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Ujjain: चंदन और त्रिपुंड से सजे बाबा महाकाल, भस्म आरती में उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब

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Published On: 20 May 2026
Ujjain
— चंदन, त्रिपुंड और त्रिनेत्र से सजे बाबा श्री महाकाल के दिव्य दर्शन ने भक्तों को मंत्रमुग्ध कर दिया। उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती के दौरान गूंजे “जय श्री महाकाल” के जयकारे।

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Ujjain: चंदन और त्रिपुंड से सजे बाबा महाकाल, भस्म आरती में उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब

Ujjain स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में बुधवार सुबह ज्येष्ठ अधिकमास शुक्ल पक्ष की चतुर्थी पर भव्य भस्म आरती का आयोजन हुआ। बाबा महाकाल के दिव्य दर्शन के लिए देशभर से पहुंचे श्रद्धालुओं की भारी भीड़ मंदिर परिसर में देर रात से ही उमड़ने लगी थी। मंदिर परिसर “जय श्री महाकाल” के जयघोष से गूंज उठा और भक्त बाबा के अलौकिक स्वरूप के दर्शन कर भाव-विभोर हो गए।

बुधवार को बाबा महाकाल का विशेष चंदन श्रृंगार किया गया। उनके मस्तक पर त्रिपुंड, त्रिनेत्र और चंद्रमा अंकित किया गया, जिसने श्रद्धालुओं का मन मोह लिया। जैसे ही बाबा के पट खुले, भक्तों ने हर-हर महादेव और जय श्री महाकाल के जयकारों से पूरा वातावरण भक्तिमय बना दिया।

सुबह 4 बजे शुरू हुई भस्म आरती

Ujjain मंदिर के पुजारी महेश शर्मा के अनुसार बुधवार सुबह करीब 4 बजे बाबा महाकाल की भस्म आरती संपन्न हुई। परंपरा के अनुसार सबसे पहले वीरभद्र भगवान से आज्ञा ली गई, जिसके बाद मंदिर के पट खोले गए। गर्भगृह में स्थापित सभी देवी-देवताओं का विधिवत पूजन और अभिषेक किया गया।

इसके बाद भगवान महाकाल का जलाभिषेक शुरू हुआ। बाबा का अभिषेक दूध, दही, घी, शक्कर, पंचामृत और विभिन्न फलों के रस से किया गया। वैदिक मंत्रोच्चार और शंखध्वनि के बीच पूरा मंदिर आध्यात्मिक ऊर्जा से भर गया। श्रद्धालु मंत्रमुग्ध होकर इस दिव्य अनुष्ठान को देखते रहे।

“हरि ओम” के उच्चारण के साथ हुआ पूजन

पूजन के दौरान प्रथम घंटानाद के साथ “हरि ओम” का जल भगवान को अर्पित किया गया। इसके बाद पुजारियों और पुरोहितों ने बाबा महाकाल का भव्य श्रृंगार किया। कपूर आरती के बाद भगवान को नवीन मुकुट धारण कराया गया।

भव्य श्रृंगार के बाद महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से शिवलिंग पर पवित्र भस्म अर्पित की गई। मान्यता है कि भस्म अर्पण के बाद भगवान महाकाल निराकार स्वरूप से साकार रूप में भक्तों को दर्शन देते हैं। यही कारण है कि महाकाल की भस्म आरती को बेहद खास और दुर्लभ माना जाता है।

त्रिपुंड और त्रिनेत्र ने बढ़ाई दिव्यता

आज के विशेष श्रृंगार में बाबा महाकाल को चंदन से सजाया गया। उनके मस्तक पर त्रिपुंड, त्रिनेत्र और चंद्रमा अंकित कर उन्हें अद्भुत स्वरूप प्रदान किया गया। यह अलौकिक रूप देखते ही श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे।

मंदिर में मौजूद हजारों श्रद्धालुओं ने बाबा के दिव्य स्वरूप के दर्शन किए और “जय श्री महाकाल” के जयघोष लगाए। कई श्रद्धालु दर्शन के दौरान भावुक भी नजर आए। भक्तों का कहना था कि बाबा महाकाल के दर्शन से उन्हें मानसिक शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा प्राप्त होती है।

ढोल-नगाड़ों और शंखनाद से गूंजा मंदिर

Ujjain भस्म आरती के दौरान मंदिर परिसर झांझ, मंजीरे, ढोल-नगाड़ों और शंखनाद से गूंज उठा। धार्मिक संगीत और वैदिक मंत्रोच्चार ने वातावरण को और अधिक भक्तिमय बना दिया।

श्रद्धालु पूरी श्रद्धा और भक्ति के साथ आरती में शामिल हुए। मंदिर प्रशासन की ओर से दर्शन व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए विशेष इंतजाम किए गए थे। बड़ी संख्या में पुलिस बल और सुरक्षा कर्मियों की तैनाती भी की गई थी।

देशभर से पहुंचे श्रद्धालु

Ujjain महाकाल मंदिर में रोजाना हजारों श्रद्धालु दर्शन करने पहुंचते हैं, लेकिन अधिकमास और विशेष तिथियों पर भक्तों की संख्या कई गुना बढ़ जाती है। बुधवार को भी मध्यप्रदेश सहित देश के विभिन्न राज्यों से श्रद्धालु बाबा महाकाल के दर्शन करने पहुंचे।

कई भक्त रातभर मंदिर परिसर के बाहर लाइन में लगे रहे ताकि सुबह की भस्म आरती में शामिल हो सकें। श्रद्धालुओं का कहना था कि बाबा महाकाल की भस्म आरती के दर्शन जीवन में एक अलग ही आध्यात्मिक अनुभव प्रदान करते हैं।

धार्मिक मान्यता का विशेष महत्व

Ujjain महाकालेश्वर मंदिर की भस्म आरती का हिंदू धर्म में विशेष महत्व माना जाता है। मान्यता है कि बाबा महाकाल की भस्म आरती में शामिल होने और दर्शन करने से भक्तों के सभी कष्ट दूर होते हैं तथा जीवन में सुख-समृद्धि आती है।

भगवान महाकाल को मृत्यु का देवता माना जाता है और उनकी पूजा से भय, संकट और नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है। इसी वजह से देशभर के श्रद्धालु उज्जैन पहुंचकर बाबा महाकाल का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।

महाकाल मंदिर की आरतियों का समय

महाकालेश्वर मंदिर प्रशासन द्वारा आरतियों के समय में बदलाव किया गया है, जो आश्विन मास की पूर्णिमा यानी शरद पूर्णिमा तक लागू रहेगा।

  • भस्म आरती – सुबह 4 बजे से 6 बजे तक
  • दद्योदक आरती – सुबह 7 बजे से 7:45 बजे तक
  • भोग आरती – सुबह 10 बजे से 10:45 बजे तक
  • संध्या पूजन – शाम 5 बजे से 5:45 बजे तक
  • संध्या आरती – शाम 7 बजे से 7:45 बजे तक
  • शयन आरती – रात 10:30 बजे से 11 बजे तक

मंदिर प्रशासन ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे दर्शन के दौरान नियमों का पालन करें और समय से पहले मंदिर पहुंचें ताकि व्यवस्था सुचारु बनी रहे।

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