Gold-Silver Price Today 9 June 2026: लगातार तीसरे दिन गिरावट, सोना ₹1,000 तक सस्ता,
भारतीय सर्राफा बाजार में सोने-चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट
9 जून 2026 को भारतीय सर्राफा बाजार में Gold-Silver की कीमतों में गिरावट का रुख जारी है। यह लगातार तीसरा दिन है जब कीमती धातुओं के दामों में कमी दर्ज की गई है। वैश्विक बाजारों में अस्थिरता और ‘ब्लैक मंडे’ जैसी स्थिति के बाद निवेशकों की धारणा कमजोर हुई है, जिसका सीधा असर घरेलू बाजारों पर देखने को मिल रहा है।
सुबह के कारोबार में MCX और रिटेल मार्केट दोनों में सोना करीब ₹1,000 प्रति 10 ग्राम तक सस्ता हुआ, जबकि चांदी की कीमतों में भी ₹500 से ₹1,000 प्रति किलोग्राम तक की गिरावट दर्ज की गई है।
आज के सोने के ताजा दाम (Gold Price Today)
आज भारतीय बाजार में सोने की कीमतों में सभी कैटेगरी में गिरावट देखने को मिली है।
- 24 कैरेट सोना: ₹1,51,800 प्रति 10 ग्राम (कल ₹1,52,840) → गिरावट ₹1,040
- 22 कैरेट सोना: ₹1,39,050 प्रति 10 ग्राम (कल ₹1,40,000) → गिरावट ₹950
- 18 कैरेट सोना: ₹1,13,850 प्रति 10 ग्राम (कल ₹1,14,630) → गिरावट ₹780
विशेषज्ञों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कमजोरी और निवेशकों द्वारा मुनाफावसूली (profit booking) की वजह से सोने की कीमतों पर दबाव बना हुआ है।
चांदी की कीमतों में भी गिरावट (Silver Price Today)
सोने के साथ-साथ चांदी की कीमतों में भी लगातार दबाव देखा जा रहा है। आज चांदी की कीमतें लगभग ₹2,59,900 से ₹2,60,000 प्रति किलोग्राम के बीच बनी हुई हैं।
रिटेल बाजारों में चांदी की कीमत लगभग ₹260 से ₹270 प्रति 10 ग्राम के स्तर पर कारोबार कर रही है। लगातार बिकवाली के कारण चांदी की मांग पर असर पड़ा है और कीमतें नीचे आ गई हैं।
Gold-Silver की कीमतें क्यों गिर रही हैं?
विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक स्तर पर कई बड़े आर्थिक और भू-राजनीतिक कारणों की वजह से सोने-चांदी के दामों में गिरावट आई है।
1. ईरान-इजरायल संघर्ष में अस्थायी रुकावट
मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच अमेरिका की मध्यस्थता के बाद ईरान और इजरायल ने फिलहाल हवाई हमलों पर रोक लगाने का संकेत दिया है। युद्ध के टलने की उम्मीद से निवेशकों ने सुरक्षित निवेश (safe haven assets) जैसे सोना और चांदी से पैसा निकालना शुरू कर दिया है।
2. अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी
अमेरिका के 10-वर्षीय ट्रेजरी बॉन्ड की यील्ड दो सप्ताह के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है। जब बॉन्ड पर रिटर्न बढ़ता है, तो निवेशक सोने जैसे गैर-ब्याज देने वाले एसेट्स की बजाय बॉन्ड की ओर आकर्षित होते हैं। इससे सोने की मांग में गिरावट आती है।
3. डॉलर इंडेक्स में मजबूती
अमेरिकी डॉलर में मजबूती का सीधा असर कमोडिटी बाजार पर पड़ा है। डॉलर मजबूत होने से अन्य मुद्राओं में सोना और चांदी महंगे हो जाते हैं, जिससे उनकी वैश्विक मांग घट जाती है।
इसी कारण MCX पर स्पॉट गोल्ड गिरकर लगभग $4319 प्रति औंस के करीब पहुंच गया है, जो पिछले दो महीनों का निचला स्तर माना जा रहा है।
निवेशकों के लिए क्या संकेत हैं?
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि वर्तमान समय में सोने और चांदी की कीमतों में जो गिरावट देखने को मिल रही है, वह मुख्य रूप से वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों और निवेशकों की बदलती धारणा का परिणाम है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में जारी अनिश्चितता, भू-राजनीतिक घटनाक्रमों में आंशिक स्थिरता और प्रमुख आर्थिक संकेतकों में बदलाव ने निवेशकों के व्यवहार को प्रभावित किया है। इसी कारण बड़ी संख्या में निवेशक सुरक्षित निवेश साधनों से बाहर निकलकर मुनाफावसूली (profit booking) की रणनीति अपना रहे हैं, जिससे कीमतों पर अतिरिक्त दबाव बन रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार, जब भी वैश्विक बाजारों में अस्थिरता कम होती है या जोखिम की धारणा घटती है, तो सोने जैसे सुरक्षित निवेश की मांग अस्थायी रूप से कम हो जाती है। इसके चलते कीमतों में गिरावट देखी जाती है। इसके अलावा डॉलर इंडेक्स में मजबूती और बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी भी सोने की कीमतों को प्रभावित कर रही है।
हालांकि, लंबी अवधि के दृष्टिकोण से देखा जाए तो सोना आज भी एक मजबूत और सुरक्षित निवेश विकल्प माना जाता है। विशेषकर वैश्विक आर्थिक संकट, मुद्रास्फीति और भू-राजनीतिक तनाव के समय निवेशक फिर से सोने की ओर रुख करते हैं। इसलिए विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि अल्पकालिक उतार-चढ़ाव से घबराने के बजाय दीर्घकालिक निवेश रणनीति अपनाना अधिक लाभकारी हो सकता है।
निष्कर्ष
9 जून 2026 को भारतीय सर्राफा बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में लगातार तीसरे दिन गिरावट दर्ज की गई है। यह गिरावट मुख्य रूप से वैश्विक आर्थिक और भू-राजनीतिक घटनाक्रमों के प्रभाव के चलते देखने को मिल रही है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में उतार-चढ़ाव, अमेरिकी डॉलर की मजबूती और बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी ने मिलकर कीमती धातुओं पर दबाव बनाया है। इन सभी कारकों के कारण निवेशकों का रुझान अस्थायी रूप से सोने-चांदी जैसे सुरक्षित निवेश से हटकर अन्य विकल्पों की ओर बढ़ा है, जिससे कीमतों में नरमी आई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि जब वैश्विक स्तर पर आर्थिक संकेतक मजबूत होते हैं, तो निवेशक सुरक्षित परिसंपत्तियों में निवेश कम कर देते हैं, जिसका सीधा असर सोने और चांदी की मांग पर पड़ता है। इसके अलावा मुनाफावसूली की प्रवृत्ति भी इस गिरावट को और बढ़ा रही है।
फिलहाल बाजार में अस्थिरता और उतार-चढ़ाव का माहौल बना हुआ है। आने वाले दिनों में कीमतों की दिशा काफी हद तक वैश्विक संकेतों, अंतरराष्ट्रीय घटनाओं और आर्थिक नीतियों पर निर्भर करेगी। ऐसे में निवेशकों की नजर लगातार वैश्विक बाजारों के रुझानों और आर्थिक आंकड़ों पर बनी हुई है, जो आगे की स्थिति को तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

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