Dhar भोजशाला मामला: एमपी हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ में आज से फिर शुरू होगी सुनवाई
Dhar स्थित भोजशाला से जुड़े विवादित धार्मिक स्वरूप के निर्धारण मामले में आज एक बार फिर कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ में इस बहुचर्चित मामले की सुनवाई बुधवार से पुनः शुरू होने जा रही है। न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला और न्यायमूर्ति आलोक अवस्थी की युगलपीठ इस मामले की सुनवाई दोपहर 2:30 बजे से करेगी।
इस प्रकरण में कुल चार याचिकाएं और एक अपील शामिल हैं, जिन्हें हाईकोर्ट एक साथ सुन रहा है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद इस मामले की नियमित सुनवाई छह अप्रैल से शुरू हुई थी, जिसके बाद लगातार विभिन्न पक्ष अपनी दलीलें पेश कर रहे हैं।
याचिकाकर्ता की ओर से पेश होंगे नए तर्क
आज की सुनवाई में याचिकाकर्ता कुलदीप तिवारी की ओर से अधिवक्ता मनीष गुप्ता अपना पक्ष अदालत के समक्ष रखेंगे। इससे पहले 10 अप्रैल को उन्होंने अपनी दलीलें शुरू की थीं, लेकिन समय की कमी के कारण बहस पूरी नहीं हो सकी थी। अब कोर्ट उन्हें आगे अपनी बात रखने का अवसर देगी।
मामले में याचिकाकर्ताओं के तर्क पूरे होने के बाद अदालत प्रतिवादियों की दलीलें सुनेगी, और उसके बाद हस्तक्षेपकर्ताओं को भी अपना पक्ष रखने का अवसर मिलेगा। यह सुनवाई चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ रही है, जिससे सभी पक्षों को अपनी बात रखने का पूरा मौका मिल सके।
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के साक्ष्यों पर जोर
इस केस में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की रिपोर्ट और सर्वेक्षण को महत्वपूर्ण आधार माना जा रहा है। हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की ओर से अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने पहले ही अदालत में कई दिनों तक विस्तृत तर्क प्रस्तुत किए थे।
उन्होंने एएसआई सर्वेक्षण के दौरान सामने आए तथ्यों और साक्ष्यों का हवाला देते हुए यह दावा किया था कि इस स्थल का ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व स्पष्ट रूप से परिलक्षित होता है। उनके अनुसार, इन साक्ष्यों के आधार पर मामले का कानूनी मूल्यांकन किया जाना चाहिए।
1935 से पहले की स्थिति को लेकर दावे
याचिकाकर्ता पक्ष की ओर से यह भी तर्क दिया गया है कि 1935 से पहले तक भोजशाला परिसर में कभी नमाज अदा नहीं की गई थी। उनके अनुसार, अगस्त 1935 के बाद ही इस स्थान के उपयोग को लेकर बदलाव देखने को मिला।
अधिवक्ता मनीष गुप्ता और अन्य पक्षों ने कोर्ट को बताया कि भोजशाला को एक संरक्षित धरोहर माना जाता है और इसके धार्मिक स्वरूप को बदलना कानून के खिलाफ हो सकता है। उनका कहना है कि प्राचीन संरचना को उसके मूल स्वरूप में बनाए रखना आवश्यक है।
ऐतिहासिक मूर्तियों का लंदन ले जाया जाना भी चर्चा में
इस मामले की सुनवाई के दौरान एक और महत्वपूर्ण तथ्य सामने रखा गया है कि वर्ष 1875 में धार से वाग्देवी और अंबा देवी की मूर्तियों को लंदन ले जाया गया था। ये मूर्तियां वर्तमान में ब्रिटेन के एक संग्रहालय में रखी हुई हैं।
याचिकाकर्ताओं का दावा है कि स्वतंत्रता के बाद भारतीय पुरातत्वविदों ने इन मूर्तियों को वापस लाने के प्रयास किए, लेकिन अब तक कोई सफलता नहीं मिल सकी। इस ऐतिहासिक संदर्भ को भी मामले में महत्वपूर्ण साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद तेज हुई सुनवाई
इस मामले में सुनवाई सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद और अधिक नियमित रूप से हो रही है। छह अप्रैल से शुरू हुई प्रक्रिया में अब तक विभिन्न पक्षों ने अपने तर्क पेश किए हैं और अदालत सभी दलीलों को विस्तार से सुन रही है।
हाईकोर्ट का उद्देश्य इस मामले में सभी पक्षों को समान अवसर देना है, ताकि किसी भी प्रकार का कानूनी पक्ष अधूरा न रहे। इसी कारण से सुनवाई को कई चरणों में विभाजित किया गया है।
आगे की प्रक्रिया पर नजर
आज की सुनवाई के बाद यह देखा जाएगा कि याचिकाकर्ता पक्ष अपनी दलीलों को किस दिशा में आगे बढ़ाता है और उसके बाद प्रतिवादी पक्ष किस तरह अपनी बात रखता है। यह मामला लंबे समय से कानूनी और सामाजिक दोनों स्तरों पर चर्चा में बना हुआ है।
कुल मिलाकर, भोजशाला से जुड़ा यह विवादित प्रकरण एक बार फिर न्यायिक प्रक्रिया के केंद्र में है, और आने वाले दिनों में इस पर अदालत की कार्यवाही बेहद महत्वपूर्ण रहने वाली है।
