America न्याय विभाग ने गौतम अडानी और सागर अडानी पर सभी आरोप हटाए, न्यूयॉर्क केस पूरी तरह बंद
America न्याय विभाग (US DOJ) ने अडानी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अडानी और उनके भतीजे सागर अडानी के खिलाफ लगाए गए सभी आपराधिक आरोपों को स्थायी रूप से वापस ले लिया है। इसके साथ ही न्यूयॉर्क की अदालत में चल रहा बहुचर्चित सिक्योरिटीज और फ्रॉड केस पूरी तरह समाप्त हो गया है।
America अभियोजकों ने ईस्टर्न डिस्ट्रिक्ट ऑफ न्यूयॉर्क कोर्ट में दाखिल दस्तावेज में बताया कि विस्तृत समीक्षा के बाद अब वे इस मामले को आगे बढ़ाने की स्थिति में नहीं हैं। इसके बाद अदालत ने भी मामले को “with prejudice” यानी स्थायी रूप से खारिज करने का आदेश दे दिया, जिसका अर्थ है कि यह केस भविष्य में दोबारा नहीं खोला जा सकता।
केस को आगे नहीं बढ़ाने का फैसला
America न्याय विभाग ने कहा कि जांच और समीक्षा के बाद यह निष्कर्ष निकला कि आरोपों को जारी रखने के लिए पर्याप्त आधार मौजूद नहीं है। इसी कारण अभियोजन पक्ष ने अपने अधिकारों के तहत केस को बंद करने का निर्णय लिया।
इस फैसले के बाद अमेरिका में अडानी ग्रुप से जुड़े सभी प्रमुख कानूनी मामलों में एक बड़ा मोड़ आ गया है।
अडानी ग्रुप को लगातार मिल रही राहत
यह फैसला ऐसे समय आया है जब पिछले कुछ महीनों में अडानी ग्रुप को अमेरिका में कई मामलों में राहत मिली है।
हाल ही में अमेरिकी सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन (SEC) ने सोलर एनर्जी निवेश से जुड़े सिविल मामलों का निपटारा किया था। इस समझौते में गौतम अडानी ने लगभग 60 लाख डॉलर और सागर अडानी ने 12 लाख डॉलर का भुगतान करने पर सहमति दी थी। हालांकि दोनों ने किसी भी तरह की गलतफहमी या दोष स्वीकार नहीं किया था।
इसके अलावा अमेरिकी वित्त विभाग के OFAC ने ईरान से जुड़े प्रतिबंधों के कथित उल्लंघन मामले में अडानी ग्रुप के साथ लगभग 27.5 करोड़ डॉलर का समझौता किया था। यह समझौता जांच में सहयोग और स्वैच्छिक खुलासों के आधार पर हुआ था।
जांच में पर्याप्त सबूत नहीं मिले
रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी अभियोजकों ने पूरे मामले की दोबारा समीक्षा की और पाया कि आरोपों को साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत मौजूद नहीं हैं। साथ ही यह भी कहा गया कि इस मामले में अमेरिकी अधिकार क्षेत्र (jurisdiction) को लेकर भी गंभीर सवाल उठे।
इन्हीं कारणों के चलते केस को आगे बढ़ाना कानूनी रूप से संभव नहीं माना गया।
मामला कब शुरू हुआ था
यह केस 2024 के अंत में दायर किया गया था। आरोप लगाया गया था कि अडानी ग्रुप ने भारतीय अधिकारियों से जुड़े कथित 265 मिलियन डॉलर के रिश्वत मामले को छिपाकर अमेरिकी निवेशकों से फंड जुटाया।
हालांकि जांच के दौरान इन आरोपों को साबित करने के लिए मजबूत सबूत नहीं मिल सके।
अडानी की कानूनी टीम के तर्क
अडानी ग्रुप की कानूनी टीम ने लगातार इस मामले में अमेरिकी अधिकार क्षेत्र पर सवाल उठाए। उनका कहना था कि यह मामला अमेरिकी प्रतिभूति कानूनों के दायरे से बाहर है और इसमें किसी भी तरह की सीधी गलतबयानी साबित नहीं हुई है।
कानूनी टीम ने यह भी तर्क दिया कि जिन वित्तीय लेनदेन की जांच हो रही थी, उनका सीधा संबंध अमेरिकी बाजार या बॉन्ड जारी करने से नहीं था।
अदालत का अंतिम आदेश
ईस्टर्न डिस्ट्रिक्ट ऑफ न्यूयॉर्क कोर्ट ने अभियोजन पक्ष की सिफारिश को स्वीकार करते हुए केस को स्थायी रूप से खारिज कर दिया। “with prejudice” आदेश का मतलब है कि यह मामला अब हमेशा के लिए बंद हो गया है और दोबारा अदालत में नहीं लाया जा सकता।
अडानी ग्रुप के लिए बड़ी राहत
इस फैसले को अडानी ग्रुप के लिए एक बड़ी कानूनी राहत माना जा रहा है। अमेरिका में लंबे समय से चल रहे कानूनी और नियामकीय मामलों में अब स्थिति काफी हद तक स्पष्ट हो गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से ग्रुप की वैश्विक कारोबारी छवि और निवेशक भरोसे पर सकारात्मक असर पड़ सकता है।
निष्कर्ष
America न्याय विभाग द्वारा सभी आरोप हटाए जाने और न्यूयॉर्क केस को स्थायी रूप से बंद किए जाने के साथ ही गौतम अडानी और सागर अडानी को बड़ी कानूनी राहत मिली है। यह मामला अब पूरी तरह समाप्त हो चुका है और भविष्य में इसे दोबारा नहीं खोला जा सकता।
