9 जून को Gold-Silver में उतार-चढ़ाव: मिडिल ईस्ट तनाव, कच्चे तेल की कीमतों और डॉलर की मजबूती का असर
वैश्विक तनाव के बीच सर्राफा बाजार में मिला-जुला रुख
9 जून 2026 को भारतीय और वैश्विक सर्राफा बाजार में Gold-Silver की कीमतों में मिला-जुला रुख देखने को मिला। मिडिल ईस्ट (पश्चिम एशिया) में जारी भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने वैश्विक कमोडिटी बाजारों को प्रभावित किया है। इसके चलते निवेशकों की धारणा में बदलाव देखने को मिला है और सुरक्षित निवेश (Safe Haven) माने जाने वाले सोने की कीमतों पर दबाव बना हुआ है।
सुबह के शुरुआती कारोबार में सोना और चांदी दोनों में हल्की कमजोरी दर्ज की गई। विशेषज्ञों के अनुसार, वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता के बावजूद डॉलर इंडेक्स को मजबूत सपोर्ट मिला है, जिसका सीधा असर कीमती धातुओं पर पड़ा है।
डॉलर और तेल की कीमतों ने बनाया दबाव
कमोडिटी विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा समय में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने अमेरिकी डॉलर को मजबूती दी है। डॉलर की मजबूती के चलते अन्य मुद्राओं के मुकाबले सोने की कीमतें महंगी हो जाती हैं, जिससे इसकी मांग प्रभावित होती है।
इसके अलावा, निवेशकों द्वारा मुनाफावसूली (Profit Booking) भी एक बड़ा कारण माना जा रहा है। हाल के महीनों में सोने की कीमतों में तेज़ी के बाद अब निवेशक लाभ निकालने में लगे हुए हैं, जिससे कीमतों में अस्थायी गिरावट देखी जा रही है।
MCX पर Gold-Silver में गिरावट
घरेलू वायदा बाजार यानी मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर भी आज कमजोर रुझान देखने को मिला।
- 5 अगस्त एक्सपायरी वाला सोना करीब 0.03% की गिरावट के साथ लगभग ₹1,54,700 प्रति 10 ग्राम पर कारोबार करता नजर आया।
- जुलाई कॉन्ट्रैक्ट वाली चांदी में भी कमजोरी देखने को मिली और यह 0.67% टूटकर ₹2,44,749 प्रति किलोग्राम के स्तर पर आ गई।
वैश्विक बाजार Comex में भी चांदी पर दबाव रहा, जहां यह लगभग 1.15% गिरकर $67.79 प्रति औंस पर ट्रेड कर रही थी।
यह साफ संकेत है कि अंतरराष्ट्रीय बाजारों की सुस्ती का असर भारतीय वायदा बाजार पर भी दिखाई दे रहा है।
घरेलू बाजार में सोने के ताजा रेट
भारत में सोने की कीमतें उसकी शुद्धता (Purity) के आधार पर अलग-अलग होती हैं। 9 जून को घरेलू बाजार में औसतन रेट इस प्रकार रहे:
24 कैरेट सोना
- ₹1,51,680 प्रति 10 ग्राम
22 कैरेट सोना
- ₹1,39,040 प्रति 10 ग्राम
18 कैरेट सोना
- ₹1,13,760 प्रति 10 ग्राम
ज्वैलर्स का कहना है कि वैश्विक अनिश्चितता और कीमतों में लगातार बदलाव के कारण ग्राहकों की खरीदारी फिलहाल सतर्क बनी हुई है। शादी-ब्याह और त्योहारी सीजन से पहले भी मांग में ज्यादा तेजी नहीं देखी जा रही है।
शहरों के अनुसार सोने के दाम
देश के अलग-अलग शहरों में टैक्स, ट्रांसपोर्ट और स्थानीय शुल्क के कारण सोने की कीमतों में थोड़ा अंतर देखने को मिलता है।
दिल्ली
- 24K: ₹15,183
- 22K: ₹13,919
- 18K: ₹11,391
मुंबई
- 24K: ₹15,168
- 22K: ₹13,904
- 18K: ₹11,376
कोलकाता
- 24K: ₹15,168
- 22K: ₹13,904
- 18K: ₹11,376
चेन्नई
- 24K: ₹15,348
- 22K: ₹14,069
- 18K: ₹11,794
दक्षिण भारत के बेंगलुरु, हैदराबाद और केरल में भी कीमतें लगभग मुंबई के समान बनी रहीं। वहीं गुजरात के अहमदाबाद और वडोदरा में हल्की भिन्नता दर्ज की गई।
बाजार विशेषज्ञों की राय और तकनीकी स्तर
मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि फिलहाल सोना एक सीमित दायरे (Range Bound Market) में ट्रेड कर रहा है। तकनीकी स्तरों के अनुसार:
- ₹1,52,500 को मजबूत सपोर्ट लेवल माना जा रहा है
- ₹1,54,750 पर मजबूत रेजिस्टेंस देखने को मिल रहा है
विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक सोना इन स्तरों के बाहर नहीं निकलता, तब तक इसमें तेज़ी या गिरावट की बड़ी चाल की संभावना कम है।
वैश्विक संकेतों पर टिकी बाजार की नजर
निवेशकों की नजर अब आने वाले वैश्विक आर्थिक संकेतों पर टिकी हुई है। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:
- अमेरिका की ब्याज दर नीति
- डॉलर इंडेक्स की चाल
- कच्चे तेल की कीमतें
- मिडिल ईस्ट में भू-राजनीतिक स्थिति
- वैश्विक मुद्रास्फीति के आंकड़े
इन सभी कारकों के आधार पर आने वाले दिनों में सोने-चांदी की दिशा तय होगी।
निवेशकों के लिए क्या संकेत?
विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा समय में बाजार में अस्थिरता बनी हुई है। ऐसे में निवेशकों को जल्दबाजी में निर्णय लेने से बचना चाहिए। अल्पकालिक उतार-चढ़ाव के बावजूद सोना अब भी एक सुरक्षित निवेश विकल्प माना जाता है।
लंबी अवधि के निवेशकों के लिए यह समय रणनीति बनाने का हो सकता है, जबकि अल्पकालिक ट्रेडर्स को तकनीकी स्तरों पर नजर रखनी चाहिए।
निष्कर्ष
कुल मिलाकर 9 जून को सर्राफा बाजार में सोना और चांदी दोनों में हल्की कमजोरी और अस्थिरता देखने को मिली। मिडिल ईस्ट तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और डॉलर की मजबूती ने मिलकर कीमती धातुओं पर दबाव बनाया है।
फिलहाल बाजार में कोई स्पष्ट ट्रेंड नहीं है और आने वाले दिनों में वैश्विक घटनाओं के आधार पर ही सोने-चांदी की दिशा तय होगी। निवेशकों की नजर अब अंतरराष्ट्रीय बाजारों के संकेतों पर बनी हुई है, जो आगे की चाल को निर्धारित करेंगे।
