इंदौर Bombay Hospital में नर्सों का बड़ा विवाद: भर्ती परीक्षा में छुट्टी न मिलने पर आरोप,
इंदौर। शहर के प्रतिष्ठित Bombay Hospital में कार्यरत नर्सिंग स्टाफ और अस्पताल प्रबंधन के बीच बड़ा विवाद सामने आया है। मामला नर्सिंग ऑफिसर और सिस्टर ट्यूटर भर्ती परीक्षा 2026 से जुड़ा हुआ है, जिसमें शामिल होने जा रही कई नर्सों ने आरोप लगाया है कि उन्हें परीक्षा में शामिल होने के लिए अवकाश नहीं दिया जा रहा है। इसके साथ ही ड्यूटी से अनुपस्थित रहने पर कार्रवाई और हॉस्टल खाली कराने तक की चेतावनी दिए जाने के आरोप भी सामने आए हैं।
यह विवाद अब सिर्फ एक छुट्टी के मुद्दे तक सीमित नहीं रहा, बल्कि कर्मचारियों के अधिकार, अस्पताल प्रबंधन की नीतियों और स्वास्थ्य सेवाओं की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
30 से 35 नर्सों ने दी है भर्ती परीक्षा में शामिल होने की जानकारी
अस्पताल में कार्यरत करीब 30 से 35 नर्सों ने बताया कि उन्होंने सरकारी नर्सिंग भर्ती परीक्षा 2026 के लिए आवेदन किया है। यह परीक्षा 15 मई को आयोजित की जाएगी और इसका उद्देश्य सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं में नर्सिंग ऑफिसर और सिस्टर ट्यूटर के पदों पर भर्ती करना है।
कई नर्सों के परीक्षा केंद्र भोपाल और अन्य शहरों में निर्धारित किए गए हैं। ऐसे में उन्हें यात्रा और परीक्षा की तैयारी के लिए कम से कम एक से दो दिन के अवकाश की आवश्यकता है।
नर्सों का कहना है कि यह परीक्षा उनके करियर के लिए बेहद महत्वपूर्ण है और लंबे समय से इसकी तैयारी की जा रही थी। लेकिन अचानक छुट्टी न मिलने से उनकी मेहनत और भविष्य दोनों पर संकट खड़ा हो गया है।
नर्सों का आरोप: छुट्टी देने से साफ इनकार
नर्सिंग स्टाफ का आरोप है कि अस्पताल प्रबंधन ने भर्ती परीक्षा के लिए छुट्टी देने से साफ इनकार कर दिया है। उनका कहना है कि नर्सिंग सुपरिटेंडेंट सीबी जॉर्ज की ओर से एक ऑडियो संदेश जारी किया गया, जिसमें कहा गया कि जो भी कर्मचारी 15 मई को परीक्षा देने जाएगा, वह अपनी जिम्मेदारी पर जाएगा।
इस संदेश में यह भी कहा गया कि अस्पताल की ड्यूटी व्यवस्था में किसी प्रकार का बदलाव नहीं किया जाएगा और सभी कर्मचारियों को अपनी शिफ्ट के अनुसार ही काम करना होगा।
नर्सों का कहना है कि इस तरह के निर्देशों से वे मानसिक दबाव में हैं और उन्हें अपने भविष्य के फैसले को लेकर कठिन स्थिति का सामना करना पड़ रहा है।
हॉस्टल खाली कराने और कार्रवाई की चेतावनी का आरोप
इस पूरे मामले को और गंभीर बनाने वाला पहलू हॉस्टल से जुड़ा है। हॉस्टल में रहने वाली कई स्टाफ नर्सों का आरोप है कि उन्हें सख्त चेतावनी दी गई है।
बताया जा रहा है कि एक संदेश में कहा गया है कि 14 और 15 मई को किसी भी कर्मचारी को नाइट पास नहीं दिया जाएगा। यदि कोई कर्मचारी ड्यूटी से अनुपस्थित पाया जाता है तो उसके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी और यहां तक कि हॉस्टल खाली कराने की स्थिति भी बन सकती है।
इस चेतावनी के बाद हॉस्टल में रहने वाली नर्सों में भय और असमंजस का माहौल है। कई कर्मचारियों ने इसे दबाव बनाने की कोशिश बताया है।
नर्सों में बढ़ा मानसिक तनाव और असुरक्षा
नर्सों का कहना है कि वे एक बेहद कठिन स्थिति में फंस गई हैं। एक तरफ सरकारी नौकरी की परीक्षा है, जो उनके करियर को एक नई दिशा दे सकती है, और दूसरी तरफ वर्तमान नौकरी का दबाव और संभावित कार्रवाई का डर है।
कुछ नर्सों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि वे मानसिक तनाव में हैं और समझ नहीं पा रही हैं कि परीक्षा में जाएं या नौकरी की शर्तों का पालन करें।
कई कर्मचारियों का कहना है कि यदि वे परीक्षा में शामिल नहीं हो पाती हैं तो उनका करियर प्रभावित होगा, और यदि जाती हैं तो नौकरी पर संकट आ सकता है।
ऑडियो संदेश को लेकर विवाद
नर्सों ने दावा किया है कि उन्हें एक ऑडियो संदेश प्राप्त हुआ है, जिसमें स्पष्ट रूप से कहा गया है कि अस्पताल की ड्यूटी व्यवस्था में किसी प्रकार का बदलाव संभव नहीं है।
इस ऑडियो के सार्वजनिक होने के बाद मामला और तूल पकड़ गया है। हालांकि अस्पताल प्रशासन की ओर से अभी तक इस ऑडियो की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन कर्मचारियों के बीच यह चर्चा का मुख्य विषय बना हुआ है।
Bombay Hospital प्रबंधन का पक्ष
इस मामले पर बॉम्बे हॉस्पिटल के डायरेक्टर राहुल पाराशर ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि अस्पताल में एक साथ बड़ी संख्या में नर्सों के अवकाश पर जाने से स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं।
उन्होंने कहा कि यदि 100 से अधिक नर्सें एक साथ छुट्टी पर चली जाती हैं तो किडनी यूनिट और इमरजेंसी जैसे महत्वपूर्ण विभागों में स्टाफ की कमी हो जाएगी, जिससे मरीजों की देखभाल प्रभावित होगी।
प्रबंधन का कहना है कि उन्होंने किसी को परीक्षा देने से नहीं रोका है, लेकिन सामान्य अवकाश (सीएल) देना संभव नहीं है क्योंकि अस्पताल की व्यवस्था को प्राथमिकता देना जरूरी है।
रीजों की देखभाल बनाम कर्मचारियों के अधिकार
इस विवाद ने एक व्यापक बहस को जन्म दे दिया है। एक तरफ अस्पताल प्रबंधन का तर्क है कि मरीजों की सेवा सर्वोपरि है और स्टाफ की कमी से गंभीर स्थिति उत्पन्न हो सकती है, वहीं दूसरी तरफ नर्सों का कहना है कि उन्हें अपने करियर और भविष्य के लिए अवसर से वंचित नहीं किया जा सकता।
स्वास्थ्य क्षेत्र के विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के मामलों में संतुलन बनाना बेहद जरूरी है, ताकि न तो मरीजों की सेवा प्रभावित हो और न ही कर्मचारियों के अधिकारों का हनन हो।
नर्सिंग समुदाय में नाराजगी
इंदौर और आसपास के क्षेत्रों में नर्सिंग समुदाय में इस घटना को लेकर नाराजगी देखी जा रही है। कई नर्सों का कहना है कि यदि समय पर अवकाश नहीं दिया जाता तो यह उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है।
कुछ संगठनों ने भी इस मामले में हस्तक्षेप की मांग की है और कहा है कि कर्मचारियों को परीक्षा देने का अवसर मिलना चाहिए।
कानूनी और प्रशासनिक पहलू
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, यदि कर्मचारी सरकारी भर्ती परीक्षा में शामिल होना चाहते हैं तो उन्हें उचित कारणों के आधार पर अवकाश दिया जाना चाहिए, हालांकि यह पूरी तरह संस्थान की नीति और नियमों पर निर्भर करता है।
यदि किसी भी तरह का दबाव या धमकी दी जाती है, तो यह श्रम कानूनों के तहत जांच का विषय बन सकता है।
आगे क्या हो सकता है?
इस पूरे विवाद के बाद संभावना है कि मामला प्रशासनिक स्तर पर भी उठाया जा सकता है। नर्सों ने अभी तक औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं कराई है, लेकिन स्थिति बिगड़ने पर यह मामला स्वास्थ्य विभाग और श्रम विभाग तक पहुंच सकता है।
निष्कर्ष
इंदौर के बॉम्बे हॉस्पिटल में नर्सों और प्रबंधन के बीच यह विवाद अब एक गंभीर सामाजिक और प्रशासनिक मुद्दा बन गया है। एक ओर कर्मचारियों का करियर और अधिकार हैं, तो दूसरी ओर अस्पताल की जिम्मेदारियां और मरीजों की सेवा।
अब देखना यह होगा कि इस विवाद का समाधान किस तरह निकलता है और क्या भविष्य में ऐसे मामलों से बचने के लिए कोई स्पष्ट नीति बनाई जाती है या नहीं।
