Bihar विधानसभा में विश्वास मत के बाद सियासी घमासान तेज
Bihar विधानसभा में शुक्रवार को सम्राट चौधरी सरकार ने विश्वास मत तो आसानी से हासिल कर लिया, लेकिन सदन के भीतर हुई तीखी बहस के बाद राज्य की राजनीति में बड़ा उबाल देखने को मिल रहा है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी द्वारा लालू प्रसाद यादव और नीतीश कुमार को लेकर दिए गए बयान अब नए विवाद का कारण बन गए हैं।
सदन में दिए गए मुख्यमंत्री के बयान के बाद आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्य ने खुलकर मोर्चा संभाल लिया है और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लंबी पोस्ट लिखकर मुख्यमंत्री पर तीखा हमला बोला है।
सदन में दिए बयान से शुरू हुआ विवाद
विश्वास मत के दौरान मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा था कि लालू प्रसाद यादव को मुख्यमंत्री बनाने में नीतीश कुमार की अहम भूमिका रही थी। इसी बयान ने राजनीतिक विवाद को जन्म दिया।
रोहिणी आचार्य ने इस पर सवाल उठाते हुए लिखा कि क्या लालू प्रसाद यादव को जनता ने वोट नहीं दिया था? क्या उनका जनाधार नीतीश कुमार की वजह से बना था? उन्होंने दावा किया कि लालू यादव का जनसमर्थन हमेशा मजबूत रहा है और वह एक बड़े जननेता रहे हैं।
14 करोड़ जनता वाले बयान पर तंज
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा था कि उन्हें बिहार की 14 करोड़ जनता का आशीर्वाद प्राप्त है। इस पर रोहिणी आचार्य ने व्यंग्य करते हुए सवाल उठाया कि क्या बिहार की पूरी आबादी ने वोट दिया है?
उन्होंने लिखा कि मुख्यमंत्री ने किस आधार पर यह दावा किया है और क्या राज्य में इतने पंजीकृत मतदाता भी हैं। रोहिणी ने इस बयान को राजनीतिक अतिशयोक्ति बताया और मुख्यमंत्री की याददाश्त पर भी सवाल खड़े किए।
नीतीश कुमार को लेकर पुराने दावों पर पलटवार
रोहिणी आचार्य ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के पुराने राजनीतिक बयानों को भी निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने कभी नीतीश कुमार को हटाने के लिए प्रतिज्ञा ली थी और पगड़ी बांधी थी, लेकिन बाद में वही प्रतिज्ञा अधूरी छोड़ दी गई।
उन्होंने तंज कसा कि यह राजनीतिक अवसरवाद का उदाहरण है और जनता इसे अच्छे से समझती है।
सत्ता और जनादेश पर सवाल
रोहिणी आचार्य ने मुख्यमंत्री के उस बयान का भी जवाब दिया जिसमें उन्होंने कहा था कि सत्ता किसी की बपौती नहीं होती। उन्होंने लिखा कि यह बात सही है, लेकिन सत्ता जनता के जनादेश से मिलती है।
उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान मुख्यमंत्री जनता के प्रत्यक्ष समर्थन से नहीं, बल्कि राजनीतिक परिस्थितियों के कारण पद पर पहुंचे हैं। हालांकि उन्होंने अपने आरोपों को राजनीतिक टिप्पणी बताया, लेकिन इसे लेकर सियासी विवाद और बढ़ गया है।
‘पाठशाला’ और राजनीतिक अनुभव पर टिप्पणी
मुख्यमंत्री द्वारा खुद को किसी राजनीतिक “पाठशाला” से न जुड़ा बताने पर रोहिणी ने व्यंग्य किया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने राजनीति में अवसरवाद की पढ़ाई की है और अलग-अलग राजनीतिक मंचों से गुजरते रहे हैं।
रोहिणी ने यह भी कहा कि यह कहना मुश्किल है कि वह किस राजनीतिक धारा में लंबे समय तक टिक पाएंगे।
डिग्री और हलफनामे पर भी सवाल
रोहिणी आचार्य ने मुख्यमंत्री के शैक्षणिक विवरण और हलफनामे में दिए गए बयानों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि इसमें कई विरोधाभास दिखाई देते हैं और मुख्यमंत्री इन पर स्पष्ट जवाब देने के बजाय राजनीतिक बयानबाजी कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि सार्वजनिक जीवन में हर नेता के बयान और दस्तावेज जनता के सामने होते हैं, इसलिए पारदर्शिता जरूरी है।
लालू यादव पर टिप्पणी को लेकर नाराजगी
रोहिणी ने सम्राट चौधरी के एक पुराने वायरल वीडियो का भी जिक्र किया जिसमें वह लालू प्रसाद यादव पर टिप्पणी करते नजर आए थे। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री खुद स्वीकार कर चुके हैं कि वह लालू यादव के खिलाफ बयानबाजी करके आगे बढ़े हैं।
उन्होंने इसे राजनीतिक संस्कृति के लिए गलत बताते हुए कहा कि इस तरह की राजनीति समाज में गलत संदेश देती है।
बिहार की राजनीति में बढ़ा तनाव
विश्वास मत के बाद यह विवाद अब बिहार की राजनीति में नई बहस को जन्म दे रहा है। एक तरफ जहां सरकार अपनी स्थिति मजबूत बताने में जुटी है, वहीं विपक्ष इसे राजनीतिक बयानबाजी और जनादेश पर सवाल के रूप में देख रहा है।
रोहिणी आचार्य के बयान के बाद आरजेडी और बीजेपी समर्थकों के बीच सोशल मीडिया पर भी तीखी बहस देखने को मिल रही है।
निष्कर्ष
बिहार विधानसभा में विश्वास मत तो सरकार ने जीत लिया, लेकिन उसके बाद शुरू हुआ यह राजनीतिक विवाद अब लगातार बढ़ता जा रहा है। रोहिणी आचार्य के तीखे बयान और मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के दावों ने राज्य की सियासत को और अधिक गर्मा दिया है।
आने वाले दिनों में यह मुद्दा और बड़ा राजनीतिक रूप ले सकता है, क्योंकि दोनों पक्ष अपने-अपने बयान पर कायम हैं और कोई भी पीछे हटने को तैयार नहीं दिख रहा।
