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आदि गुरु शंकराचार्य जयंती अभियान: नागदा में प्रेरणादायक पहल से सनातन संस्कृति का सशक्त पुनर्जागरण

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Published On: 22 April 2026
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आदि गुरु शंकराचार्य जयंती अभियान नागदा में ब्राह्मण समाज युवा संस्कार परिवार द्वारा नि:शुल्क चित्र स्थापना और मोमेंटो वितरण से सनातन संस्कृति के पुनर्जागरण का संकल्प।

आदि गुरु शंकराचार्य जयंती अभियान नागदा

आदि गुरु शंकराचार्य जयंती अभियान नागदा के अंतर्गत एक प्रेरणादायक पहल शुरू की गई है, जो सनातन संस्कृति के पुनर्जागरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। ब्राह्मण समाज नागदा के युवा संस्कार परिवार द्वारा इस अभियान के माध्यम से समाज में आध्यात्मिक जागरूकता और संस्कारों का प्रसार किया जा रहा है।

नागदा में शुरू हुआ प्रेरणादायक संस्कार अभियान

नागदा। अद्वैत वेदांत के महान प्रवर्तक एवं सनातन धर्म के पुनर्स्थापक आदि गुरु शंकराचार्य की जयंती के पावन अवसर पर ब्राह्मण समाज नागदा के युवा संस्कार परिवार द्वारा एक प्रेरणादायी अभियान की शुरुआत की गई है।

इस अभियान के अंतर्गत नगर के विभिन्न धार्मिक स्थलों एवं मंदिरों पर आदि गुरु शंकराचार्य की तस्वीरें निशुल्क स्थापित की जाएंगी, साथ ही समाज के प्रतिभावान एवं विशिष्ट व्यक्तियों को उनके मोमेंटो भी निःशुल्क उपलब्ध कराए जाएंगे।

संयोजक निलेश मेहता ने जानकारी देते हुए बताया कि 21 अप्रैल को देशभर में आदि गुरु शंकराचार्य जयंती श्रद्धा एवं भक्ति के साथ मनाई गई। इसी कड़ी में नागदा में भी इस दिन विशेष संकल्प लिया गया कि नगर के सभी प्रमुख मंदिरों एवं धार्मिक स्थलों पर शंकराचार्य जी के सचित्र एवं प्रेरणादायी चित्र स्थापित किए जाएंगे, जिससे आने वाली पीढ़ियों को उनके विचारों और जीवन से प्रेरणा मिल सके।

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आदि गुरु शंकराचार्य जयंती क्यों मनाई जाती है

आदि गुरु शंकराचार्य जयंती अभियान नागदा के पीछे एक गहरा आध्यात्मिक उद्देश्य है।

आदि गुरु शंकराचार्य जयंती उनके जन्मदिवस के रूप में मनाई जाती है। उन्होंने अल्पायु में ही भारतवर्ष के कोने-कोने में भ्रमण कर सनातन धर्म की पुनर्स्थापना की। उस समय समाज में फैली कुरीतियों, अंधविश्वासों और मतभेदों को दूर कर उन्होंने वेदों और उपनिषदों के मूल सिद्धांतों को पुनर्जीवित किया।

उनके द्वारा स्थापित चार प्रमुख मठ—श्रृंगेरी, द्वारका, पुरी और ज्योतिर्मठ—आज भी आध्यात्मिक मार्गदर्शन के प्रमुख केंद्र हैं।

सनातन धर्म में शंकराचार्य जी का महत्व

आदि गुरु शंकराचार्य ने अद्वैत वेदांत का प्रचार-प्रसार करते हुए यह संदेश दिया कि
“ब्रह्म ही सत्य है और जगत मिथ्या”उन्होंने पूरे भारत को एक आध्यात्मिक सूत्र में पिरोने का कार्य किया। उनके ग्रंथ, भाष्य और स्तोत्र आज भी भारतीय दर्शन के आधार स्तंभ हैं। उन्होंने धर्म, ज्ञान और भक्ति के समन्वय से समाज को नई दिशा प्रदान की।

संक्षिप्त जीवन परिचय

आदि गुरु शंकराचार्य का जन्म केरल के कालड़ी में हुआ था। बाल्यकाल से ही वे विलक्षण प्रतिभा के धनी थे। मात्र 8 वर्ष की आयु में संन्यास ग्रहण कर उन्होंने पूरे भारत का भ्रमण किया और वेदांत दर्शन का प्रचार किया। 32 वर्ष की अल्पायु में ही उन्होंने अद्भुत आध्यात्मिक एवं दार्शनिक कार्य कर इतिहास में अमिट छाप छोड़ी।

ओंकारेश्वर में एकात्म धाम और भव्य प्रतिमा

संयोजक ने बताया कि मध्यप्रदेश शासन द्वारा ओंकारेश्वर में “एकात्म धाम” का निर्माण कर आदि गुरु शंकराचार्य की 108 फीट ऊंची भव्य प्रतिमा स्थापित की गई है।यह प्रतिमा उनके अद्वितीय योगदान का प्रतीक है और सनातन संस्कृति की शक्ति को दर्शाती है। इसी दिन नागदा में भी युवा संस्कार परिवार की स्थापना भगवान शिव के रुद्राभिषेक के साथ की गई थी।

समाज में अभियान का प्रभाव

आदि गुरु शंकराचार्य जयंती अभियान नागदा समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह अभियान केवल धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि एक सांस्कृतिक जागरण है।

  • नई पीढ़ी को संस्कारों से जोड़ना
  • धार्मिक स्थलों का आध्यात्मिक सशक्तिकरण
  • समाज में एकता और जागरूकता बढ़ाना

मोमेंटो वितरण योजना

ब्राह्मण समाज नागदा युवा संस्कार परिवार द्वारा समाज के विभिन्न कार्यक्रमों, प्रतिभाओं के सम्मान एवं धार्मिक आयोजनों हेतु आदि गुरु शंकराचार्य के मोमेंटो निःशुल्क उपलब्ध कराए जाएंगे।इसके लिए इच्छुक व्यक्ति संयोजक निलेश मेहता से मोबाइल नंबर 98264 11331 पर संपर्क कर सकते हैं।

समाजजनों की सहभागिता

इस पावन अवसर पर निम्न समाजजनों ने हर्ष व्यक्त करते हुए शुभकामनाएं प्रेषित कीं—डॉ. अनिल दुबे, डॉ. प्रदीप रावल, डॉ. पवन शर्मा, चंद्रशेखर दवे, सुंदरलाल जोशी, विजय व्यास, राजेश तिवारी, हनुमान प्रसाद शर्मा, सिद्धनाथ पाठक, महेश व्यास, अजय पण्ड्या, मुकेश जोशी, हिमांशु शर्मा, वर्षा मेहता, ममता शर्मा, प्रीति कौशिक, संध्या शुक्ला, नूपुर शर्मा, ज्योति शर्मा, चंचल शर्मा, साधना शर्मा, संगीता शर्मा, सुचित्रा शर्मा सहित अनेक समाजजनों ने सहभागिता निभाई।

निष्कर्ष

आदि गुरु शंकराचार्य जयंती अभियान नागदा केवल एक आयोजन नहीं बल्कि एक विचारधारा है, जो समाज को ज्ञान, भक्ति और अद्वैत के मार्ग पर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती है। “ज्ञान, भक्ति और अद्वैत के प्रकाश से आलोकित समाज ही सशक्त राष्ट्र का निर्माण करता है।”

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