय और जिला जेलों में पदस्थ चार अधीक्षकों के कार्यक्षेत्र में बदलाव किया गया है। इन तबादलों में कई वरिष्ठ अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां दी गई हैं, जबकि कुछ को पहले से परिचित जेलों में दोबारा भेजा गया है।
सबसे प्रमुख बदलावों में सागर से मानवेंद्र सिंह परिहार का तबादला भोपाल सेंट्रल जेल में किया गया है। उन्हें अब प्रदेश की सबसे महत्वपूर्ण जेलों में से एक भोपाल सेंट्रल जेल की जिम्मेदारी सौंपी गई है, जिसे प्रशासनिक दृष्टि से संवेदनशील माना जाता है।
ग्वालियर से शिवपुरी जेल में बदलाव
दूसरे महत्वपूर्ण बदलाव में ग्वालियर से विदित सरवैया को शिवपुरी जेल भेजा गया है। दिलचस्प बात यह है कि विदित सरवैया पहले भी शिवपुरी जेल में अधीक्षक के रूप में अपनी सेवाएं दे चुके हैं। ऐसे में उनका पुराने कार्यस्थल पर लौटना प्रशासनिक अनुभव और स्थानीय व्यवस्था की निरंतरता के रूप में देखा जा रहा है।
इंदौर और भोपाल केंद्रीय जेल में भी फेरबदल
जेल विभाग के इस आदेश में इंदौर और भोपाल केंद्रीय जेल से जुड़े अधिकारियों के बीच भी बड़ा आदान-प्रदान किया गया है।
केंद्रीय जेल अधीक्षक दिनेश नरगावे को भोपाल जेल मुख्यालय से इंदौर केंद्रीय जेल भेजा गया है। वहीं इंदौर केंद्रीय जेल की अधीक्षक अलका सोनकर को भोपाल स्थानांतरित किया गया है। यह अदला-बदली प्रदेश की दो सबसे प्रमुख केंद्रीय जेलों के प्रशासनिक ढांचे में संतुलन स्थापित करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।
इन दोनों जेलों में सुरक्षा, कैदियों की निगरानी और प्रबंधन के लिहाज से उच्च स्तर की जिम्मेदारियां होती हैं, इसलिए यहां तैनात अधिकारियों का अनुभव और निर्णय क्षमता बेहद महत्वपूर्ण होती है।

खंडवा और नरसिंहपुर जेल में नई जिम्मेदारियां
जारी आदेश के तहत खंडवा जेल की अधीक्षक अदिति चतुर्वेदी पांडे को भी नई जिम्मेदारी सौंपी गई है। उन्हें नरसिंहपुर केंद्रीय जेल में प्रभारी अधीक्षक के पद पर स्थानांतरित किया गया है।
इस बदलाव को प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि नरसिंहपुर केंद्रीय जेल में भी सुरक्षा और प्रबंधन से जुड़े कई संवेदनशील कार्य होते हैं। ऐसे में अनुभवी अधिकारियों की नियुक्ति से जेल संचालन को और अधिक सुचारु बनाने की उम्मीद जताई जा रही है।
डिप्टी जेलरों का बड़े पैमाने पर तबादला
केवल अधीक्षकों ही नहीं, बल्कि इस आदेश में लगभग 20 डिप्टी जेलरों के भी तबादले किए गए हैं। यह कदम जेल विभाग में निचले स्तर पर प्रशासनिक पुनर्गठन का हिस्सा माना जा रहा है।
डिप्टी जेलरों की भूमिका जेलों के दैनिक संचालन, अनुशासन बनाए रखने और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने में अहम होती है। इसलिए इन तबादलों से कई जिलों की जेलों में नई कार्यप्रणाली और प्रबंधन शैली देखने को मिल सकती है।
हालांकि विस्तृत सूची अलग से जारी की गई है, लेकिन माना जा रहा है कि इन तबादलों का उद्देश्य जेलों में कार्यक्षमता बढ़ाना और लंबे समय से एक ही स्थान पर तैनात अधिकारियों का पुनर्नियोजन करना है।

प्रशासनिक सुधार की दिशा में कदम
जेल विभाग में किए गए इस बड़े फेरबदल को प्रशासनिक सुधार की दिशा में एक अहम पहल के रूप में देखा जा रहा है। लंबे समय से कई अधिकारी एक ही स्थान पर कार्यरत थे, जिससे व्यवस्थागत स्थिरता तो बनी हुई थी, लेकिन नए दृष्टिकोण और बदलाव की जरूरत महसूस की जा रही थी।
सरकार की ओर से किए गए इन तबादलों का उद्देश्य जेलों में अनुशासन, पारदर्शिता और सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करना बताया जा रहा है। साथ ही यह भी माना जा रहा है कि नए अधिकारियों की नियुक्ति से जेलों के संचालन में नई ऊर्जा आएगी।
संवेदनशील जेलों में अनुभवी अधिकारियों की तैनाती
भोपाल सेंट्रल जेल और इंदौर केंद्रीय जेल जैसे संस्थान प्रदेश की सबसे संवेदनशील जेलों में गिने जाते हैं। यहां सुरक्षा, कैदियों की निगरानी और प्रशासनिक नियंत्रण बेहद सख्त होता है।
ऐसे में इन जेलों में अनुभवी और जिम्मेदार अधिकारियों की तैनाती को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मानवेंद्र सिंह परिहार, अलका सोनकर और दिनेश नरगावे जैसे अधिकारियों को उनकी प्रशासनिक क्षमता और अनुभव के आधार पर इन महत्वपूर्ण स्थानों पर भेजा गया है।
पहले भी शिवपुरी में रह चुके हैं विदित सरवैया
ग्वालियर से शिवपुरी भेजे गए विदित सरवैया पहले भी इसी जेल में अधीक्षक के रूप में कार्य कर चुके हैं। ऐसे में उनकी वापसी को प्रशासनिक निरंतरता और स्थानीय व्यवस्थाओं की बेहतर समझ के रूप में देखा जा रहा है।
उनके अनुभव का लाभ जेल संचालन में सुधार और व्यवस्थाओं को और अधिक प्रभावी बनाने में मिल सकता है।
Jail Department में बदलाव का व्यापक असर
इस तरह के बड़े पैमाने पर तबादलों का असर केवल संबंधित जेलों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरे जेल विभाग की कार्यप्रणाली पर पड़ता है। नए अधिकारियों के आने से नीतियों के क्रियान्वयन, सुरक्षा व्यवस्था और कैदियों के प्रबंधन में बदलाव देखने को मिल सकता है।
इसके साथ ही यह भी उम्मीद की जा रही है कि डिप्टी जेलरों के स्तर पर हुए बदलाव से जमीनी प्रशासन में सुधार आएगा और विभिन्न जिलों की जेलों में एक समान कार्यप्रणाली विकसित होगी।
निष्कर्ष: सुधार और पुनर्गठन की दिशा में कदम
मध्यप्रदेश जेल विभाग में किया गया यह प्रशासनिक फेरबदल स्पष्ट रूप से एक व्यापक पुनर्गठन की प्रक्रिया का हिस्सा प्रतीत होता है। चार जेल अधीक्षकों और लगभग 20 डिप्टी जेलरों के तबादले से यह संकेत मिलता है कि सरकार जेल व्यवस्था को अधिक प्रभावी और अनुशासित बनाने की दिशा में सक्रिय है।
भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, शिवपुरी और नरसिंहपुर जैसी प्रमुख जेलों में हुए ये बदलाव आने वाले समय में जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली को नया स्वरूप दे सकते हैं।
