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अद्भुत आध्यात्मिक अवसर अष्टापद-बद्रीनाथ सिद्धक्षेत्र कपाट खुलने 2026 से श्रद्धालुओं के लिए खुलेगा दिव्य पावन तीर्थ भव्य आयोजन ऐतिहासिक महत्व

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Published On: 13 April 2026
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अष्टापद-बद्रीनाथ सिद्धक्षेत्र कपाट खुलने 2026 के अवसर पर आर्यिका पूर्णमती माताजी के सानिध्य में भव्य आयोजन, जानें पूरी जानकारी, तिथि और महत्व।

अष्टापद-बद्रीनाथ सिद्धक्षेत्र कपाट खुलने 2026

अष्टापद-बद्रीनाथ सिद्धक्षेत्र कपाट खुलने 2026 एक अत्यंत महत्वपूर्ण धार्मिक अवसर है, जो जैन समाज के लिए ऐतिहासिक और आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

राजेश जैन दद्दू
इंदौर

अष्टापद (उत्तराखंड) | श्री दिगम्बर जैन सिद्धक्षेत्र अष्टापद-बद्रीनाथ, उत्तराखंड में 23 अप्रैल गुरुवार 2026 से पावन कपाट खुलने जा रहे हैं। यह शुभ अवसर पर श्रंमण संस्कृति आचार्य श्री विद्यासागर नवाचार्य श्री समय सागर जी महाराज की शिष्य सजग साधिका प. पू. आर्यिका रत्न श्री 105 पूर्णमती माताजी संसघ के पावन सानिध्य में संपन्न होगा।

आयोजन का महत्व

धर्म समाज प्रचारक राजेश जैन दद्दू ने कहा कि कपाट खुलने के साथ ही यह क्षेत्र श्रद्धालुओं के लिए शरद पूर्णिमा तक दर्शन हेतु खुला रहेगा।यह आयोजन केवल एक धार्मिक कार्यक्रम नहीं बल्कि आस्था, श्रद्धा और साधना का अद्भुत संगम है।

प्रमुख संत एवं सानिध्य

इस पावन आयोजन में आर्यिका रत्न श्री 105 पूर्णमती माताजी संसघ का विशेष सानिध्य प्राप्त होगा, जो इस आयोजन को और अधिक दिव्यता प्रदान करता है।

ट्रस्ट एवं पदाधिकारी

श्री दिगम्बर जैन सिद्धक्षेत्र अष्टापद-बद्रीनाथ के अध्यक्ष आदित्य कासलीवाल, महामंत्री कीर्ति पांड्या, कोषाध्यक्ष अमित कासलीवाल ने कहा कि यह आयोजन जैन समाज के लिए अत्यंत धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व रखता है।

धार्मिक गतिविधियाँ

कार्यक्रम के अंतर्गत श्रद्धालुओं को निम्नलिखित अवसर प्राप्त होंगे:

  • तीर्थंकरों के चरण वंदना
  • पूजन-अर्चना
  • आध्यात्मिक साधना

श्रद्धालुओं के लिए व्यवस्थाएं

देशभर से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है, जिसके लिए प्रशासन एवं ट्रस्ट कमेटी द्वारा विशेष व्यवस्थाएं की जा रही हैं।दद्दू ने बताया कि इस पावन आयोजन के साथ ही अष्टापद क्षेत्र में नवनिर्माण कार्यों का भी शुभारंभ किया जाएगा, जिससे आने वाले समय में यह स्थान एक प्रमुख जैन तीर्थ के रूप में विकसित स्थापित हो सके।

आध्यात्मिक महत्व

अष्टापद क्षेत्र को प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ की निर्वाण भूमि माना जाता है, जहाँ उनकी स्मृति में भव्य सिद्धक्षेत्र विकसित किया जा रहा है।यह स्थान साधना, शांति और मोक्ष मार्ग का प्रतीक माना जाता है।

अपील

आयोजन से जुड़े ट्रस्ट पदाधिकारी जिनेन्द्र कासलीवाल ने भी श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे इस आध्यात्मिक अवसर का लाभ लें और धर्म-आराधना में सहभागी बनें।

महत्वपूर्ण जानकारी

  • कपाट खुलने की तिथि: 23 अप्रैल 2026 गुरुवार
  • स्थान: अष्टापद-बद्रीनाथ, जिला चमोली (उत्तराखंड)
  • परम सानिध्य: आर्यिका रत्न श्री 105 पूर्णमती माताजी संसघ
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