इंदौर जैन समाज बैठक में बासोकुंड संस्थान, गिरनार तीर्थ सुरक्षा और विशेष कानून की मांग प्रमुख मुद्दे रहे, जानिए पूरी खबर।
राजेश जैन दद्दू
इंदौर जैन समाज बैठक: बासोकुंड संस्थान, गिरनार तीर्थ और विशेष कानून की मांग बुलंद
इंदौर जैन समाज बैठक 24 अप्रैल 2026 को एक महत्वपूर्ण मोड़ पर पहुंची, जब पूरे देश के जैन समाज के प्रतिनिधि एक मंच पर एकत्र हुए और अपने धार्मिक, सांस्कृतिक तथा संवैधानिक अधिकारों को लेकर सरकार के समक्ष अपनी मांगों को मजबूती से रखा।यह बैठक केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं थी, बल्कि जैन समाज के भविष्य और उसकी पहचान से जुड़े मुद्दों पर गंभीर विमर्श का मंच बनी।
बैठक का आयोजन और प्रमुख उपस्थिति
इंदौर जैन समाज बैठक का आयोजन इंदौर के होटल मैरियट में किया गया।इस बैठक में भारत सरकार के अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय के सचिव श्रीवत्स कृष्णा की विशेष उपस्थिति रही।मुख्य प्रतिनिधियों में शामिल थे:
- राजेश जैन दद्दू (राष्ट्रीय जिन शासन एकता संघ एवं विश्व जैन संगठन प्रचारक)
- मयंक जैन (राष्ट्रीय जिनशासन एकता संघ)
- एडवोकेट पारस जैन (विश्व जैन संगठन, इंदौर)
- डॉ. जैनेन्द्र जैन (वरिष्ठ समाजसेवी)
- सुभाष काला (जैन राजनीतिक चेतना मंच अध्यक्ष)
बासोकुंड संस्थान पर संकट
इंदौर जैन समाज बैठक में सबसे प्रमुख मुद्दा रहा वैशाली स्थित बासोकुंड (कुंडलपुर) संस्थान का प्रतिनिधिमंडल ने ‘प्राकृत जैन शास्त्र एवं अहिंसा शोध संस्थान’ को बंद करने या उसके स्वरूप में बदलाव के निर्णय पर गहरी आपत्ति जताई।
मुख्य मांगें:
- संस्थान को पूर्व स्थिति में बहाल किया जाए
- इसके संरक्षण और विकास को प्राथमिकता दी जाए
- इसे जैन समाज की धरोहर के रूप में संरक्षित किया जाए
गिरनार तीर्थ की पवित्रता और सुरक्षा
इंदौर जैन समाज बैठक में गिरनार तीर्थ का मुद्दा भी जोरदार तरीके से उठाया गया।प्रतिनिधियों ने बताया कि:
- गिरनार में अतिक्रमण तेजी से बढ़ रहा है
- तीर्थयात्रियों की सुरक्षा खतरे में है
- व्यवस्थाएं कमजोर हो रही हैं
प्रमुख मांग:
- तीर्थ की पवित्रता बनाए रखने के लिए ठोस कार्ययोजना
- सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करना
- सरकारी निगरानी बढ़ाना
विशेष सुरक्षा कानून की मांग
इंदौर जैन समाज बैठक में एक बेहद महत्वपूर्ण प्रस्ताव रखा गया—जैन समाज के लिए विशेष सुरक्षा कानूनसुभाष काला ने कहा:
- साधु-संतों पर हमले बढ़ रहे हैं
- धार्मिक स्थलों पर हिंसा की घटनाएं चिंता का विषय हैं
मांग:
- कड़े दंड का प्रावधान
- धार्मिक स्थलों की सुरक्षा
- विशेष कानूनी सुरक्षा कवच
अन्य नीतिगत मुद्दे
शिक्षा का संवर्धन
- जैन संस्थानों को अनुदान में कठिनाई
- मान्यता प्रक्रिया सरल बनाने की मांग
अल्पसंख्यक प्रमाण पत्र
- प्रक्रिया को पूर्णतः ऑनलाइन करने की मांग
- पारदर्शिता सुनिश्चित करने की आवश्यकता
प्रतिनिधित्व
- अल्पसंख्यक आयोगों में जैन समाज का प्रतिनिधित्व बढ़ाया जाए
योजनाओं का लाभ
- छात्रवृत्ति और ऋण योजनाओं का लाभ सही लोगों तक पहुंचे
सरकार की प्रतिक्रिया
सचिव श्रीवत्स कृष्णा ने:
- सभी मुद्दों को ध्यानपूर्वक सुना
- सकारात्मक चर्चा की
- त्वरित कार्रवाई का आश्वासन दिया
प्रतिनिधिमंडल ने भी सरकार को सहयोग का भरोसा दिलाया।
निष्कर्ष
इंदौर जैन समाज बैठक ने यह स्पष्ट कर दिया कि जैन समाज अब अपने अधिकारों, आस्था और विरासत के संरक्षण के लिए एकजुट होकर आवाज उठा रहा है।बासोकुंड संस्थान से लेकर गिरनार तीर्थ और विशेष कानून तक—यह बैठक भविष्य में बड़े नीतिगत बदलावों की दिशा तय कर सकती है।
