आचार्य विशुद्ध सागर जी का प्रथम पट्टाचार्य पदारोहण दिवस 30 अप्रैल को करगुंवाजी (झांसी) में भव्य रूप से मनाया जाएगा
(राजेश जैन दद्दू)
श्रंमण संस्कृति के महामहिम पट्टाचार्य विशुद्ध सागर जी महाराज का प्रथम पट्टाचार्य पदारोहण दिवस 30 अप्रैल को आचार्य श्री के ससंघ सानिध्य में दिगंबर जैन तीर्थ करगुवांजी (झांसी) में अत्यंत भव्य, श्रद्धापूर्ण और आध्यात्मिक वातावरण में मनाया जाएगा। यह अवसर जैन समाज के लिए न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह एक ऐसा क्षण है जो आस्था, संयम, तप और त्याग की परंपरा को और अधिक सुदृढ़ करता है। इस पावन अवसर पर समय देशना ग्रंथ के 17वें भाग का विमोचन भी किया जाएगा, जो जैन साहित्य और दर्शन की समृद्ध परंपरा को आगे बढ़ाने वाला एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है।
धर्म समाज प्रचारक राजेश जैन दद्दू ने विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि गुरुवार 30 अप्रैल 2026 को आचार्य विशुद्ध सागर जी महाराज का प्रथम पट्टाचार्य पदारोहण दिवस केवल करगुवांजी (झांसी) तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह संपूर्ण भारत में श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ मनाया जाएगा। देशभर के विभिन्न राज्यों में जैन समाज द्वारा इस अवसर पर विशेष धार्मिक कार्यक्रम, प्रवचन सभाएं, भक्ति संध्याएं और सामूहिक पूजन-अर्चन का आयोजन किया जा रहा है। यह आयोजन जैन समाज की एकता और आध्यात्मिक शक्ति का प्रतीक बनकर उभर रहा है।
मुख्य समारोह वीर भूमि झांसी स्थित ऐतिहासिक दिगंबर जैन तीर्थ करगुवांजी में दोपहर 2:00 बजे से प्रारंभ होगा। इस अवसर पर आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी महाराज अपने ससंघ सानिध्य में उपस्थित रहेंगे और श्रद्धालुओं को आशीर्वचन प्रदान करेंगे। देश के कोने-कोने से हजारों की संख्या में श्रद्धालु, भक्तगण, समाजसेवी, संत-समुदाय के सदस्य और जैन अनुयायी इस पावन अवसर पर एकत्रित होंगे। सभी भक्तगण आचार्य श्री के चरणों में विनयांजलि अर्पित करेंगे और उनका आशीर्वाद प्राप्त करेंगे। यह आयोजन आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण एक विशाल धार्मिक सभा का रूप लेगा।
इस विशेष अवसर पर आचार्य श्री के मंगल प्रवचन भी होंगे, जिनमें वे जीवन के गूढ़ आध्यात्मिक सिद्धांतों, जैन दर्शन के मूल्यों, अहिंसा, सत्य, संयम और आत्मकल्याण के मार्ग पर विस्तार से प्रकाश डालेंगे। उनके प्रवचन केवल धार्मिक शिक्षाओं तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि वे मानव जीवन को नैतिक और आध्यात्मिक रूप से उन्नत बनाने की दिशा में प्रेरणादायक संदेश भी प्रदान करेंगे। आचार्य श्री के प्रवचनों को सुनना श्रद्धालुओं के लिए एक आत्मिक अनुभव माना जाता है, जो मन और आत्मा को शांति प्रदान करता है।
कार्यक्रम का एक प्रमुख आकर्षण समय देशना ग्रंथ के 17वें भाग का विमोचन होगा। यह ग्रंथ जैन धर्म के गहन सिद्धांतों, प्राचीन शिक्षाओं और आध्यात्मिक ज्ञान का एक महत्वपूर्ण संकलन है। इस श्रृंखला के प्रत्येक भाग को जैन साहित्य में एक विशेष स्थान प्राप्त है और यह ग्रंथ जैन दर्शन को समझने के लिए एक महत्वपूर्ण माध्यम माना जाता है। 17वें भाग का विमोचन इस श्रृंखला को आगे बढ़ाने के साथ-साथ जैन समाज के लिए ज्ञान और अध्ययन का एक नया द्वार भी खोलेगा। विद्वानों का मानना है कि यह ग्रंथ आने वाली पीढ़ियों के लिए मार्गदर्शक सिद्ध होगा।
आयोजकों ने बताया कि यह दिवस केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं है, बल्कि यह जैन समाज के लिए एक ऐसा आध्यात्मिक पर्व है, जो समाज को एकजुट करने, संस्कारों को मजबूत करने और धार्मिक चेतना को जागृत करने का कार्य करता है। इस अवसर पर देशभर के अनेक जैन संगठनों, मुनि संघों, साध्वी मंडलों और समाज के प्रतिष्ठित व्यक्तियों की उपस्थिति सुनिश्चित की जा रही है। आयोजन को भव्य और सुव्यवस्थित बनाने के लिए व्यापक स्तर पर तैयारियां की जा रही हैं।
करगुवांजी तीर्थ क्षेत्र को इस अवसर पर विशेष रूप से सजाया और संवारा जा रहा है। पूरे परिसर को धार्मिक झंडों, रंगीन पुष्प मालाओं, आकर्षक तोरण द्वारों और भव्य विद्युत सजावट से अलंकृत किया जा रहा है। मंदिर परिसर और उसके आसपास के क्षेत्रों को स्वच्छ, व्यवस्थित और श्रद्धालुओं के अनुकूल बनाने के लिए विशेष व्यवस्था की जा रही है। श्रद्धालुओं के बैठने के लिए विशाल पंडाल बनाए जा रहे हैं, जहां सभी लोग आरामपूर्वक प्रवचन और कार्यक्रमों का आनंद ले सकेंगे।
इसके साथ ही श्रद्धालुओं के लिए भोजन, जलपान और विश्राम की विशेष व्यवस्था भी की जा रही है। आयोजन समिति ने बताया कि आने वाले सभी भक्तों की सुविधा का पूरा ध्यान रखा जाएगा ताकि उन्हें किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े। सुरक्षा व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए स्थानीय प्रशासन, पुलिस बल और स्वयंसेवकों की तैनाती की जा रही है, जिससे आयोजन शांतिपूर्ण और सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न हो सके।
आयोजकों ने सकल दिगंबर जैन समाज से विशेष आह्वान किया है कि वे इस पावन महोत्सव में अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर दर्शन-वंदन करें और धर्म लाभ प्राप्त करें। उनका कहना है कि ऐसे अवसर जीवन में बहुत कम आते हैं, जब संत सानिध्य में आकर आत्मिक शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा प्राप्त करने का अवसर मिलता है। यह आयोजन समाज को धर्म के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देगा।
आचार्य विशुद्ध सागर जी महाराज का यह प्रथम पट्टाचार्य पदारोहण दिवस जैन समाज के लिए एक ऐतिहासिक और अविस्मरणीय अवसर के रूप में देखा जा रहा है। उनके जीवन और शिक्षाएं समाज में संयम, त्याग, करुणा और आत्मअनुशासन का संदेश देती हैं। उनके मार्गदर्शन में जैन समाज निरंतर आध्यात्मिक उन्नति की दिशा में अग्रसर है।
इस अवसर पर यह भी उल्लेखनीय है कि आचार्य श्री का जीवन सादगी, तप और ज्ञान का प्रतीक है। उनके विचार केवल धार्मिक सीमाओं तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे मानवता और विश्व कल्याण की भावना को भी प्रकट करते हैं। उनके प्रवचन और शिक्षाएं समाज के प्रत्येक वर्ग को नैतिक मूल्यों के प्रति जागरूक करती हैं।
समापन में कहा जा सकता है कि 30 अप्रैल का यह पावन दिवस न केवल करगुवांजी (झांसी) के लिए, बल्कि संपूर्ण जैन समाज के लिए एक आध्यात्मिक उत्सव का प्रतीक बनेगा। यह आयोजन आस्था, श्रद्धा, ज्ञान और भक्ति का ऐसा संगम होगा, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत रहेगा। आचार्य विशुद्ध सागर जी महाराज के सानिध्य में यह कार्यक्रम निश्चित रूप से एक ऐतिहासिक और दिव्य अनुभव प्रदान करेगा, जो लंबे समय तक स्मरणीय रहेगा।
