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Indore की तर्ज पर मध्यप्रदेश के छोटे शहरों में बनेंगे एलिवेटेड कॉरिडोर, ट्रैफिक जाम से मिलेगी राहत

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Published On: 25 May 2026
Indore
— इंदौर की तर्ज पर अब मध्यप्रदेश के छोटे शहरों में भी बनेंगे एलिवेटेड कॉरिडोर! ट्रैफिक जाम से मिलेगी राहत

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Indore की तर्ज पर मध्यप्रदेश के छोटे शहरों में बनेंगे एलिवेटेड कॉरिडोर, ट्रैफिक जाम से मिलेगी राहत

मध्यप्रदेश Indore में बढ़ते ट्रैफिक दबाव और शहरी जाम की समस्या को देखते हुए राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाने की तैयारी शुरू कर दी है। अब इंदौर की तरह प्रदेश के छोटे शहरों में भी एलिवेटेड कॉरिडोर बनाए जाएंगे, जिससे लोगों को ट्रैफिक जाम से राहत मिलेगी और आवागमन अधिक सुगम हो सकेगा। इस योजना के तहत शहरी सड़कों के पुनर्गठन और यातायात व्यवस्था को आधुनिक बनाने पर जोर दिया जा रहा है।

यह निर्णय Indore के एलआईजी से नौलखा तक बनने वाले एलिवेटेड कॉरिडोर मॉडल के आधार पर लिया गया है। इस परियोजना का प्रस्ताव इंदौर उत्थान अभियान द्वारा तैयार किया गया था, जिसे बाद में स्वीकृति मिल गई और काम शुरू हो चुका है। अब इसी मॉडल को प्रदेश के अन्य छोटे शहरों में भी लागू करने की तैयारी है।

डी-कंजेशन परियोजना के तहत होगा निर्माण

प्रदेश सरकार की योजना के अनुसार यह सभी एलिवेटेड कॉरिडोर डी-कंजेशन परियोजना के तहत बनाए जाएंगे। इसका मुख्य उद्देश्य शहरों में लगातार बढ़ रहे ट्रैफिक दबाव को कम करना और यात्रा समय को घटाना है। इससे प्रमुख चौराहों और मुख्य मार्गों पर लगने वाले जाम की समस्या में काफी हद तक राहत मिलने की उम्मीद है।

लोक निर्माण विभाग (PWD) इस पूरी योजना के लिए विस्तृत कार्ययोजना तैयार कर रहा है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर विभाग इस दिशा में तेजी से काम कर रहा है। वर्तमान में प्रदेश के कई शहरों में एलिवेटेड कॉरिडोर से जुड़ी परियोजनाएं पहले से ही चल रही हैं, और अब इनका विस्तार छोटे शहरों तक किया जाएगा।

Indore मॉडल बना प्रेरणा, अन्य शहरों में भी होगा विस्तार

Indore उत्थान अभियान द्वारा तैयार किया गया एलिवेटेड कॉरिडोर मॉडल अब पूरे राज्य के लिए एक उदाहरण बन गया है। इंदौर में एलआईजी से नौलखा तक बनने वाले कॉरिडोर को आधुनिक शहरी विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

इस मॉडल में यह व्यवस्था है कि नीचे सामान्य यातायात के लिए सड़कें होंगी, जबकि ऊपर एलिवेटेड लेन बनाई जाएगी। इससे ट्रैफिक को दो स्तरों पर विभाजित किया जा सकेगा, जिससे जाम की स्थिति में कमी आएगी।

6 लेन नीचे और 4 लेन ऊपर की योजना

प्रस्तावित कॉरिडोर में नीचे 6 लेन और ऊपर 4 लेन की व्यवस्था की जाएगी। विशेषज्ञों के अनुसार इस संरचना से लगभग 166 प्रतिशत अधिक सड़क उपयोग क्षमता प्राप्त होगी। इससे शहरों में यातायात का दबाव लंबे समय तक नियंत्रित किया जा सकेगा।

योजना के अनुसार यह कॉरिडोर अगले 40 वर्षों तक ट्रैफिक समस्या से राहत देने में सक्षम होंगे। इससे न केवल समय की बचत होगी, बल्कि ईंधन की खपत भी कम होगी और प्रदूषण पर भी नियंत्रण पाया जा सकेगा।

ट्रैफिक व्यवस्था में बड़ा बदलाव

एलिवेटेड कॉरिडोर बनने के बाद शहरों की ट्रैफिक व्यवस्था में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। लंबी दूरी के वाहन ऊपर बने कॉरिडोर से गुजरेंगे, जबकि स्थानीय और छोटी दूरी के वाहन नीचे की सड़कों का उपयोग करेंगे। इससे दोनों स्तरों पर ट्रैफिक का दबाव विभाजित हो जाएगा।

इस व्यवस्था से बिना सिग्नल रुके वाहन तेज गति से अपने गंतव्य तक पहुंच सकेंगे। इससे न केवल जाम की समस्या खत्म होगी, बल्कि सड़क दुर्घटनाओं में भी कमी आने की संभावना है।

प्रदूषण और ईंधन खपत में भी कमी

एलिवेटेड कॉरिडोर के निर्माण से वाहनों के लगातार रुकने और चलने की स्थिति में कमी आएगी, जिससे ईंधन की खपत कम होगी। इसके साथ ही प्रदूषण स्तर पर भी सकारात्मक असर पड़ेगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रैफिक जाम कम होने से वाहनों के इंजन पर दबाव घटेगा, जिससे उनकी कार्यक्षमता बढ़ेगी और पर्यावरण पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।

मुख्यमंत्री के निर्देश पर तैयार हो रही कार्ययोजना

मुख्यमंत्री के निर्देश पर लोक निर्माण विभाग इस परियोजना पर तेजी से कार्य कर रहा है। विभाग विभिन्न शहरों में ट्रैफिक अध्ययन कर रहा है और उसी आधार पर कॉरिडोर की योजना तैयार की जा रही है।

Indore उत्थान अभियान के तहत तैयार किए गए प्रस्ताव को पहले ही जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के सामने प्रस्तुत किया जा चुका है। इसके बाद इसे मुख्यमंत्री को भी भेजा गया, जहां से इस पर सकारात्मक निर्णय लिया गया।

महानगरों के मॉडल का अध्ययन कर बनाई गई योजना

Indore उत्थान अभियान के प्रतिनिधियों ने बताया कि इस योजना को तैयार करने से पहले नागपुर, पुणे, बेंगलुरु और हैदराबाद जैसे बड़े शहरों के ट्रैफिक सिस्टम का अध्ययन किया गया था।

इन शहरों में लागू एलिवेटेड कॉरिडोर और आधुनिक सड़क प्रबंधन तकनीकों का विश्लेषण करने के बाद मध्यप्रदेश के लिए यह मॉडल तैयार किया गया है।

निष्कर्ष

मध्यप्रदेश में एलिवेटेड कॉरिडोर की यह योजना शहरी विकास की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है। छोटे शहरों में बढ़ते ट्रैफिक दबाव को देखते हुए यह परियोजना आने वाले वर्षों में लोगों के लिए बड़ी राहत साबित हो सकती है। यदि यह योजना सफलतापूर्वक लागू होती है, तो प्रदेश के कई शहरों में ट्रैफिक जाम की समस्या काफी हद तक समाप्त हो सकती है और आवागमन अधिक सुगम और सुरक्षित बन सकता है।

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