Indore News: नाला सफाई अभियान की खुली पोल, मलबे और कचरे से भरे मिले बोगदे,
Indore । मानसून से पहले शहर को जलभराव से बचाने के लिए नगर निगम द्वारा चलाए जा रहे नाला सफाई अभियान पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। निगम के दावों के विपरीत कई स्थानों पर नालों की स्थिति बेहद खराब पाई गई है। हैरानी की बात यह है कि इस मामले का खुलासा किसी विपक्षी नेता या सामाजिक संगठन ने नहीं, बल्कि नगर निगम की महापौर परिषद के सदस्य और जल समिति प्रभारी अभिषेक शर्मा ‘बबलू’ ने स्वयं किया है।
अभिषेक शर्मा ने शहर के विभिन्न क्षेत्रों के वीडियो सोशल मीडिया पर साझा करते हुए नाला सफाई कार्यों की वास्तविक स्थिति उजागर की है। वीडियो में कई स्थानों पर नालों में भारी मात्रा में कचरा, गाद और निर्माण कार्यों का मलबा जमा दिखाई दे रहा है। इससे निगम के उस दावे पर सवाल उठ रहे हैं, जिसमें कहा गया था कि मानसून से पहले प्रमुख नालों की व्यापक सफाई कर दी गई है।
जंजीरवाला चौराहे के पास सामने आई लापरवाही
महापौर परिषद सदस्य द्वारा जारी किए गए वीडियो में जंजीरवाला चौराहे से अटल द्वार की ओर जाने वाले मार्ग पर स्थित नाले की स्थिति दिखाई गई है। वीडियो में स्पष्ट नजर आ रहा है कि नाले के भीतर बड़ी मात्रा में कचरा और निर्माण मलबा जमा है। इतना ही नहीं, पुल के नीचे बने बोगदों में से एक बोगदा पूरी तरह मलबे और कचरे से भरा हुआ दिखाई देता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते सफाई नहीं हुई तो बारिश के दौरान पानी की निकासी प्रभावित होगी और आसपास के क्षेत्रों में जलभराव की समस्या पैदा हो सकती है।
जूनी Indore ओवरब्रिज के नीचे भी मिला कचरे का अंबार
जारी किए गए अन्य वीडियो में जूनी इंदौर ओवरब्रिज के नीचे की स्थिति भी सामने आई है। यहां भी नाले के आसपास और भीतर भारी मात्रा में कचरा और मलबा जमा मिला। यह स्थिति तब सामने आई है जब नगर निगम पिछले डेढ़ महीने से नाला सफाई अभियान चलाने का दावा कर रहा है।
शहरवासियों का कहना है कि करोड़ों रुपये खर्च करने के बावजूद यदि नालों की यह स्थिति है, तो अभियान की निगरानी और गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठना स्वाभाविक है।
करोड़ों खर्च, लेकिन जमीनी हकीकत अलग
हर वर्ष बारिश शुरू होने से पहले नगर निगम द्वारा नाला सफाई पर करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं। इस अभियान का उद्देश्य नालों से गाद, कचरा और अवरोध हटाकर पानी की निकासी को सुचारु बनाना होता है ताकि बारिश के दौरान शहर में जलभराव की समस्या न हो।
इस वर्ष भी निगम ने अप्रैल से नाला सफाई अभियान शुरू किया था। अधिकारियों ने दावा किया था कि शहर के प्रमुख नालों की सफाई तेजी से की जा रही है। लेकिन अब सामने आए वीडियो इन दावों की वास्तविकता पर प्रश्नचिह्न लगा रहे हैं।
स्वच्छता अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
अभिषेक शर्मा ने वीडियो जारी करते हुए संबंधित जोनल कार्यालयों और स्वच्छता विभाग के अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने पूछा कि जब पिछले दो महीनों से सफाई अभियान चल रहा है, तो संबंधित अधिकारियों ने इन स्थानों का निरीक्षण क्यों नहीं किया।
उन्होंने कहा कि यदि नालों की नियमित मॉनिटरिंग की जाती तो ऐसी स्थिति सामने नहीं आती। अधिकारियों को जवाब देना चाहिए कि सफाई कार्यों की निगरानी किस प्रकार की जा रही है और करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद नालों में कचरा और मलबा क्यों जमा है।
बारिश से पहले बढ़ी चिंता
मौसम विभाग द्वारा प्रदेश में मानसून के सक्रिय होने की संभावना जताई जा रही है। ऐसे में नालों की खराब स्थिति शहर प्रशासन के लिए चिंता का विषय बन सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते नालों की सफाई नहीं की गई तो कई इलाकों में जलभराव और यातायात प्रभावित होने जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं।
शहरवासियों ने भी मांग की है कि निगम केवल कागजी दावों तक सीमित न रहे, बल्कि जमीनी स्तर पर सफाई कार्यों की समीक्षा कर जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई करे।
जांच और कार्रवाई की मांग
वीडियो वायरल होने के बाद अब नाला सफाई कार्यों की गुणवत्ता को लेकर जांच की मांग तेज हो गई है। नागरिकों का कहना है कि यदि सफाई के नाम पर लापरवाही हुई है तो जिम्मेदार अधिकारियों और ठेकेदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
मानसून की दस्तक से पहले सामने आई यह स्थिति नगर निगम के लिए बड़ी चुनौती बन गई है। आने वाले दिनों में निगम प्रशासन इस मामले पर क्या कदम उठाता है, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।
