रीवा जैन साध्वी दुर्घटना विरोध प्रदर्शन को लेकर सिरोंज में जैन समाज, आईजा, विहिप और बजरंग दल ने मौन जुलूस निकालकर ज्ञापन सौंपा। संत सुरक्षा नीति, एसआईटी जांच और साधु-संतों की सुरक्षा की मांग तेज हुई।
रीवा जैन साध्वी दुर्घटना विरोध प्रदर्शन: सिरोंज में जैन समाज का मौन जुलूस, संत सुरक्षा कानून की मांग
रीवा जैन साध्वी दुर्घटना विरोध प्रदर्शन: सिरोंज में उमड़ा जैन समाज
रीवा जैन साध्वी दुर्घटना विरोध प्रदर्शन को लेकर सोमवार को सिरोंज नगर में जैन समाज के सभी पंथों के लोगों ने विशाल मौन जुलूस निकालकर प्रशासन को ज्ञापन सौंपा। राष्ट्रीय संत मुनि श्री 108 सुधा सागर जी महाराज के आव्हान पर देशभर में आयोजित इस विरोध कार्यक्रम के तहत सिरोंज में भी बड़ी संख्या में समाजजन सड़क पर उतरे।
इस दौरान ऑल इंडिया जैन जर्नलिस्ट एसोसिएशन (आईजा), विश्व हिन्दू परिषद, बजरंग दल, आरएसएस कार्यकर्ता, जैन समाज की महिलाएं, युवा और वरिष्ठजन बड़ी संख्या में शामिल हुए। सभी ने रीवा में हुई दो आर्यिका माताजी की दुखद सड़क दुर्घटना को गंभीर बताते हुए निष्पक्ष जांच और संत सुरक्षा कानून की मांग की।
राष्ट्रीय संत मुनि श्री 108 सुधा सागर जी महाराज के आव्हान पर देशभर में आंदोलन
राष्ट्रीय संत मुनि श्री 108 सुधा सागर जी महाराज के आव्हान पर जैन समाज द्वारा पूरे देश में मौन जुलूस निकालकर प्रशासन को ज्ञापन सौंपे जा रहे हैं। समाज का कहना है कि लगातार विहाररत साधु-संत सड़क हादसों का शिकार हो रहे हैं, लेकिन अब तक स्थायी सुरक्षा व्यवस्था नहीं बनाई गई।सिरोंज में आयोजित कार्यक्रम में समाजजनों ने कहा कि यह केवल दुर्घटना नहीं बल्कि संत समाज की सुरक्षा से जुड़ा अत्यंत संवेदनशील विषय है। जैन समाज ने सरकार से राष्ट्रीय स्तर पर “संत सुरक्षा नीति” लागू करने की मांग की।
चंद्रप्रभु जिनालय से प्रारंभ हुआ मौन जुलूस
यह मौन जुलूस नगर के कठाली बाजार स्थित चंद्रप्रभु जिनालय से प्रारंभ हुआ। हाथों में तख्तियां और बैनर लिए श्रद्धालु नगर के प्रमुख मार्गों से होते हुए पुलिस थाना पहुंचे।पूरे जुलूस के दौरान शांति और अनुशासन का वातावरण बना रहा। श्रद्धालु मौन रहकर संतों की सुरक्षा की मांग कर रहे थे। समाजजनों ने “अहिंसा के साधकों की सुरक्षा करो” जैसे संदेशों के माध्यम से प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया।
ज्ञापन सौंपने के दौरान भावुक हुईं साध्वी सूक्ष्ममति माताजी
ज्ञापन सौंपने के दौरान जैन साध्वी सूक्ष्ममति माताजी भावुक होकर रो पड़ीं। उन्होंने प्रशासन को बताया कि वे स्वयं उस संघ के साथ रह चुकी हैं और पूर्व में भी कई बार ऐसी सड़क दुर्घटनाएं हो चुकी हैं।उन्होंने दुख व्यक्त करते हुए कहा कि अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। साध्वीजी ने कहा कि इस घटना ने पूरे संत समाज को झकझोर दिया है। जब वे अपनी पीड़ा व्यक्त कर रही थीं, तब वहां मौजूद श्रद्धालुओं की आंखें भी नम हो गईं।कई श्रद्धालुओं ने अपने मोबाइल में मौजूद दुर्घटना से जुड़े वीडियो प्रशासनिक अधिकारियों को दिखाए और निष्पक्ष जांच की मांग की।
प्रशासन को सौंपा गया ज्ञापन
जैन समाज ने एसडीएम हरिषंकर विश्वकर्मा, पुलिस एसडीओपी श्रीमती सोनू डाबर और थाना प्रभारी गजेन्द्र सिंह बुंदेला को ज्ञापन सौंपा।ज्ञापन में समाज ने मांग की कि रीवा में हुई घटना की उच्चस्तरीय निष्पक्ष जांच कराई जाए और दोषियों पर कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए।
समाज ने कहा कि उपलब्ध वीडियो और तथ्यों के आधार पर कई गंभीर आशंकाएं उत्पन्न हो रही हैं, इसलिए एसआईटी या न्यायिक जांच आवश्यक है।
संत सुरक्षा प्रोटोकॉल लागू करने की मांग
विहार मार्गों पर विशेष सुरक्षा व्यवस्था
ज्ञापन में कहा गया कि विहाररत जैन साधु-संत पूर्णतः निहत्थे और अहिंसक होते हैं। वे पैदल विहार करते हैं और किसी प्रकार की सुरक्षा या वाहन का उपयोग नहीं करते। इसलिए उनके विहार मार्गों पर विशेष सुरक्षा व्यवस्था बनाई जाए।समाज ने मांग की कि संवेदनशील क्षेत्रों में पुलिस सहयोग, ट्रैफिक नियंत्रण और चेतावनी संकेत लगाए जाएं।
हाईवे और भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में सुरक्षा
जैन समाज ने कहा कि हाईवे और भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में संतों के विहार के दौरान विशेष सावधानी बरती जाए। प्रशासनिक समन्वय के साथ स्थानीय स्तर पर सुरक्षा तंत्र बनाया जाए।
राष्ट्रीय संत सुरक्षा नीति बनाने की मांग
ज्ञापन में भारत सरकार से राष्ट्रीय संत सुरक्षा नीति लागू करने की मांग की गई। इसमें पैदल विहार करने वाले संतों के लिए राष्ट्रीय गाइडलाइन और सुरक्षा एसओपी बनाने की बात कही गई।
एसआईटी जांच और डिजिटल साक्ष्य सुरक्षित रखने की मांग
जैन समाज ने प्रशासन से मांग की कि:
- घटना की एसआईटी या न्यायिक जांच कराई जाए
- सभी सीसीटीवी फुटेज और डिजिटल साक्ष्य सुरक्षित रखे जाएं
- दोषियों पर कठोर कार्रवाई हो
- यदि षड्यंत्र के तथ्य सामने आएं तो गंभीर धाराएं लगाई जाएं
समाज का कहना है कि संत समाज के साथ लगातार बढ़ती दुर्घटनाएं पूरे देश के लिए चिंता का विषय हैं।
साधु-संतों की सुरक्षा क्यों बना बड़ा मुद्दा
जैन साधु-संत देशभर में पैदल विहार करते हैं। वे तप, त्याग, संयम और अहिंसा का संदेश देते हैं। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में कई सड़क दुर्घटनाओं में संत समाज के लोगों की मृत्यु हुई है।इसी कारण अब जैन समाज लगातार “संत सुरक्षा प्रोटोकॉल” लागू करने की मांग कर रहा है। समाज का कहना है कि संत आत्मरक्षा नहीं करते और किसी सुरक्षा साधन का उपयोग नहीं करते, इसलिए सरकार को विशेष व्यवस्था करनी चाहिए।
जैन समाज ने प्रशासन से क्या कहा
समाजजनों ने कहा कि जैन समाज सदैव शांति, अहिंसा और संवैधानिक व्यवस्था में विश्वास रखता है। आंदोलन का उद्देश्य किसी प्रकार का तनाव उत्पन्न करना नहीं बल्कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकना है।समाज ने प्रशासन से त्वरित और प्रभावी कदम उठाने की अपील की।
निष्कर्ष
रीवा जैन साध्वी दुर्घटना विरोध प्रदर्शन अब पूरे देश में जैन समाज के लिए एक बड़ा आंदोलन बनता जा रहा है। सिरोंज में निकला मौन जुलूस केवल विरोध नहीं बल्कि संत समाज की सुरक्षा को लेकर गहरी चिंता का प्रतीक बना।राष्ट्रीय संत मुनि श्री 108 सुधा सागर जी महाराज के आव्हान पर उठी यह मांग अब राष्ट्रीय संत सुरक्षा नीति तक पहुंच चुकी है। समाज की अपेक्षा है कि प्रशासन निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई करेगा और भविष्य में संतों की सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाएगा।



