आर्यिका श्रुतमति माताजी समाधि की दुखद घटना से जैन समाज आहत है। रीवा सड़क हादसे में माताजी की समाधि हुई, उपशममति माताजी गंभीर घायल हैं।
राजेश जैन दद्दू
आर्यिका श्रुतमति माताजी समाधि से जैन समाज आहत
रीवा के पास हुए एक दर्दनाक सड़क हादसे में परमआर्यिका श्रुतमति माताजी की समाधि हो जाने से संपूर्ण भारत वर्षीय जैन समाज गहरे शोक और चिंता में डूब गया है। यह दुखद घटना उस समय हुई जब माताजी सुबह जंगल की ओर सोच क्रिया के लिए जा रही थीं। उसी दौरान एक तेज रफ्तार बड़े वाहन ने उन्हें टक्कर मार दी, जिससे उनकी मौके पर ही समाधि हो गई।इस हादसे में उपशममति माताजी भी गंभीर रूप से घायल हो गई हैं, जिनका उपचार जारी है। वहीं दो अन्य माताजी बाल-बाल बच गईं। घटना रीवा नगर क्षेत्र की बताई जा रही है।
कैसे हुआ दर्दनाक हादसा
समाज प्रवक्ता राजेश जैन दद्दू ने जानकारी देते हुए बताया कि आर्यिका श्रुतमति माताजी सुबह अन्य माताजियों के साथ निकली थीं। तभी अचानक तेज गति से आए एक बड़े वाहन ने उन्हें कुचल दिया। हादसा इतना भयावह था कि पूरे जैन समाज में शोक की लहर फैल गई।प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार वाहन चालक हादसे के बाद मौके से फरार हो गया। घटना के बाद स्थानीय लोगों और जैन समाज के सदस्यों में भारी आक्रोश देखा गया।
उपशममति माताजी की हालत गंभीर
हादसे में उपशममति माताजी को गंभीर चोटें आई हैं। उनका इलाज जारी है और चिकित्सकों द्वारा उनकी स्थिति गंभीर बताई जा रही है। समाजजन लगातार उनके स्वास्थ्य लाभ के लिए प्रार्थना कर रहे हैं।वर्तमान में आर्यिका श्रुतमति माताजी, आर्यिका सौम्यमती माताजी के संघ में विराजमान थीं।
आचार्य श्री विद्यासागर महाराज से मिली थी दीक्षा
आर्यिका श्रुतमति माताजी ने 13 फरवरी 2006 को सिद्ध क्षेत्र कुंडलपुर में परम पूज्य आचार्य श्री विद्यासागर महाराज के करकमलों से आर्यिका दीक्षा प्राप्त की थी।इसके पूर्व 29 मई 1998 को भाग्योदय तीर्थ सागर में उन्होंने आचार्य श्री विद्यासागर महाराज से आजीवन ब्रह्मचर्य व्रत लिया था। माताजी का जीवन तप, त्याग और साधना का अद्भुत उदाहरण माना जाता था।
उच्च शिक्षित थीं आर्यिका श्रुतमति माताजी
आर्यिका श्रुतमति माताजी केवल आध्यात्मिक रूप से ही नहीं बल्कि शिक्षा के क्षेत्र में भी अत्यंत प्रखर थीं। उन्होंने एमएससी मानव शास्त्र तथा एम.ए. संस्कृत की शिक्षा प्राप्त की थी।उनका संपूर्ण जीवन समाज, धर्म और संस्कारों के प्रचार-प्रसार के लिए समर्पित रहा। वे जैन धर्म की श्रमण संस्कृति की प्रेरणास्रोत मानी जाती थीं।
परिवार का भी गहरा जुड़ाव जैन साधना से
राजेश जैन दद्दू ने बताया कि माताजी के गृहस्थ अवस्था के बड़े भाई वर्तमान में आचार्य संघ में विराजमान मुनि श्री अचलसागर महाराज हैं, जो इस समय तारादेही जिला दमोह में विराजमान हैं।माताजी मूल रूप से सागर नगर के रामपुरा वार्ड की निवासी थीं। इस दुखद घटना की पुष्टि उनके गृहस्थ अवस्था के भाई आलोक जैन ने भी की है।
जैन समाज में शोक और आक्रोश
इस हृदयविदारक घटना के बाद देशभर के जैन समाज में गहरा दुख और आक्रोश व्याप्त है। समाजजन प्रशासन से दोषी वाहन चालक की शीघ्र गिरफ्तारी और कठोर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।इंदौर दिगंबर जैन समाज सहित विभिन्न सामाजिक संगठनों ने भी इस घटना पर गहरा शोक व्यक्त किया है।
प्रशासन से कड़ी कार्रवाई की मांग
समाज के वरिष्ठ समाजसेवी डॉ. जैनेन्द्र जैन, सामाजिक सांसद के अध्यक्ष आनंद नवीन गोधा, महावीर ट्रस्ट के अध्यक्ष अमित कासलीवाल, राष्ट्रीय जिन शासन एवं विश्व जैन संगठन के मयंक जैन, हंसमुख गांधी, टीके वेद, सुशील पांड्या एवं फेडरेशन की राष्ट्रीय शिरोमणि संरक्षिका श्रीमती पुष्पा कासलीवाल, महिला परिषद संभाग अध्यक्ष श्रीमती मुक्ता जैन और रेखा जैन श्रीफल ने गहरा शोक व्यक्त करते हुए प्रशासन से दोषी वाहन चालक को अतिशीघ्र गिरफ्तार कर कठोर सजा देने की मांग की है।
समाज के लिए अपूरणीय क्षति
आर्यिका श्रुतमति माताजी की समाधि को जैन समाज एक अपूरणीय क्षति मान रहा है। उनका जीवन तप, साधना, त्याग और सेवा का प्रेरणादायी उदाहरण था।देशभर के जैन समाज में श्रद्धांजलि सभाओं और प्रार्थना सभाओं का दौर जारी है। समाजजन नम आंखों से माताजी को श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे हैं।
