मध्य प्रदेश सरकार शराब दुकानों के लिए एमपी में नए निगम-मंडल गठित करेगी। मंत्रिमंडलीय समिति ने 489 अनसोल्ड दुकानों को चलाने का फैसला किया है। पूरी खबर पढ़ें।
मध्य प्रदेश: सरकार बनाएगी शराब दुकानों के संचालन के लिए निगम-मंडल, मंत्रिमंडलीय समिति का बड़ा फैसला
भोपाल: मध्य प्रदेश सरकार ने एक ऐतिहासिक फैसले में प्रदेश में शराब दुकानों के संचालन के लिए नए निगम-मंडल गठित करने का निर्णय लिया है। यह कदम उन 489 दुकानों को संचालित करने के लिए उठाया गया है, जो 12 चरणों की नीलामी प्रक्रिया के बाद भी नहीं बिक सकीं।
उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडलीय समिति की बैठक में यह अहम फैसला लिया गया। इस निर्णय के तहत, प्रदेश में एक निगम या मंडल की स्थापना की जाएगी, जो सीधे आबकारी विभाग के अधीन होगा और बिना बिकी शराब की दुकानों का परिचालन करेगा।
नीलामी में असफल 489 दुकानों का भविष्य क्या होगा?
प्रदेश में इस बार शराब दुकानों की ई-टेंडरिंग प्रक्रिया 12 चरणों में पूरी हुई। हालांकि, सरकार को 3,099 दुकानों से तो राजस्व मिल गया, लेकिन 489 शराब दुकानें ऐसी रह गईं, जिनके लिए कोई भी ठेकेदार आगे नहीं आया। इन दुकानों की बिक्री न हो पाने के पीछे मुख्य वजह यह थी कि ठेकेदारों ने आरक्षित मूल्य से 30% से अधिक कम की बोली लगाई, जिसे सरकार ने खारिज कर दिया। अब इन्हीं दुकानों को चलाने की जिम्मेदारी नया Nigam-Mandal उठाएगा। इसका मतलब है कि अब ये दुकानें प्राइवेट ठेकेदारों की बजाय सरकारी तंत्र के माध्यम से संचालित होंगी। यह कदम न केवल राजस्व को संरक्षित करेगा बल्कि शराब के कारोबार में सरकार की सीधी भागीदारी को भी दर्शाता है।
मंत्रिमंडलीय समिति के फैसले का पूरा विवरण
बैठक की अध्यक्षता कर रहे उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने स्पष्ट किया कि सरकार का लक्ष्य राजस्व वसूली को प्राथमिकता देना है। इस बैठक में स्कूल शिक्षा एवं परिवहन मंत्री उदय प्रताप सिंह, प्रमुख सचिव वाणिज्यिक कर अमित राठौर और आयुक्त आबकारी दीपक कुमार सक्सेना मौजूद रहे।समिति ने यह भी निर्देश दिया कि आबकारी विभाग एक नीति तैयार करे, जिसके तहत इस नए निगम-मंडल का संचालन और क्रियान्वयन कैसे होगा, यह तय किया जा सके। गौरतलब है कि पिछले वर्ष की तुलना में इस बार शराब ठेकेदारों की संख्या 489 से बढ़कर 860 हो गई है, फिर भी ये दुकानें अनसोल्ड रह गईं।
MP में Nigam-Mandal की मौजूदा स्थिति क्या है?
यह फैसला एक ऐसे समय में आया है जब प्रदेश में पहले से मौजूद 40 से अधिक निगम-मंडलों की हालत खस्ता है। वर्तमान में अधिकांश निगम-मंडलों में अध्यक्ष नहीं हैं और विभागीय मंत्री ही इनका प्रभार देख रहे हैं।
पूर्व में भी कई निगमों को आर्थिक घाटे के चलते बंद किया जा चुका है। ऐसे में एक नए Nigam-Mandal की स्थापना को लेकर सियासी गलियारों में बहस छिड़ गई है कि क्या सरकार पुरानी गलतियों को दोहराएगी या फिर इस बार नई व्यवस्था के साथ कोई ठोस योजना होगी।
मध्य प्रदेश के Nigam-Mandal की स्थिति (स्नैपशॉट):
| विवरण (Description) | स्थिति (Status) |
|---|---|
| कुल निगम-मंडल | 40+ |
| अध्यक्ष पद | अधिकतर रिक्त |
| नया प्रस्तावित निगम | शराब दुकानों के लिए |
| पुराने बंद निगम | सड़क विकास निगम (2005 में बंद) |
सड़क विकास निगम का सबक: क्यों बंद हुए थे पुराने निगम?
इतिहास गवाह है कि मध्य प्रदेश में पब्लिक सेक्टर के निगम हमेशा सफल नहीं रहे हैं। सबसे चर्चित उदाहरण सड़क विकास निगम है, जो करोड़ों रुपए के घाटे में चला गया था और तत्कालीन सरकार ने वर्ष 2005 में इसे बंद कर दिया था।उस समय प्रशासनिक अक्षमता और भ्रष्टाचार को इस निगम के पतन का प्रमुख कारण माना गया था। अब जब मोहन सरकार फिर से लोक परिवहन सेवा को पटरी पर लाने का प्रयास कर रही है और साथ ही शराब कारोबार के लिए नया निगम-मंडल बना रही है, तो सवाल यह है कि सरकार पारदर्शिता कैसे सुनिश्चित करेगी?
शराब नीति 2026-27: नए बदलाव और चुनौतियाँ
सरकार के इस फैसले के पीछे की सबसे बड़ी मजबूरी प्रदेश में शराब नीति से जुड़ी हुई है। वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए सरकार ने 19 हजार करोड़ रुपए से अधिक का राजस्व लक्ष्य रखा था। हालांकि, नीलामी प्रक्रिया के दौरान कई जिलों जैसे भोपाल, अलीराजपुर और मुरैना में ठेकेदारों ने बोली लगाने से मना कर दिया। इसके अलावा, नई नीति के तहत अब शराब दुकानों के लाइसेंस का ऑटोमैटिक रिन्यूअल बंद कर दिया गया है और सभी दुकानों को ई-टेंडरिंग के जरिए आवंटित किया जा रहा है।
- निगम की भूमिका: निगम उन दुकानों का संचालन करेगा जहां प्रतिस्पर्धा नहीं हुई।
- ट्रांसपेरेंसी: सरकार का दावा है कि निगम के माध्यम से संचालन में पारदर्शिता आएगी और अवैध गतिविधियों पर लगाम लगेगी।
- राजनीतिक नियुक्तियां: सूत्रों के अनुसार, इस नए Nigam-Mandal में जल्द ही राजनीतिक नियुक्तियां की जा सकती हैं, क्योंकि भाजपा निगम-मंडलों में एकमुश्त नियुक्तियों की रणनीति पर काम कर रही है।
निष्कर्ष (Conclusion)
मध्य प्रदेश सरकार का यह कदम जहां एक ओर अनसोल्ड दुकानों की समस्या का समाधान है, वहीं यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार Nigam-Mandal के माध्यम से शराब जैसे संवेदनशील विषय को कैसे हैंडल करती है। क्या यह निगम सड़क विकास निगम की तरह घाटे का सबब बनेगा या सरकारी खजाने की कमाई का नया जरिया, यह तो आने वाला समय ही बताएगा।
