Ujjain : भस्म आरती में वैष्णव तिलक, चंद्र और त्रिनेत्र से सजे बाबा महाकाल, भक्तों ने किए दिव्य दर्शन
मध्य प्रदेश के Ujjain स्थित प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में सोमवार, 4 मई 2026 को ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि पर भव्य भस्म आरती का आयोजन किया गया। तड़के सुबह से ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। हजारों भक्त देर रात से कतारों में लगकर अपने आराध्य बाबा महाकाल के दर्शन के लिए प्रतीक्षा करते रहे।
जैसे ही सुबह 4 बजे मंदिर के पट खुले, पूरा परिसर “जय श्री महाकाल” के जयघोष से गूंज उठा। भक्तों में उत्साह और आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिला।
वैदिक मंत्रों के बीच हुआ जलाभिषेक
Ujjain मंदिर के पुजारी पंडित महेश शर्मा के अनुसार, भस्म आरती से पहले पारंपरिक विधि से वीरभद्र जी से अनुमति ली गई। इसके पश्चात गर्भगृह में स्थापित सभी देवी-देवताओं का विधिवत पूजन-अर्चन किया गया।
भगवान महाकाल का अभिषेक दूध, दही, घी, शक्कर से बने पंचामृत और फलों के रस से किया गया। ‘हरि ओम’ के उच्चारण के साथ घंटाल बजाकर पवित्र जल अर्पित किया गया। इस दौरान पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया और श्रद्धालु मंत्रमुग्ध होकर इस दिव्य प्रक्रिया को निहारते रहे।
अद्भुत श्रृंगार: चंद्र, त्रिनेत्र और वैष्णव तिलक
पूजन के बाद भगवान महाकाल का भव्य श्रृंगार किया गया, जो इस दिन की सबसे खास विशेषता रहा। बाबा महाकाल के मस्तक पर चंद्रमा का अलंकरण किया गया और बेलपत्र अर्पित किए गए। साथ ही उन्हें वैष्णव तिलक और त्रिनेत्र से सजाया गया।
इस दिव्य श्रृंगार ने भगवान के स्वरूप को और भी अलौकिक बना दिया। भक्त इस अद्भुत रूप के दर्शन कर भाव-विभोर हो गए।
ढोल-नगाड़ों के बीच संपन्न हुई भस्म आरती
Ujjain श्रृंगार के पश्चात महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से शिवलिंग पर भस्म अर्पित की गई। इसके साथ ही झांझ, मंजीरे, ढोल-नगाड़ों और शंखनाद की गूंज के बीच भस्म आरती का आयोजन हुआ।
मान्यता है कि भस्म अर्पित करने के बाद भगवान शिव निराकार से साकार रूप में भक्तों को दर्शन देते हैं। यही कारण है कि इस आरती का विशेष धार्मिक महत्व है।
भक्तों ने किए दिव्य दर्शनों का लाभ
इस विशेष अवसर पर हजारों श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल के दर्शन कर स्वयं को धन्य महसूस किया। मंदिर परिसर में हर ओर “जय श्री महाकाल” के जयघोष सुनाई देते रहे।
भक्तों का मानना है कि भस्म आरती के दौरान किए गए दर्शन जीवन में सुख, शांति और समृद्धि लाते हैं। इस दिव्य अनुभव ने सभी के मन को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया।
आरती का बदला हुआ समय (शरद पूर्णिमा तक लागू)
Ujjain मंदिर प्रशासन ने श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए आरतियों के समय में बदलाव किया है, जो आश्विन मास की पूर्णिमा तक लागू रहेगा। समय इस प्रकार है:
- भस्म आरती: प्रातः 4:00 से 6:00 बजे तक
- दद्योदक आरती: सुबह 7:00 से 7:45 बजे तक
- भोग आरती: सुबह 10:00 से 10:45 बजे तक
- संध्या पूजन: शाम 5:00 से 5:45 बजे तक
- संध्या आरती: शाम 7:00 से 7:45 बजे तक
- शयन आरती: रात 10:30 से 11:00 बजे तक
आस्था और आध्यात्म का अद्भुत संगम
Ujjain महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग में आयोजित यह भव्य भस्म आरती एक बार फिर आस्था और श्रद्धा का अद्भुत उदाहरण बनी। यहां हर दिन देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालु बाबा महाकाल के दर्शन कर आध्यात्मिक शांति का अनुभव करते हैं।
4 मई 2026 का यह आयोजन भक्तों के लिए अविस्मरणीय रहा, जहां उन्होंने भगवान महाकाल के दिव्य और अलौकिक स्वरूप के दर्शन कर अपने जीवन को धन्य महसूस किया।
