—Advertisement—

Ujjain में बाबा महाकाल की भव्य भस्म आरती, भांग और मोगरे के विशेष श्रृंगार में दिए दिव्य दर्शन

Author Picture
Published On: 12 May 2026
Ujjain
— भांग, बेलपत्र और मोगरे के दिव्य श्रृंगार में सजे बाबा महाकाल ने आज भस्म आरती में भक्तों को अलौकिक दर्शन दिए

—Advertisement—

Ujjain में बाबा महाकाल की भव्य भस्म आरती, भांग और मोगरे के विशेष श्रृंगार में दिए दिव्य दर्शन

धार्मिक नगरी Ujjain स्थित विश्व प्रसिद्ध Shri Mahakaleshwar Temple में मंगलवार सुबह ज्येष्ठ माह कृष्ण पक्ष की दशमी पर आयोजित भस्म आरती में श्रद्धा और आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिला। सुबह होने से पहले ही हजारों श्रद्धालु बाबा महाकाल के दर्शन के लिए मंदिर परिसर में पहुंच गए थे। देर रात से लगी लंबी कतारों में भक्त अपने आराध्य के दिव्य दर्शन पाने के लिए उत्साह और भक्ति के साथ इंतजार करते नजर आए। जैसे ही सुबह 4 बजे मंदिर के पट खुले, पूरा परिसर “जय श्री महाकाल” के गगनभेदी जयघोष से गूंज उठा।

विधि-विधान से संपन्न हुई भस्म आरती

मंदिर में परंपरा के अनुसार सबसे पहले गर्भगृह में स्थापित सभी देवी-देवताओं का पूजन किया गया। इसके बाद भगवान महाकाल का जलाभिषेक और पंचामृत अभिषेक विधिपूर्वक संपन्न हुआ। मंदिर के पुजारी पंडित महेश शर्मा के अनुसार भस्म आरती से पहले वीरभद्र जी से आज्ञा ली गई और उसके बाद पूजा-अर्चना का क्रम शुरू हुआ। बाबा महाकाल का अभिषेक दूध, दही, घी, शक्कर, पंचामृत और विभिन्न फलों के रस से किया गया। इस दौरान “हरि ओम” का उच्चारण करते हुए प्रथम घंटाल बजाकर जल अर्पित किया गया।

पूरे गर्भगृह में मंत्रोच्चार, शंखध्वनि और घंटियों की गूंज के बीच वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो गया। श्रद्धालु इस अलौकिक दृश्य को देखकर भाव-विभोर नजर आए। महाकाल मंदिर की भस्म आरती का विशेष महत्व माना जाता है और देशभर से श्रद्धालु इसे देखने के लिए उज्जैन पहुंचते हैं।

भांग, बेलपत्र और मोगरे से हुआ विशेष श्रृंगार

Ujjain भस्म आरती के दौरान बाबा महाकाल का आकर्षक और अद्भुत श्रृंगार किया गया। पुजारियों और पुरोहितों ने भगवान का श्रृंगार भांग और बेलपत्र से किया। बाबा के मस्तक पर चंद्रमा का विशेष स्वरूप सजाया गया, जिसने श्रृंगार की भव्यता को और बढ़ा दिया। इसके साथ ही मखाने और मोगरे की सुगंधित मालाएं अर्पित की गईं।

कपूर आरती के बाद भगवान महाकाल को नवीन मुकुट धारण कराया गया। इसके पश्चात महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से शिवलिंग पर पवित्र भस्म अर्पित की गई। झांझ, मंजीरे, ढोल-नगाड़ों और शंखनाद के बीच संपन्न हुई भस्म आरती ने पूरे मंदिर परिसर को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया। श्रद्धालु “हर हर महादेव” और “जय श्री महाकाल” के जयघोष लगाते हुए इस दिव्य पल के साक्षी बने।

हजारों श्रद्धालुओं ने किए बाबा महाकाल के दर्शन

मंगलवार की भस्म आरती में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। मंदिर परिसर में सुबह से ही भक्तों की भारी भीड़ दिखाई दी। दूर-दराज से आए श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल के दिव्य स्वरूप के दर्शन कर स्वयं को धन्य महसूस किया। मान्यता है कि भस्म अर्पित होने के बाद भगवान महाकाल निराकार से साकार रूप में भक्तों को दर्शन देते हैं। यही कारण है कि भस्म आरती का धार्मिक महत्व अत्यंत विशेष माना जाता है।

श्रद्धालुओं ने मंदिर परिसर में भक्ति और श्रद्धा के साथ पूजा-अर्चना की और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की। कई भक्तों ने इसे जीवन का अविस्मरणीय अनुभव बताया। मंदिर प्रशासन ने भी श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विशेष व्यवस्थाएं की थीं ताकि दर्शन व्यवस्था सुचारु रूप से चल सके।

महाकाल मंदिर की आरतियों का समय

Ujjain महाकाल मंदिर में प्रतिदिन विभिन्न आरतियां निर्धारित समय पर आयोजित की जाती हैं। मंदिर प्रशासन के अनुसार वर्तमान समय व्यवस्था शरद पूर्णिमा तक लागू रहेगी। आरतियों का समय इस प्रकार है:

  • भस्म आरती — सुबह 4:00 बजे से 6:00 बजे तक
  • दद्योदक आरती — सुबह 7:00 बजे से 7:45 बजे तक
  • भोग आरती — सुबह 10:00 बजे से 10:45 बजे तक
  • संध्या पूजन — शाम 5:00 बजे से 5:45 बजे तक
  • संध्या आरती — शाम 7:00 बजे से 7:45 बजे तक
  • शयन आरती — रात 10:30 बजे से 11:00 बजे तक

महाकाल मंदिर की आरतियां देशभर में प्रसिद्ध हैं और प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु इनमें शामिल होने के लिए पहुंचते हैं। खासकर भस्म आरती को देखने के लिए भक्तों में विशेष उत्साह रहता है।

अपरा एकादशी का भी विशेष महत्व

आज 12 मई 2026 को अपरा एकादशी का पर्व भी मनाया जा रहा है। यह एकादशी ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष में आती है और हिंदू धर्म में इसे अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अपरा एकादशी का व्रत रखने से व्यक्ति को सुख, समृद्धि और संपन्नता की प्राप्ति होती है। साथ ही पापों से मुक्ति और आध्यात्मिक उन्नति का भी मार्ग प्रशस्त होता है।

इस बार अपरा एकादशी आज दोपहर से प्रारंभ होकर 13 मई 2026 तक रहेगी। मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना और भगवान विष्णु की आराधना की जा रही है। श्रद्धालु उपवास रखकर धर्म-कर्म और दान-पुण्य के कार्यों में भाग ले रहे हैं।

आस्था और आध्यात्म का केंद्र बना महाकाल मंदिर

Ujjain का महाकाल मंदिर भारत के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है और इसकी धार्मिक मान्यता देशभर में अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। यहां होने वाली भस्म आरती विश्व प्रसिद्ध है। हर दिन हजारों श्रद्धालु बाबा महाकाल के दर्शन के लिए पहुंचते हैं और भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।

मंगलवार को आयोजित भव्य भस्म आरती और विशेष श्रृंगार ने भक्तों को आध्यात्मिक अनुभूति से भर दिया। भांग, बेलपत्र और मोगरे से सजे बाबा महाकाल के दिव्य स्वरूप ने श्रद्धालुओं का मन मोह लिया। पूरे मंदिर परिसर में गूंजते “जय श्री महाकाल” के जयघोष ने वातावरण को पूरी तरह शिवमय बना दिया।

Related News
Breaking News हमेशा आपके पास

SwarajVani App Install करें

Latest India News & Breaking Updates — सीधे Home Screen पर

Offline पढ़ें Breaking Alerts बिल्कुल Free
SwarajVani को iPhone पर install करें:
📤 Share बटन दबाएं → "Add to Home Screen" select करें
Home
Web Stories
Instagram
WhatsApp