केवई नदी बचाओ आंदोलन के तहत युवाओं ने जल सत्याग्रह शुरू किया। अदानी प्रोजेक्ट के मिनी बैराज निर्माण का विरोध तेज हुआ।
केवई नदी बचाओ आंदोलन के तहत जल सत्याग्रह शुरू, ग्रामीणों में बढ़ा आक्रोश
कोतमा/अनूपपुर। केवई नदी बचाओ आंदोलन अब क्षेत्र में बड़े जनआंदोलन का रूप लेता दिखाई दे रहा है।कोतमा विधानसभा क्षेत्र के छतई, मंटोलिया और उमरदा में अदानी ग्रुप द्वारा स्थापित किए जा रहे 3200 मेगावाट थर्मल पावर प्लांट के विरोध में ग्रामीणों और युवाओं ने नदी में उतरकर जल सत्याग्रह शुरू कर दिया है।“केवई बचाओ आंदोलन” के बैनर तले बुधवार को चंगेरी में जिला पंचायत सदस्य राम जी रिंकू मिश्रा के नेतृत्व में आंदोलनकारियों ने विरोध प्रदर्शन किया।
केवई नदी बचाओ आंदोलन क्या है
केवई नदी बचाओ आंदोलन क्षेत्र की जीवनदायिनी नदी के संरक्षण के लिए शुरू किया गया जनआंदोलन है।ग्रामीणों का आरोप है कि अदानी ग्रुप के 3200 मेगावाट थर्मल पावर प्लांट के लिए नदी पर जगह-जगह मिनी बैराज बनाए जा रहे हैं, जिससे प्राकृतिक जल प्रवाह प्रभावित हो रहा है।
नदी बचाने के लिए बढ़ा जनसमर्थन
अब यह आंदोलन केवल कुछ गांवों तक सीमित नहीं रह गया, बल्कि आसपास के क्षेत्रों में भी इसका समर्थन बढ़ता जा रहा है।
अदानी प्रोजेक्ट को लेकर बढ़ा विरोध
केवई नदी बचाओ आंदोलन के दौरान आंदोलनकारियों ने अदानी प्रोजेक्ट के खिलाफ खुलकर नाराजगी जाहिर की।
“विकास” के नाम पर नदी का गला घोंटने का आरोप
जिला पंचायत सदस्य राम जी रिंकू मिश्रा ने कहा कि —“विकास के नाम पर अदानी प्रोजेक्ट केवई नदी का गला घोंट रहा है, जिसे हम कतई नहीं होने देंगे।”
प्रशासन और उद्योगपतियों की मिलीभगत का आरोप
आंदोलनकारियों ने आरोप लगाया कि प्रशासन और उद्योगपतियों की मिलीभगत से नदी के प्राकृतिक प्रवाह को रोका जा रहा है।
जल सत्याग्रह पर उतरे युवा
केवई नदी बचाओ आंदोलन के तहत युवाओं ने नदी में उतरकर जल सत्याग्रह शुरू किया।
चंगेरी में हुआ विरोध प्रदर्शन
बुधवार को चंगेरी क्षेत्र में बड़ी संख्या में युवा और ग्रामीण नदी में उतरे और विरोध जताया।
आंदोलन हुआ तेज
ग्रामीणों ने साफ कहा कि यदि नदी के प्रवाह से छेड़छाड़ बंद नहीं हुई तो आंदोलन और उग्र होगा।
मिनी बैराज निर्माण पर सवाल
आंदोलनकारियों का कहना है कि केवई नदी में जगह-जगह मिनी बैराज बनाए जा रहे हैं।
प्राकृतिक प्रवाह प्रभावित होने का आरोप
ग्रामीणों के अनुसार इन निर्माण कार्यों के कारण निचले हिस्सों तक पानी पहुंचना कम हो गया है।
कई गांवों में बढ़ा जल संकट
ग्रामीणों ने दावा किया कि कई गांवों में अब जल संकट की स्थिति बनने लगी है।
ग्रामीणों ने जताया जल संकट का डर
केवई नदी बचाओ आंदोलन में शामिल ग्रामीणों ने भविष्य को लेकर चिंता जताई।
जीवनदायिनी नदी पर संकट
ग्रामीणों का कहना है कि केवई नदी पूरे क्षेत्र की प्यास बुझाती है।
आने वाले वर्षों की चिंता
लोगों का कहना है कि यदि अभी कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले समय में पूरा इलाका पानी के संकट से जूझ सकता है।
जनसुनवाई प्रक्रिया पर उठे सवाल
आंदोलनकारियों ने जनसुनवाई प्रक्रिया की पारदर्शिता पर भी सवाल उठाए।
सोन नदी से पानी लाने का दावा
ग्रामीणों के अनुसार जनसुनवाई के दौरान कहा गया था कि प्लांट के लिए सोन नदी से पाइपलाइन के जरिए पानी लाया जाएगा।
अब सामने आई अलग तस्वीर
लोगों का आरोप है कि अब केवई नदी पर मिनी बैराज बनाकर पानी रोकने की तैयारी की जा रही है।
रोजगार को लेकर भी नाराजगी
केवई नदी बचाओ आंदोलन में युवाओं ने रोजगार के मुद्दे को भी प्रमुखता से उठाया।
स्थानीय युवाओं को नहीं मिला रोजगार
आंदोलनकारियों का आरोप है कि उद्योग लगाने के नाम पर रोजगार के वादे किए गए थे, लेकिन स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता नहीं मिली।
दोहरी मार का आरोप
ग्रामीणों का कहना है कि अब क्षेत्र को पानी की समस्या भी झेलनी पड़ेगी और रोजगार भी नहीं मिलेगा।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से उम्मीदें
प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के कोतमा आगमन को लेकर भी लोगों की नजरें टिकी हुई हैं।
मंत्री दिलीप जायसवाल के कार्यक्रम में शामिल होंगे मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री बुधवार को कोतमा विधायक एवं राज्य मंत्री दिलीप जायसवाल के घर आयोजित विवाह समारोह में शामिल होने पहुंच रहे हैं।
नदी संरक्षण को लेकर उम्मीद
ग्रामीणों को उम्मीद है कि मुख्यमंत्री केवई नदी में बनाए जा रहे मिनी बैराजों पर संज्ञान लेंगे।
भावी पीढ़ियों के भविष्य की चिंता
आंदोलनकारियों ने कहा कि यह लड़ाई केवल पानी की नहीं बल्कि आने वाली पीढ़ियों के अस्तित्व की लड़ाई है।
पर्यावरण संरक्षण की मांग
ग्रामीणों ने नदी के प्राकृतिक स्वरूप और जल संरक्षण के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की।
निष्कर्ष
केवई नदी बचाओ आंदोलन अब पर्यावरण, जल संरक्षण और स्थानीय अधिकारों से जुड़ा बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है।ग्रामीणों और युवाओं ने साफ चेतावनी दी है कि यदि केवई नदी के प्रवाह से छेड़छाड़ बंद नहीं हुई तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।

