Shivraj Singh Chouhan की किताब अपनापन में पीएम नरेंद्र मोदी, अरुण जेटली, बाबूलाल गौर और भाजपा के शुरुआती दौर के कई दिलचस्प किस्से सामने आए। जानिए मोदीजी की पहली मुलाकात, ईमेल वाला मजेदार किस्सा और अरुण जेटली से जुड़ी बातें।
Shivraj Singh Chouhan की किताब अपनापन : मोदीजी के अनसुने किस्सों ने सबका दिल जीत लिया
Shivraj Singh Chouhan की किताब अपनापन का भव्य विमोचन
Shivraj Singh Chouhan की किताब अपनापन मंगलवार को नई दिल्ली में लॉन्च हुई। इस खास मौके पर कई बड़े नेता मौजूद रहे। कार्यक्रम भारत रत्न सी. सुब्रमण्यम सभागार, एनएएससी कॉम्प्लेक्स, पूसा में आयोजित किया गया। पुस्तक का विमोचन पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा और पूर्व उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने किया।इस किताब में मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ अपने राजनीतिक और व्यक्तिगत अनुभव साझा किए हैं। किताब में कई ऐसे किस्से शामिल हैं जो भाजपा के पुराने दौर और नेताओं के आपसी संबंधों को बेहद करीब से दिखाते हैं।
मोदीजी और भाजपा के पुराने दिनों की झलक
Shivraj Singh Chouhan की किताब अपनापन केवल एक राजनीतिक पुस्तक नहीं बल्कि भाजपा संगठन की कार्यशैली और नेताओं के मानवीय पहलुओं को सामने लाने वाली किताब बन गई है।शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि भाजपा के शुरुआती दिनों में तकनीक का इस्तेमाल बहुत कम होता था। कार्यकर्ता पारंपरिक तरीके से संगठन चलाते थे और नई तकनीक को लेकर झिझक रहती थी।उसी दौर का एक मजेदार किस्सा आज सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है।
‘फीमेल-ईमेल’ वाला मजेदार किस्सा
Shivraj Singh Chouhan ने किताब में बताया कि जब नरेंद्र मोदी भाजपा के प्रभारी के रूप में मध्यप्रदेश आए थे, तब संगठन की चुनावी तैयारियों को लेकर बैठक चल रही थी।उस दौरान मोदीजी ने बैठक में पूछा कि “किसके पास ई-मेल आईडी है?”उस समय शायद ही किसी कार्यकर्ता के पास ईमेल आईडी थी। सभी एक-दूसरे का चेहरा देखने लगे। तभी मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय बाबूलाल गौर ने मजाकिया अंदाज में कहा—“नरेंद्र भाई, आप यह फीमेल-फीमेल क्या कह रहे हैं, इस फीमेल-ईमेल से क्या होगा?”इतना सुनते ही पूरा हॉल ठहाकों से गूंज उठा। यह किस्सा अब सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है।
मोदीजी से पहली मुलाकात का जिक्र
Shivraj Singh Chouhan की किताब अपनापन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से पहली मुलाकात का भी विस्तार से जिक्र किया गया है।शिवराज ने लिखा कि 1991 में भाजपा ने कन्याकुमारी से लेकर श्रीनगर तक राष्ट्रीय एकता यात्रा निकालने का फैसला किया था। उस समय जम्मू-कश्मीर आतंकवाद और अलगाववाद का बड़ा केंद्र माना जाता था।लाल चौक पर तिरंगा फहराना बेहद मुश्किल माना जाता था, लेकिन भाजपा ने 26 जनवरी 1992 को वहां तिरंगा फहराने का संकल्प लिया।इसी यात्रा की तैयारियों के दौरान 21 नवंबर 1991 को दिल्ली में शिवराज सिंह चौहान की पहली मुलाकात नरेंद्र मोदी से हुई थी।
2013 चुनाव जीत के बाद का दिल छू लेने वाला किस्सा
किताब में 2013 मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव का जिक्र भी बेहद खास तरीके से किया गया है।शिवराज सिंह चौहान ने लिखा कि चुनाव जीतने के बाद उन्होंने नरेंद्र मोदी को शपथ ग्रहण समारोह में आमंत्रित किया था। उस समय मोदीजी भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार घोषित हो चुके थे।शिवराज सिंह चौहान भाषण को लेकर थोड़ा संकोच महसूस कर रहे थे क्योंकि उनका संबोधन तय था, लेकिन किसी वरिष्ठ नेता का भाषण तय नहीं था।मोदीजी ने तुरंत उनकी झिझक समझ ली और बेहद सहज अंदाज में कहा—“आप चिंता मत करें, मैं यहीं रुककर कार्यकर्ताओं से बात करूंगा।”इसके बाद मोदीजी मंच के नीचे कार्यकर्ताओं के बीच बैठकर कार्यक्रम खत्म होने का इंतजार करते रहे। शिवराज सिंह चौहान ने इसे भाजपा की कार्यकर्ता संस्कृति का सबसे बड़ा उदाहरण बताया।
पिता के निधन पर सबसे पहला कॉल मोदीजी का
Shivraj Singh Chouhan की किताब अपनापन में एक बेहद भावुक प्रसंग भी शामिल है।शिवराज सिंह चौहान ने लिखा कि 2019 में उनके पिता के निधन के बाद सबसे पहला सांत्वना कॉल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आया था।उन्होंने सिर्फ औपचारिक बातचीत नहीं की बल्कि परिवार और पिता की बीमारी के बारे में विस्तार से पूछा। कुछ दिनों बाद दिल्ली में मुलाकात होने पर भी मोदीजी ने परिवार की स्थिति के बारे में जानकारी ली।यह प्रसंग किताब के सबसे भावुक हिस्सों में से एक माना जा रहा है।
अरुण जेटली और ‘ज्यादा मत खाना’ वाला मजेदार किस्सा
किताब में पूर्व वित्त मंत्री स्वर्गीय अरुण जेटली से जुड़ा एक हल्का-फुल्का किस्सा भी शामिल है।शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि पार्टी बैठकों के दौरान नरेंद्र मोदी कई बार मजाकिया अंदाज में अरुण जेटली की प्लेट सामने से खींच लेते थे और कहते थे—“ज्यादा मत खाना।”इस छोटे से मजाक में भी मोदीजी का अपनापन और साथियों के प्रति चिंता साफ दिखाई देती थी।शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि मोदीजी केवल राजनीतिक कामकाज तक सीमित नहीं रहते थे, बल्कि अपने साथियों के स्वास्थ्य और परिवार की भी चिंता करते थे।
भाजपा की कार्यकर्ता संस्कृति की झलक
शिवराज सिंह चौहान की किताब अपनापन भाजपा की कार्यकर्ता संस्कृति को भी बेहद करीब से दिखाती है।किताब में कई जगह यह महसूस होता है कि भाजपा नेताओं के बीच केवल राजनीतिक संबंध नहीं बल्कि पारिवारिक अपनापन भी रहा है।मोदीजी के साथ जुड़े किस्सों में अनुशासन, संवेदनशीलता, हास्य और संगठन के प्रति समर्पण साफ नजर आता है।
सोशल मीडिया पर क्यों ट्रेंड कर रही है किताब?
किताब लॉन्च होते ही सोशल मीडिया पर इसके कई हिस्से वायरल हो गए। खासतौर पर—
- ‘फीमेल-ईमेल’ वाला किस्सा
- अरुण जेटली से ‘ज्यादा मत खाना’ कहना
- पिता के निधन पर पहला कॉल
- कार्यकर्ताओं के बीच बैठना
इन सभी घटनाओं ने लोगों को भाजपा के पुराने दौर की झलक दिखाई।
किताब क्यों खास मानी जा रही है?
राजनीतिक किताबें अक्सर भाषणों और घटनाओं तक सीमित रहती हैं, लेकिन Shivraj Singh Chouhan की किताब अपनापन नेताओं के मानवीय पक्ष को सामने लाती है।इस किताब में सत्ता से ज्यादा रिश्तों, संवाद और संगठन की संस्कृति को महत्व दिया गया है।
निष्कर्ष
Shivraj Singh Chouhan की किताब अपनापन केवल राजनीतिक संस्मरण नहीं बल्कि भाजपा संगठन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के व्यक्तित्व की कई अनसुनी कहानियों का संग्रह बनकर सामने आई है।मोदीजी का सहज व्यवहार, कार्यकर्ताओं के प्रति सम्मान, साथियों की चिंता और हल्का-फुल्का हास्य इस किताब को खास बनाता है।राजनीति में जहां अक्सर केवल भाषण और बयान चर्चा में रहते हैं, वहीं यह किताब रिश्तों और अपनापन की राजनीति को सामने लाती है।
