जयपुर जैन संत संघ मंगल प्रवास के तहत 11 संघों का अद्भुत संगम, आचार्य वर्धमान सागर सहित सभी संतों का भव्य प्रवास और धार्मिक महोत्सव।
जयपुर जैन संत संघ मंगल प्रवास
राष्ट्र गौरव पारस जैन “पार्श्वमणि” पत्रकार कोटा
जयपुर जैन संत संघ मंगल प्रवास के इस पावन अवसर पर राजस्थान की राजधानी जयपुर, जिसे गुलाबी नगरी के नाम से जाना जाता है, आज धर्म, तप और साधना की अद्भुत धारा में सराबोर हो चुकी है। यह केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि एक ऐतिहासिक और आध्यात्मिक संगम है, जिसमें एक साथ 11 जैन संत संघों का मंगल प्रवास हो रहा है।राणा प्रताप, मीरा और हाड़ी रानी की तपोभूमि पर इस प्रकार का दिव्य आयोजन होना अपने आप में गौरव का विषय है।
जयपुर में 11 संघों का अद्भुत संगम
जयपुर जैन संत संघ मंगल प्रवास का सबसे विशेष पहलू यह है कि शहर के विभिन्न क्षेत्रों में एक साथ 11 संघ विराजमान हैं। यह दृश्य अत्यंत दुर्लभ और अद्वितीय है।
यह आयोजन केवल धार्मिक नहीं बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। श्रद्धालु बड़ी संख्या में पहुंचकर संतों के दर्शन कर रहे हैं और आशीर्वाद प्राप्त कर पुण्य अर्जित कर रहे हैं।
आचार्य वर्धमान सागर जी महाराज का मंगल प्रवास
अन्य आचार्य एवं संतों का प्रवास विवरण
जयपुर जैन संत संघ मंगल प्रवास में अनेक पूज्य संतों का सान्निध्य प्राप्त हो रहा है—
- परम पूज्य आचार्य श्री सुन्दर सागर जी महाराज ससंघ
- परम पूज्य आचार्य श्री शशांक सागर जी महाराज ससंघ
मालवीय नगर सेक्टर 3, श्री शांतिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर - परम पूज्य आचार्य श्री प्रज्ञा सागर जी महाराज ससंघ
महारानी फार्म, गायत्री नगर
दिनांक रविवार, 12 अप्रैल, प्रातः
जवाहर नगर के श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन मंदिर में भव्य मंगल प्रवेश
- परम पूज्य आचार्य श्री 108 विनीत सागर जी महाराज ससंघ
प्रतापनगर, श्री चन्द्र प्रभू दिगम्बर जैन मंदिर - परम पूज्य आचार्य श्री 108 नवीन नन्दी जी महाराज
अजमेर रोड, बगरू–दहमीकलां, श्री आदिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर - परम पूज्य उपाध्याय श्री उर्जयन्त सागर जी महाराज
ख्वास जी का रास्ता, पार्श्वनाथ सोनियान मंदिर - परम पूज्य मुनि 108 श्री विनम्र सागर जी महाराज
अम्बाबाड़ी - परम पूज्य मुनि 108 श्री विभक्त सागर जी महाराज
चित्रकूट कॉलोनी, सांगानेर - गणिनी आर्यिका 105 श्री नंगमति माताजी
बीलवा नांगल्या, विमल परिसर - आर्यिका रत्न 105 श्री अर्हम श्री माताजी
प्रतापनगर सेक्टर 8 - आर्यिका रत्न 105 श्री नंदीश्वर मति माताजी
वर्धमान सरोवर
धार्मिक वातावरण और श्रद्धालुओं की भावना
जयपुर जैन संत संघ मंगल प्रवास ने पूरे शहर को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया है।भक्तजन सुबह से ही मंदिरों में पहुंचकर—
- संतों के दर्शन
- प्रवचन श्रवण
- पूजन एवं आराधना
कर रहे हैं।इस आयोजन ने समाज में एकता, श्रद्धा और धर्म के प्रति आस्था को और मजबूत किया है।
भविष्य की परिकल्पना
इस ऐतिहासिक अवसर पर एक सुंदर भावना व्यक्त की गई है कि—
- एक बार सभी 11 संघों का वात्सल्यमय मिलन जयपुर की धरती पर एक साथ हो
- पूरे देश से भक्तजन आएं
- एक अद्वितीय, अलौकिक और भव्य आयोजन हो
यह सपना यदि साकार होता है, तो यह जैन समाज के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाएगा।
निष्कर्ष
- जयपुर जैन संत संघ मंगल प्रवास केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि आस्था, संस्कृति और आध्यात्मिक चेतना का महासंगम है।यह आयोजन यह संदेश देता है कि—
धर्म केवल पूजा नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला है
संतों का सान्निध्य जीवन को दिशा देता है
और सामूहिक आयोजन समाज को मजबूत बनाते हैं
