Tikamgarh MP Utsav Dham Inauguration Cancelled: घटिया निर्माण देखकर भड़के केंद्रीय मंत्री वीरेंद्र कुमार,
टीकमगढ़ में सांसद उत्सव धाम का लोकार्पण अचानक टला
Tikamgarh MP Utsav Dham Inauguration Cancelled: मध्य प्रदेश के Tikamgarh जिले के ग्राम ताल लिधौरा में सांसद निधि से तैयार किए गए “सांसद उत्सव धाम” भवन का लोकार्पण उस समय विवादों में आ गया जब केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री वीरेंद्र कुमार ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर आपत्ति जताई। निरीक्षण के दौरान भवन की स्थिति देखकर वे काफी नाराज हो गए और बिना उद्घाटन किए ही कार्यक्रम स्थल से लौट गए।
यह घटना न सिर्फ स्थानीय प्रशासन के लिए झटका साबित हुई, बल्कि पूरे संसदीय क्षेत्र में निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर सवाल खड़े कर दिए।
निरीक्षण के दौरान सामने आई गंभीर खामियां
केंद्रीय मंत्री जब लोकार्पण कार्यक्रम के लिए मौके पर पहुंचे, तो उन्होंने भवन का बारीकी से निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्हें कई जगह निर्माण में खामियां दिखाई दीं, खासकर सीढ़ियों की हालत और फिनिशिंग का स्तर बेहद खराब पाया गया।
मंत्री ने मौके पर मौजूद लोक निर्माण विभाग (PWD) के अधिकारियों से तत्काल सवाल-जवाब किए और निर्माण की गुणवत्ता पर नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा कि इस तरह का घटिया निर्माण किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जा सकता।
हनुमान मंदिर में बैठकर अफसरों की क्लास
घटना के बाद केंद्रीय मंत्री पास के हनुमान मंदिर पहुंचे, जहां उन्होंने ग्रामीणों के बीच बैठकर अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई। उन्होंने साफ कहा कि जनता के पैसे का इस तरह दुरुपयोग बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
मंत्री ने यह भी कहा कि यदि निर्माण कार्य की यही स्थिति रही तो पूरे प्रोजेक्ट की समीक्षा की जाएगी और जिम्मेदारों पर कार्रवाई भी तय है।
“5 लाख में इससे अच्छा काम हो जाता” – मंत्री का बयान
केंद्रीय मंत्री वीरेंद्र कुमार ने नाराजगी जताते हुए कहा कि 10 लाख रुपये की लागत के बावजूद निर्माण की गुणवत्ता बेहद खराब है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि “इतने पैसे में तो हम खुद 5 लाख रुपये में इससे बेहतर भवन बनवा सकते हैं।”
उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि बिना उचित सामग्री और मानक के निर्माण कैसे पूरा कर लिया गया। खासकर कोटा स्टोन और अन्य फिनिशिंग सामग्री की अनुपस्थिति पर उन्होंने गंभीर चिंता व्यक्त की।
“मेरा काम ही मेरी पहचान है” – सख्त संदेश
अधिकारियों को संबोधित करते हुए मंत्री ने कहा कि उन्हें किसी स्वागत समारोह या औपचारिकताओं की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने कहा कि उनका असली सम्मान उनके द्वारा किए गए काम की गुणवत्ता में है।
उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि काम ऐसा होना चाहिए जो वर्षों तक टिके, न कि कुछ महीनों या वर्षों में खराब हो जाए। उन्होंने यह भी जोड़ा कि जनता नेताओं के काम को देखकर ही उन्हें याद रखती है, न कि आयोजनों या औपचारिक स्वागत से।
पूरे संसदीय क्षेत्र में जांच के आदेश
केंद्रीय मंत्री ने निर्देश दिए कि केवल ताल लिधौरा ही नहीं, बल्कि उनके संसदीय क्षेत्र में बने सभी “सांसद उत्सव धाम” भवनों की गुणवत्ता की जांच कराई जाए। उन्होंने कहा कि जहां-जहां निर्माण कार्य चल रहा है, वहां तुरंत सुधार सुनिश्चित किया जाए।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जब तक सभी आवश्यक सुधार पूरे नहीं होते, तब तक किसी भी भवन का लोकार्पण नहीं किया जाएगा।
12 से अधिक गांवों में चल रहा निर्माण कार्य
जानकारी के अनुसार, सांसद निधि से लगभग 1 करोड़ रुपये की लागत से 12 से अधिक गांवों में ऐसे “सांसद उत्सव धाम” बनाए जा रहे हैं। इनमें चंदेरा, बैरवार, चंद्रपुरा, दुर्गानगर, देरी, दोह और लारोन जैसे गांव शामिल हैं।
कुछ स्थानों पर निर्माण कार्य पूरा हो चुका है, जबकि कई जगह अभी काम जारी है। इस घटना के बाद अब सभी परियोजनाओं पर प्रशासनिक निगरानी बढ़ा दी गई है।
ग्रामीणों के गंभीर आरोप
स्थानीय ग्रामीणों ने भी निर्माण कार्य को लेकर कई गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि ठेकेदार ने काम में लापरवाही बरती और गुणवत्ता मानकों का पालन नहीं किया।
ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि निर्माण के दौरान न तो उनकी राय ली गई और न ही किसी तरह का निरीक्षण नियमित रूप से किया गया। इससे निर्माण की गुणवत्ता और अधिक खराब हो गई।
इंजीनियरिंग टीम पर भी सवाल
ग्रामीणों का आरोप है कि पीडब्ल्यूडी के इंजीनियर और एसडीओ ने समय-समय पर साइट का निरीक्षण नहीं किया। अगर सही निगरानी होती तो इस तरह की स्थिति उत्पन्न नहीं होती।
इस पूरे मामले ने विभागीय कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं और जवाबदेही तय करने की मांग तेज हो गई है।
सामाजिक आयोजनों के लिए बनाया जा रहा था भवन
सांसद उत्सव धाम का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में सामाजिक, धार्मिक और पारिवारिक आयोजनों के लिए एक बेहतर सामुदायिक भवन उपलब्ध कराना था।
यह भवन ग्रामीणों को एक ऐसा स्थान देने के लिए बनाया जा रहा था जहां वे विवाह, धार्मिक आयोजन और अन्य सामाजिक कार्यक्रम आसानी से कर सकें। लेकिन निर्माण की गुणवत्ता पर उठे सवालों ने इस योजना की उपयोगिता पर भी प्रश्नचिह्न लगा दिया है।
प्रशासनिक जवाबदेही की मांग तेज
घटना के बाद अब स्थानीय स्तर पर प्रशासनिक जवाबदेही की मांग तेज हो गई है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते निगरानी होती तो स्थिति इतनी खराब नहीं होती।
वहीं अब विभागीय स्तर पर जांच की संभावना भी जताई जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि निर्माण में लापरवाही किस स्तर पर हुई।
निष्कर्ष
टीकमगढ़ में “सांसद उत्सव धाम” का लोकार्पण रुकना केवल एक प्रशासनिक घटना नहीं है, बल्कि यह सरकारी निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर बड़ा सवाल है। केंद्रीय मंत्री की नाराजगी ने यह साफ कर दिया है कि अब केवल बजट स्वीकृति नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर गुणवत्ता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।
यह मामला आने वाले समय में अन्य निर्माण परियोजनाओं के लिए भी एक सख्त संदेश साबित हो सकता है कि सार्वजनिक धन के उपयोग में लापरवाही अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
