धार भोजशाला मामले पर MP हाई कोर्ट का बड़ा फैसला। कोर्ट ने 6 अप्रैल 2026 से नियमित सुनवाई का आदेश दिया है। जानिए भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद विवाद का पूरा अपडेट।
धार भोजशाला मामले पर MP हाई कोर्ट का बड़ा फैसला: 6 अप्रैल से नियमित सुनवाई
इंदौर। मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित ऐतिहासिक और अत्यधिक संवेदनशील धार भोजशाला मामले पर MP हाई कोर्ट का बड़ा फैसला आ गया है। गुरुवार, 2 अप्रैल 2026 को इंदौर खंडपीठ ने इस केस की सुनवाई को एक नई दिशा देते हुए 6 अप्रैल से नियमित सुनवाई शुरू करने का आदेश सुनाया।यह आदेश उन सभी याचिकाओं पर आया है, जिनमें इस परिसर के धार्मिक स्वरूप को लेकर लंबे समय से कानूनी जंग चल रही है। न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि अब इस मामले में किसी भी तरह की अनावश्यक देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
हाई कोर्ट के इस ऐतिहासिक फैसले के बाद स्थानीय प्रशासन और केंद्रीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) को भी अलर्ट कर दिया गया है। अब आगामी सोमवार से यह केस दैनिक सुनवाई सूची में शामिल किया जाएगा।
कोर्ट ने क्यों लिया यह बड़ा फैसला?
न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला और न्यायमूर्ति आलोक अवस्थी की युगलपीठ ने यह फैसला इसलिए लिया क्योंकि पिछले कई वर्षों से यह मामला अदालत में लंबित था और अन्य मामलों के चलते इसकी सुनवाई टलती रहती थी।
कोर्ट का साफ संदेश: “यह मामला ऐतिहासिक और सांप्रदायिक सौहार्द से जुड़ा है। इसलिए इसे प्राथमिकता के आधार पर सुनना आवश्यक है।”
पीठ ने कहा कि धार भोजशाला मामले पर MP हाई कोर्ट का बड़ा फैसला सिर्फ कानूनी पेचीदगियों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित रखने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा। कोर्ट ने दोनों पक्षों से अपील की है कि वे बिना किसी पूर्वाग्रह के अपने-अपने तर्क प्रस्तुत करें।
जानें क्या है धार भोजशाला विवाद का पूरा मामला?
धार का भोजशाला परिसर भारतीय इतिहास का एक अनमोल हिस्सा है, लेकिन यह विवादों में भी घिरा रहा है।
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हिंदू पक्ष का दावा: हिंदू समुदाय का कहना है कि यह परिसर राजा भोज द्वारा निर्मित देवी सरस्वती का मंदिर था। उनका दावा है कि यहां मूल रूप से विद्या की देवी की पूजा होती थी और यह एक विश्वविद्यालय (महाविद्यालय) हुआ करता था।
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मुस्लिम पक्ष का दावा: मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौला मस्जिद कहता है। उनका तर्क है कि 11वीं शताब्दी में इस स्मारक पर मुस्लिम शासकों का नियंत्रण था और यहां दशकों से नमाज अदा की जाती रही है।
वर्तमान में यह परिसर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के अधीन है। हालांकि, एक पुराने समझौते के तहत, हिंदुओं को हर मंगलवार को पूजा की अनुमति है, जबकि मुसलमान हर शुक्रवार को नमाज अदा करते हैं।
हाई कोर्ट की युगलपीठ ने पहले किया था निरीक्षण
इस बड़े फैसले से पहले, 28 मार्च 2026 को हाई कोर्ट के दोनों जजों ने स्वयं धार जाकर भोजशाला परिसर का निरीक्षण किया था। यह कदम अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि न्यायाधीशों ने वास्तविक स्थिति को समझने के लिए खुद मौके पर जाकर वास्तुशिल्प और धार्मिक चिन्हों का अवलोकन किया।निरीक्षण के दौरान उन्होंने वहां लगे शिलालेखों, मूर्तियों के अवशेषों और मस्जिद के ढांचे को बारीकी से देखा। इस निरीक्षण के बाद ही कोर्ट इस नतीजे पर पहुंचा कि इस मामले में अब तत्काल नियमित सुनवाई होनी चाहिए।
ASI सर्वे और वैज्ञानिक जांच में क्या आया सामने?
कोर्ट के आदेश पर एएसआई (ASI) द्वारा पहले ही वैज्ञानिक सर्वेक्षण (कार्बन डेटिंग और जीपीआर सर्वे) किया जा चुका है।
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सर्वे के प्रमुख बिंदु:
- जमीन के अंदर प्राचीन संरचनाओं के होने के संकेत मिले हैं।
- कुछ स्तंभों पर हिंदू देवी-देवताओं के नक्काशीदार चिन्ह पाए गए हैं, जिन्हें बाद में इस्लामिक कला से ढका गया था।
- सर्वे रिपोर्ट में दोनों पक्षों के कुछ दावों की पुष्टि और कुछ का खंडन किया गया है।
हालांकि, एएसआई की इस रिपोर्ट को लेकर पहले से ही दोनों पक्षों ने आपत्तियां दर्ज कराई थीं, जिसे अब 6 अप्रैल से शुरू होने वाली सुनवाई में विस्तार से सुना जाएगा।
6 अप्रैल से कैसे चलेगी सुनवाई? (H2: धार भोजशाला मामले पर MP हाई कोर्ट का बड़ा फैसला और प्रक्रिया)
धार भोजशाला मामले पर MP हाई कोर्ट का बड़ा फैसला यह है कि अब यह केस रोजाना सुना जाएगा।
- तारीख: 6 अप्रैल 2026 (सोमवार) से प्रारंभ।
- स्थान: मध्य प्रदेश हाई कोर्ट, इंदौर खंडपीठ।
- प्रक्रिया: सबसे पहले याचिकाकर्ताओं (हिंदू पक्ष) की बहस सुनी जाएगी। इसके बाद आपत्तिकर्ताओं (मुस्लिम पक्ष) को अपना पक्ष रखने का मौका मिलेगा।
कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि किसी भी पक्ष को समय की बर्बादी न करते हुए अपने तर्क सीमित समय में प्रस्तुत करने होंगे। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि अब इस सदियों पुराने विवाद पर जल्द ही कोई ठोस निर्णय आ सकता है।
निष्कर्ष: आगे क्या होगा?
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने साफ कर दिया है कि वह इस मामले में तेजी से सुनवाई चाहता है। 6 अप्रैल की तारीख अब सिर्फ एक कानूनी प्रक्रिया नहीं बल्कि पूरे प्रदेश के लिए एक महत्वपूर्ण दिन होगी।अगर कोर्ट ने ASI सर्वे को अंतिम मान लिया तो इससे परिसर के स्वरूप में बड़ा बदलाव हो सकता है। दूसरी ओर, दोनों समुदायों की भावनाएं भी इससे जुड़ी हैं। प्रशासन ने किसी भी अप्रिय स्थिति से बचने के लिए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम कर लिए हैं।आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या हाई कोर्ट 7 अप्रैल, 2003 के पुराने ASI आदेश (जिसमें मंगलवार-शुक्रवार की पूजा की अनुमति थी) में कोई बदलाव करता है या फिर इस परिसर को पूरी तरह से एक पक्ष को सौंप देता है। धार भोजशाला मामले पर MP हाई कोर्ट का बड़ा फैसला अब इतिहास रचने को तैयार है।
