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भोजशाला फैसला जैन समाज के लिए बड़ा मुद्दा बना, ऐतिहासिक जैन प्रतिमाओं पर उठे गंभीर सवाल

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Published On: 16 May 2026
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भोजशाला फैसला जैन समाज में आक्रोश का कारण बना, जैन प्रतिमाओं की पहचान और पुरातात्विक तथ्यों पर उठे सवाल।

भोजशाला फैसला जैन समाज में बढ़ा आक्रोश, प्रतिमाओं की पहचान पर उठे सवाल

भोजशाला फैसला जैन समाज के लिए क्यों बना बड़ा मुद्दा

भोजशाला फैसला जैन समाज में गहरी नाराजगी और आहत भावना का कारण बन गया है। भारत वर्षीय सकल जैन समाज, राष्ट्रीय जिन शासन एकता संघ एवं विश्व जैन संगठन ने फैसले में जैन प्रतिमाओं को हिंदू मंदिर का हिस्सा बताए जाने पर गंभीर आपत्ति दर्ज कराई है।

धर्म समाज प्रचारक राजेश जैन दद्दू, मयंक जैन एवं वरिष्ठ समाजसेवी सलेकचंद जैन सहित समाजजनों ने कहा कि यह निर्णय ऐतिहासिक तथ्यों और पुरातात्विक प्रमाणों के विपरीत है।

भोजशाला फैसला जैन समाज में बढ़ा विरोध

इंदौर में आयोजित चर्चा के दौरान भोजशाला फैसला जैन समाज के प्रतिनिधियों ने कहा कि फैसले से समाज की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं।

जैन प्रतिमाओं को हिंदू मंदिर से जोड़ना गलत

राष्ट्रीय जिन शासन एकता संघ एवं विश्व जैन संगठन के प्रचारक राजेश जैन दद्दू, मयंक जैन और सलेकचंद जैन ने कहा कि भोजशाला परिसर में प्राप्त प्राचीन जैन प्रतिमाएं, शिलालेख एवं अवशेष स्पष्ट रूप से जैन इतिहास से जुड़े हैं।

समाज के पदाधिकारियों ने उठाए सवाल

श्री दिगंबर जैन समाज सामाजिक संसद के अध्यक्ष आनंद जैन गोधा, हर्ष जैन, सुशील पांड्या, नवीन जैन गोधा, डॉ. जैनेन्द्र जैन टीके वेद और हंसमुख गांधी सहित पदाधिकारियों ने फैसले पर सवाल उठाए।

धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचने का आरोप

समाजजनों ने कहा कि जैन प्रतिमाओं को हिंदू मंदिर का हिस्सा बताना जैन संस्कृति और इतिहास के साथ अन्याय है।

केंद्र सरकार की भूमिका पर भी उठे सवाल

भोजशाला फैसला जैन समाज के बीच चर्चा का बड़ा विषय बना हुआ है।

मिलीभगत का आरोप

समाज के वरिष्ठजनों संलेकचंद जैन, डॉ. जैनेन्द्र जैन और सुभाष जैन काला ने आरोप लगाया कि यह फैसला केंद्र सरकार के दबाव और मिलीभगत से प्रभावित प्रतीत होता है।

पुरातात्विक प्रमाणों की मांग

मयंक जैन ने कहा कि तीर्थंकर प्रतिमाओं की स्वतंत्र पहचान को नकारा जाना समाज स्वीकार नहीं करेगा।

विशेषज्ञ समिति से जांच की मांग

राजेश जैन दद्दू ने सकल जैन समाज की ओर से मांग करते हुए कहा कि:

 फैसले पर तत्काल पुनर्विचार किया जाए।
पुरातत्व विभाग के विशेषज्ञों की स्वतंत्र समिति से पुनः जांच कराई जाए।
जैन प्रतिमाओं एवं शिलालेखों का वैज्ञानिक अध्ययन हो।
जैन समाज के पक्ष को विधिवत सुना जाए।

आंदोलन की चेतावनी

राष्ट्रीय जिन शासन एकता संघ एवं विश्व जैन संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि जैन धर्म की अस्मिता से खिलवाड़ हुआ तो समाज लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन करेगा।

राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को सौंपा जाएगा ज्ञापन

समाजजनों ने कहा कि जल्द ही राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री एवं पुरातत्व विभाग को ज्ञापन सौंपा जाएगा।

ऐतिहासिक धरोहर संरक्षण की मांग

भोजशाला फैसला जैन समाज के बीच सांस्कृतिक संरक्षण का बड़ा मुद्दा बन चुका है।

प्रतिमाओं की वास्तविक पहचान जरूरी

समाजजनों ने मांग की कि प्राचीन प्रतिमाओं और शिलालेखों का निष्पक्ष अध्ययन कर उनकी वास्तविक पहचान सार्वजनिक की जाए।

प्रमुख समाजजन और संगठन

इस दौरान प्रमुख रूप से उपस्थित रहे:

  • राजेश जैन दद्दू
  • मयंक जैन
  • सलेकचंद जैन
  • आनंद जैन गोधा
  • हर्ष जैन
  • सुशील पांड्या
  • नवीन जैन गोधा
  • डॉ. जैनेन्द्र जैन
  • टीके वेद
  • हंसमुख गांधी
  • सुभाष जैन काला

निष्कर्ष

भोजशाला फैसला जैन समाज के लिए केवल धार्मिक नहीं बल्कि सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान का विषय बन गया है।समाज ने पुरातात्विक तथ्यों के आधार पर निष्पक्ष जांच और पुनर्विचार की मांग करते हुए लोकतांत्रिक आंदोलन की चेतावनी दी है।

निवेदक:
सकल दिगंबर जैन समाज, भारत
श्री दिगंबर जैन समाज सामाजिक संसद, इंदौर

प्रेषक:
राजेश जैन दद्दू
धर्म समाज प्रचारक, इंदौर
मो. 9425321169

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