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ऐतिहासिक निर्णय: चांदखेड़ी में जैन राजनैतिक चेतना मंच बैठक में बड़ा फैसला, हुकुम जैन ‘काका’ राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रस्ताव पारित

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Published On: 16 April 2026
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जैन राजनैतिक चेतना मंच बैठक चांदखेड़ी में सर्वसम्मति से हुकुम जैन ‘काका’ को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाने का प्रस्ताव पारित, जनगणना में ‘जैन’ लिखने का बड़ा आह्वान।

राजेश जैन दद्दू
प्रदेश मीडिया प्रभारी,
जैन राजनैतिक चेतना मंच
9425321169

जैन राजनैतिक चेतना मंच बैठक चांदखेड़ी: हुकुम जैन ‘काका’ को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाने का प्रस्ताव पारित

जैन राजनैतिक चेतना मंच बैठक चांदखेड़ी: बैठक का विस्तृत विवरण

चांदखेड़ी/इंदौर, 16 अप्रैल 2026।
जैन राजनैतिक चेतना मंच मध्यप्रदेश-राजस्थान शाखा की कोर कमेटी की एक महत्वपूर्ण और विशेष बैठक विश्व प्रसिद्ध अतिशय क्षेत्र चांदखेड़ी, राजस्थान में स्थित सुसज्जित सभागार में आयोजित की गई।मंच के प्रदेश मीडिया प्रभारी राजेश जैन दद्दू ने जानकारी देते हुए बताया कि यह बैठक संगठन के भविष्य और जैन समाज के राजनीतिक सशक्तिकरण के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण रही।

राष्ट्रीय अध्यक्ष के लिए ऐतिहासिक प्रस्ताव

इस बैठक का सबसे महत्वपूर्ण और केंद्र बिंदु रहा —कोटा जैन समाज के गौरव, अतिशय क्षेत्र चांदखेड़ी के अध्यक्ष एवं मंच के वर्तमान राष्ट्रीय कार्याध्यक्ष श्री हुकुम जैन ‘काका’ को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाने का प्रस्ताव।यह प्रस्ताव सर्वसम्मति और ध्वनिमत से पारित किया गया, जो मंच की एकजुटता और विश्वास को दर्शाता है।

तीन वर्षों से निष्क्रिय मंच को पुनः सक्रिय करने पर मंथन

बैठक में यह भी स्वीकार किया गया कि पिछले तीन वर्षों में मंच की सक्रियता में कमी आई है। इस पर गहन चर्चा हुई और इसे पुनः सक्रिय करने के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए गए।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि:

  • स्थापना वर्ष: 2007
  • उद्देश्य: जैन समाज को सक्रिय राजनीति में भागीदारी हेतु प्रेरित करना
  • उपलब्धि:
    • लोकसभा और विधानसभा में 50+ प्रतिनिधित्व
    • मध्यप्रदेश में 6 मुख्यमंत्री जैन समाज से

लेकिन वर्तमान में:

  • लोकसभा, विधानसभा, निकायों में प्रतिनिधित्व कम
  • आयोगों और राजनीतिक संगठनों में भागीदारी नगण्य

जैन समाज के राजनीतिक प्रतिनिधित्व पर चिंता

बैठक में यह चिंता व्यक्त की गई कि जैन समाज का राजनीतिक प्रभाव लगातार घट रहा है।इसलिए यह आवश्यक है कि:

  • समाज राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाए
  • युवाओं को राजनीति में आने के लिए प्रेरित किया जाए
  • राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिनिधित्व बढ़ाया जाए

जनगणना में ‘जैन’ लिखने का आह्वान

बैठक का एक और अत्यंत महत्वपूर्ण निर्णय रहा —आगामी जनगणना में हर जैन व्यक्ति धर्म के कॉलम में ‘जैन’ ही लिखे, ‘हिंदू’ नहीं।

महत्वपूर्ण तथ्य:

  • वास्तविक जनसंख्या: लगभग 4 करोड़
  • सरकारी रिकॉर्ड: केवल 45 लाख

कारण:

अधिकांश लोग जनगणना में धर्म कॉलम में “हिंदू” लिख देते हैं, जिससे वास्तविक संख्या कम दर्ज होती है।

निर्णय:

  • 250+ जैन संस्थाओं को जागरूक किया जाएगा
  • जनजागरण अभियान चलाया जाएगा

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राष्ट्रीय अध्यक्ष गजराज जी गंगवाल की सहमति

वर्तमान राष्ट्रीय अध्यक्ष गजराज जी गंगवाल ने इस प्रस्ताव का स्वागत करते हुए कहा:“यदि मंच को सक्रिय करने के लिए सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया जाता है, तो यह स्वागत योग्य कदम है।”उन्होंने निर्देश दिए कि:

  • प्रदीप जैन आदित्य
  • ललित जैन
  • हुकुम जैन काका
  • सुभाष जैन काला
  • मुकेश जैन चेलावत

दिल्ली स्थित केंद्रीय कार्यालय जाकर नए पदाधिकारियों की घोषणा सुनिश्चित करें।

बैठक में उपस्थित प्रमुख हस्तियां

इस महत्वपूर्ण बैठक में कई वरिष्ठ और प्रतिष्ठित व्यक्तियों की उपस्थिति रही:

  • अर्चना जैन खुरई (नीति आयोग सदस्य)
  • राजकुमारी जैन (भिंड बीजेपी महिला उपाध्यक्ष)
  • हसमुख जैन गांधी (प्रदेश कार्याध्यक्ष)
  • होलाश राय जैन सोनी
  • कमलेश जैन कासलीवाल (महामंत्री)
  • मनीष जैन सोगानी
  • सुरेंद्र जैन पांड्या (राष्ट्रीय महामंत्री, दिगंबर जैन महासमिति)
  • अनिल जैन (पूर्व DIG, राष्ट्रीय कार्याध्यक्ष)
  • अमिताभ मनयां जैन (प्रदेश कोषाध्यक्ष)
  • देवेंद्र छाबड़ा (सह कोषाध्यक्ष)
  • देवचंद्र जैन (प्रदेश उपाध्यक्ष)
  • अभय जैन (पूर्व प्राचार्य)
  • आदित्य मनयां जैन (मध्य रीजन अध्यक्ष)

साथ ही सैकड़ों प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

कार्यक्रम का शुभारंभ और समापन

बैठक की शुरुआत:

  • बाबा आदिनाथ के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन
  • मंगलाचरण

संचालन:

  • सुभाष जैन काला

आभार:

  • अमिताभ मनयां जैन

जैन समाज और राजनीति: क्यों जरूरी है भागीदारी?

जैन समाज का इतिहास राजनीतिक रूप से मजबूत रहा है, लेकिन वर्तमान में भागीदारी कम होना चिंता का विषय है।

कारण:

  • राजनीतिक उदासीनता
  • युवाओं की कम भागीदारी
  • संगठित प्रयासों की कमी

समाधान:

  • मंच को सक्रिय करना
  • युवा नेतृत्व तैयार करना
  • संगठनों के बीच समन्वय

भविष्य की रणनीति

बैठक में भविष्य के लिए निम्नलिखित रणनीतियां तय की गईं:

  • राष्ट्रीय स्तर पर संगठन विस्तार
  • राजनीतिक दलों से संवाद
  • जनजागरण अभियान
  • जनगणना में सही पहचान सुनिश्चित करना
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