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Ujjain में बाबा महाकाल का भव्य भांग श्रृंगार, भस्म आरती में उमड़ा आस्था का सैलाब

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Published On: 23 April 2026
Ujjain
— उज्जैन में बाबा महाकाल का दिव्य श्रृंगार और भस्म आरती! भांग, त्रिपुंड और त्रिनेत्र से सजे भगवान महाकाल के दर्शन से गूंज उठा पूरा मंदिर परिसर

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Ujjain में बाबा महाकाल का भव्य भांग श्रृंगार, भस्म आरती में उमड़ा आस्था का सैलाब

मध्य प्रदेश के Ujjain स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में गुरुवार को आस्था और भक्ति का अद्भुत नजारा देखने को मिला। वैशाख शुक्ल पक्ष की षष्ठी के पावन अवसर पर आयोजित भस्म आरती में हजारों श्रद्धालु तड़के सुबह से ही मंदिर परिसर में उमड़ पड़े। भक्त रात से ही कतारों में खड़े होकर अपने आराध्य भगवान महाकाल के दिव्य दर्शन की प्रतीक्षा कर रहे थे।

मंदिर परिसर का वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो गया था। “जय श्री महाकाल” के जयघोष और घंटियों की ध्वनि से पूरा क्षेत्र गूंज रहा था। ठंडी सुबह और आध्यात्मिक ऊर्जा के बीच श्रद्धालुओं के चेहरों पर उत्साह और श्रद्धा स्पष्ट दिखाई दे रही थी।

सुबह 4 बजे खुले मंदिर के पट, शुरू हुई भस्म आरती

Ujjain प्रातः लगभग 4 बजे जैसे ही मंदिर के पट खोले गए, श्रद्धालुओं की भीड़ में उत्साह की लहर दौड़ गई। परंपरा के अनुसार सबसे पहले वीरभद्र जी से अनुमति ली गई, जिसके बाद गर्भगृह में स्थापित सभी देवी-देवताओं का विधिवत पूजन किया गया।

इसके बाद भगवान महाकाल का जलाभिषेक प्रारंभ हुआ, जिसमें दूध, दही, घी, शक्कर, पंचामृत और विभिन्न फलों के रस का प्रयोग किया गया। ‘हरि ओम’ के मंत्रोच्चारण और शंख-घंटों की गूंज ने वातावरण को और अधिक आध्यात्मिक बना दिया। भक्तों के लिए यह क्षण अत्यंत भावनात्मक और दिव्य अनुभव से भरा हुआ था।

भव्य श्रृंगार में भांग, त्रिपुंड और त्रिनेत्र की छटा

इस विशेष दिन पर भगवान महाकाल का अत्यंत मनोहारी और दिव्य श्रृंगार किया गया। भगवान को भांग से सजाया गया, जो उनकी विशेष परंपरागत श्रृंगार शैली का हिस्सा माना जाता है। इसके साथ ही उनके ललाट पर त्रिपुंड और त्रिनेत्र का अलंकरण किया गया, जिससे उनका स्वरूप और अधिक अलौकिक प्रतीत हुआ।

पुजारियों ने विधिवत रूप से कपूर आरती की और भगवान को नवीन मुकुट धारण कराया। यह श्रृंगार भक्तों के लिए अत्यंत आकर्षण का केंद्र रहा। कई श्रद्धालु भाव-विभोर होकर इस दिव्य रूप को निहारते रहे और अपने मोबाइल कैमरों में इस अद्भुत दृश्य को कैद करते नजर आए।

महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से भस्म अर्पण

श्रृंगार के पश्चात परंपरा के अनुसार महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से भगवान महाकाल के शिवलिंग पर भस्म अर्पित की गई। यह क्षण भक्ति और आध्यात्मिकता का सर्वोच्च रूप माना जाता है।

भस्म आरती के दौरान झांझ, मंजीरे, ढोल-नगाड़ों और शंखनाद की ध्वनि से पूरा मंदिर परिसर गूंज उठा। श्रद्धालु मंत्रमुग्ध होकर इस दृश्य को देखते रहे। माना जाता है कि इस आरती के समय भगवान महाकाल अपने निराकार स्वरूप से साकार रूप में भक्तों को दर्शन देते हैं, जिससे यह आरती अत्यंत विशेष बन जाती है।

भस्म आरती का आध्यात्मिक महत्व

Ujjain भस्म आरती केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि गहन आध्यात्मिक अनुभव का प्रतीक है। यह आरती यह संदेश देती है कि जीवन नश्वर है और अंततः सब कुछ भस्म में विलीन हो जाता है। इसी दर्शन के माध्यम से भक्तों को वैराग्य, भक्ति और आत्मिक शांति का अनुभव प्राप्त होता है।

इस अवसर पर मंदिर में मौजूद श्रद्धालुओं ने बताया कि भस्म आरती के दौरान उन्हें अद्भुत शांति और ऊर्जा की अनुभूति हुई। कई भक्तों ने इसे अपने जीवन का सबसे यादगार क्षण बताया।

श्रद्धालुओं की भारी भीड़ और प्रशासन की व्यवस्था

Ujjain भस्म आरती के अवसर पर मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी थी। हजारों की संख्या में भक्त रात से ही कतारों में खड़े थे ताकि उन्हें बाबा महाकाल के दर्शन प्राप्त हो सकें।

मंदिर प्रशासन ने भीड़ को नियंत्रित करने और दर्शन व्यवस्था को सुचारु रखने के लिए विशेष प्रबंध किए थे। सुरक्षा कर्मियों की तैनाती, बैरिकेडिंग व्यवस्था और लाइन प्रबंधन के माध्यम से श्रद्धालुओं को सुव्यवस्थित रूप से दर्शन कराए गए।

कई श्रद्धालुओं ने कहा कि भले ही उन्हें घंटों इंतजार करना पड़ा, लेकिन बाबा महाकाल के दर्शन के बाद सारी थकान और कठिनाई समाप्त हो गई और मन में अपार संतोष प्राप्त हुआ।

मंदिर की दैनिक आरतियों का समय और महत्व

श्री महाकालेश्वर मंदिर में दिनभर कई आरतियां होती हैं, जिनका विशेष धार्मिक महत्व है।

भस्म आरती सुबह 4 से 6 बजे के बीच संपन्न होती है, जो दिन की सबसे प्रमुख और पवित्र आरती मानी जाती है। इसके बाद दद्योदक आरती सुबह 7 से 7:45 बजे तक होती है। भोग आरती 10 से 10:45 बजे के बीच संपन्न होती है।

शाम के समय संध्या पूजन 5 से 5:45 बजे तक और संध्या आरती 7 से 7:45 बजे तक होती है। दिन का समापन शयन आरती के साथ होता है, जो रात्रि 10:30 से 11 बजे तक संपन्न की जाती है।

मंदिर प्रशासन के अनुसार, इन आरतियों के समय में हाल ही में कुछ बदलाव किए गए हैं, जो शरद पूर्णिमा तक प्रभावी रहेंगे। श्रद्धालुओं को सलाह दी गई है कि वे नए समय के अनुसार दर्शन के लिए पहुंचें।

Ujjain महाकाल मंदिर: आस्था और श्रद्धा का केंद्र

Ujjain का यह प्राचीन मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। यहां आने वाले भक्तों का मानना है कि भगवान महाकाल के दर्शन मात्र से ही जीवन के कष्ट दूर हो जाते हैं और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

मंदिर की भस्म आरती विश्वभर में प्रसिद्ध है और इसे देखने के लिए देश-विदेश से श्रद्धालु उज्जैन आते हैं। यहां की परंपराएं, मंत्रोच्चारण और भव्य श्रृंगार भक्तों को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर देते हैं।

निष्कर्ष: 

इस पावन अवसर पर बाबा महाकाल के दरबार में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़ ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि उज्जैन का महाकाल मंदिर भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिकता का महत्वपूर्ण केंद्र है। भस्म आरती का यह दिव्य दृश्य भक्तों के जीवन में गहरी आस्था और विश्वास का संचार करता है।

भगवान महाकाल के इस भव्य श्रृंगार और आरती ने सभी श्रद्धालुओं को एक ऐसा आध्यात्मिक अनुभव दिया, जिसे वे जीवनभर याद रखेंगे।

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