जिनदेशना जैन बाल-युवा शिक्षण शिविर विदिशा में 210 से अधिक बच्चों के साथ भव्य शुभारंभ हुआ। सात दिवसीय शिविर में जैन संस्कार, सर्वज्ञता और आध्यात्मिक शिक्षा पर विशेष मार्गदर्शन दिया जा रहा है।
जिनदेशना जैन बाल-युवा शिक्षण शिविर विदिशा: भव्य शुभारंभ से आध्यात्मिक जागरण की शुरुआत
विदिशा | शोभित जैन रिपोर्ट
जिनदेशना जैन बाल-युवा शिक्षण शिविर विदिशा का भव्य शुभारंभ रविवार, 03 मई 2026 को अत्यंत धार्मिक और उत्साहपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ। अखिल भारतीय जैन युवा फेडरेशन (शाखा विदिशा) एवं अखिल भारतीय जैन महिला फेडरेशन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित यह सात दिवसीय शिविर 09 मई 2026 तक श्री 1008 शीतलनाथ दिगंबर जैन बड़ा मंदिर ट्रस्ट, अंदर किला, विदिशा में आयोजित किया जा रहा है।इस वर्ष शिविर में 210 से अधिक बच्चों का पंजीयन हुआ है, जो समाज में बढ़ती आध्यात्मिक जागरूकता का स्पष्ट संकेत है।
जिनदेशना जैन बाल-युवा शिक्षण शिविर विदिशा का उद्देश्य
इस शिविर का मुख्य उद्देश्य बच्चों और युवाओं को जैन धर्म के मूल सिद्धांतों, संस्कारों और विरासत से जोड़ना है। वर्तमान डिजिटल युग में जहां युवा पीढ़ी तेजी से भौतिकता की ओर आकर्षित हो रही है, वहीं यह शिविर उन्हें आध्यात्मिकता और आत्म-ज्ञान की ओर प्रेरित करता है।
ध्वजारोहण और भव्य शुभारंभ समारोह
शिविर का शुभारंभ भगवान के प्रक्षाल अभिषेक पूजन से हुआ, जिसके पश्चात कक्षाओं का संचालन प्रारंभ हुआ। सायंकालीन समय में भक्ति एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया।ध्वजारोहण का सौभाग्य प्राप्त करने वाले प्रमुख व्यक्तित्व:
- पं. शिखर चंद जैन
- डॉ. संजय जैन
- राजीव जैन
- आलोक जैन
- सूर्यकीर्ति जैन (अलंकार ज्वैलर्स परिवार)
शिविर मंडप उद्घाटन और प्रमुख योगदान
शिविर मंडप का उद्घाटन स्व. डॉ. आर.के. जैन की स्मृति में उनकी धर्मपत्नी श्रीमती सुषमा जैन, सुपुत्र आकाश जैन, विकास जैन, आरजैव जैन एवं संपूर्ण परिवार द्वारा किया गया।आयोजन के प्रमुख आमंत्रणकर्ता:
- स्व. श्री सुभाष चंद जैन
- श्रीमती सन्तोषनी जैन
- अनुराग जैन
- एकांत जैन (शीतल ज्वैलर्स परिवार)
जिनदेशना जैन बाल-युवा शिक्षण शिविर विदिशा में आध्यात्मिक शिक्षा
शिविर के प्रथम दिन करेली से पधारे पं. अनुभव शास्त्री ने “लघु जैन सिद्धांत प्रवेशिका” की पहली कक्षा ली।उन्होंने विशेष रूप से:
- तीन लोक का विस्तृत नक्शा
- सिद्धशिला का महत्व
- रत्नत्रय (सम्यक दर्शन, ज्ञान, चारित्र)
- स्वस्तिक का आध्यात्मिक अर्थ
को सरल और प्रभावी तरीके से समझाया।
सर्वज्ञता का गूढ़ रहस्य
पं. अनुभव शास्त्री ने सर्वज्ञता के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा:
- आत्मा ही सर्वज्ञ होती है
- सर्वज्ञता को न मानने पर मोक्ष मार्ग की प्रामाणिकता समाप्त हो जाती है
- मिथ्यात्व का नाश ही सच्ची प्रगति है
उन्होंने देवागम स्त्रोत के उदाहरण से बताया कि सर्वज्ञता आत्म-निर्णय से जुड़ी हुई है।
अनंत चतुष्टय और मोक्ष मार्ग
शिविर में बताया गया कि:
- स्वस्तिक चारों गतियों से मुक्ति का प्रतीक है
- अनंत दर्शन, ज्ञान, सुख और वीर्य की प्राप्ति ही जीवन का अंतिम लक्ष्य है
पुरस्कार वितरण और व्यवस्थाएं
शिविरार्थियों को प्रोत्साहित करने हेतु पुरस्कार वितरण:
श्रीमती वर्षा सुनील जैन (जगदलपुर)
स्वल्पाहार व्यवस्था:
बड़कुल परिवार (विदिशा-भोपाल)
आयोजक एवं सहयोगी संस्थाएं
आयोजक:
- अखिल भारतीय जैन युवा फेडरेशन (शाखा विदिशा)
- अखिल भारतीय जैन महिला फेडरेशन
सहयोगी:
- श्री 1008 शीतलनाथ दिगंबर जैन बड़ा मंदिर ट्रस्ट (विदिशा)
- समस्त दिगंबर जैन समाज, विदिशा
समाज से अपील
आयोजकों ने समाज बंधुओं से अधिक से अधिक संख्या में इस शिविर का लाभ लेने की अपील की है, ताकि युवा पीढ़ी धर्म और संस्कारों से जुड़ सके।

