Indore : छत्रपति नगर में आदिनाथ जिनालय का महामस्तकाभिषेक, मान स्तंभ का भव्य समारोह कल होगा
Indore– तीर्थ स्वरूप दिगंबर जैन आदिनाथ जिनालय, छत्रपति नगर में कल एक भव्य धार्मिक आयोजन का आयोजन किया जा रहा है। यहां निर्मित 45 फुट ऊँचे सुदर्शनीय मान स्तंभ में विराजित चतुर्मुखी 12 प्रभु प्रतिमाओं का महामस्तकाभिषेक होगा। इस पावन अवसर पर कई प्रमुख आचार्यों और मुनियों की पावन उपस्थिति होगी, जो इस धार्मिक अनुष्ठान को और भी विशिष्ट बनाएगी।
महामस्तकाभिषेक की तिथि और कार्यक्रम
Indore ट्रस्ट के महामंत्री विपुल बांझल ने बताया कि यह महामस्तकाभिषेक कल प्रातः 9 बजे आयोजित किया जाएगा। इस अवसर पर परम पूज्य आचार्य द्वय विद्या-समय सागरजी महाराज के आशीर्वाद से, पूज्य मुनि द्वय श्री विमल सागरजी और श्री अनंत सागरजी महाराज के पावन सानिध्य में तथा प्रतिष्ठाचार्य ब्रह्मचारी विनय भैया बंडा के निर्देशन में स्वर्ण और रजत कलशों से इस धार्मिक अनुष्ठान का आयोजन होगा।
पिछले वर्ष मान स्तंभ प्रतिष्ठा महोत्सव के उपरांत यह पहला महामस्तकाभिषेक है। ट्रस्ट के पदाधिकारी एवं धार्मिक समाज जन इस अवसर को ऐतिहासिक और श्रद्धापूर्ण मानते हैं।
मान स्तंभ का निर्माण और इतिहास
धर्म समाज प्रचारक राजेश जैन दद्दू ने बताया कि यह मान स्तंभ श्वेत मार्बल से निर्मित है और इसकी ऊँचाई 45 फीट है। इसमें विराजित चतुर्मुखी 12 प्रभु प्रतिमाएं अपने आप में अत्यंत भव्य और दिव्य स्वरूप रखती हैं।
मान स्तंभ का निर्माण छत्रपति नगर निवासी देवरीवाला परिवार द्वारा किया गया। यह परिवार अपनी मां, समाधिस्थ आर्यिका समाधिश्री माताजी कंचन बाई की स्मृति में इस स्तंभ का निर्माण कर रहा है। पितृ पुरुष स्वर्गीय श्री कपूरचंदजी जैन की प्रेरणा और उदार हृदय की वजह से यह धार्मिक धरोहर स्थापित की गई। देवरीवाला परिवार के सदस्यों – स्वर्गीय रमेशचंद्र जैन, राजेंद्र जैन, वीरेंद्र जैन, भूपेंद्र जैन और जितेंद्र जैन – ने इस स्तंभ के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
पूज्य मुनि श्री गुप्ती सागरजी महाराज की प्रेरणा और मार्गदर्शन से यह कार्य संपन्न हुआ। यह मान स्तंभ न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि अपनी कलात्मकता और भव्यता के लिए भी विशेष रूप से पहचाना जाता है।
ट्रस्ट और आयोजकों का योगदान
इस भव्य आयोजन को सफल बनाने के लिए ट्रस्ट के सभी पदाधिकारी सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। कार्याध्यक्ष डॉ. जैनेंद्र जैन, कोषाध्यक्ष रमेश जैन, ट्रस्टी कमल जैन, निलेश जैन, जिनेश जैन और राकेश नायक ने समाज जनों से अपील की है कि वे अधिक से अधिक संख्या में इस पावन आयोजन में उपस्थित हों।
ट्रस्ट ने यह भी बताया कि यह आयोजन केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि समाज में एकता और धार्मिक भावना को भी प्रोत्साहित करने वाला अवसर है। उपस्थित श्रद्धालु न केवल पवित्र अनुष्ठानों का हिस्सा बनेंगे, बल्कि मान स्तंभ की दिव्यता और कलात्मक सुंदरता का आनंद भी लेंगे।
धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व
महामस्तकाभिषेक का आयोजन जैन धर्म में अत्यंत पवित्र और महत्त्वपूर्ण माना जाता है। यह अनुष्ठान केवल प्रतिमा की पूजा और अभिषेक तक सीमित नहीं होता, बल्कि यह समाज के लिए धार्मिक शिक्षा और आध्यात्मिक अनुशासन का संदेश भी देता है।
मान स्तंभ में विराजित चतुर्मुखी 12 प्रभु प्रतिमाएं धर्म, अहिंसा, और आध्यात्मिक ज्ञान का प्रतीक हैं। यह स्तंभ श्रद्धालुओं को आत्मशांति, भक्ति और सामाजिक सद्भाव का संदेश देता है। महाराजों और मुनियों के पावन सानिध्य में होने वाला महामस्तकाभिषेक यह सुनिश्चित करता है कि यह धार्मिक कार्य विधि-विधान और पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार संपन्न होगा।
समाज और श्रद्धालुओं की भागीदारी
ट्रस्ट ने समाज जनों से अपील की है कि वे इस पावन अवसर में अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित हों। आयोजक चाहते हैं कि परिवार और मित्रों के साथ आएं और इस धार्मिक महोत्सव का अनुभव साझा करें। आयोजकों ने यह भी कहा कि उपस्थित होने वाले श्रद्धालुओं के लिए सभी व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई हैं, ताकि वे बिना किसी असुविधा के इस अनुष्ठान में भाग ले सकें।
आने वाली विशेषताएं और अवसर
यह महामस्तकाभिषेक केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि यह समाज में जैन धर्म की सांस्कृतिक विरासत को भी जीवित रखने का अवसर है। उपस्थित लोग मान स्तंभ की भव्यता का अनुभव करेंगे और अपने परिवार के साथ इस धार्मिक उत्सव का आनंद लेंगे।
अंततः, छत्रपति नगर में स्थित आदिनाथ जिनालय का यह महामस्तकाभिषेक जैन धर्म और Indore के धार्मिक परिदृश्य में एक ऐतिहासिक घटना के रूप में दर्ज होगा। यह आयोजन श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक अनुभव प्रदान करने के साथ-साथ धार्मिक परंपरा और सांस्कृतिक धरोहर को भी सजीव रखेगा।
