गणेश शंकर विद्यार्थी भारत रत्न मांग को लेकर संसद में आवाज उठी, पत्रकार संघ ने जताया आभार। जानिए उनके योगदान, बलिदान और सम्मान की पूरी खबर।
गणेश शंकर विद्यार्थी भारत रत्न मांग की शुरुआत
इस संबंध में कानपुर सांसद रमेश अवस्थी द्वारा लोकसभा में उठाई गई मांग का गणेश शंकर विद्यार्थी पत्रकार संघ ने स्वागत करते हुए आभार व्यक्त किया है।
संसद में उठी मजबूत आवाज
संघ के स्थानीय शाखा प्रमुख आशीष जैन ने जानकारी देते हुए बताया कि हाल ही में सांसद रमेश अवस्थी ने संसद में गणेश शंकर विद्यार्थी भारत रत्न मांग को पुरजोर तरीके से रखा।उन्होंने अपने वक्तव्य में कहा कि विद्यार्थी जी ने अपने समाचार पत्र ‘प्रताप’ के माध्यम से ब्रिटिश शासन के अत्याचारों के खिलाफ निर्भीकता से आवाज उठाई और स्वतंत्रता आंदोलन को वैचारिक शक्ति प्रदान की।
पत्रकार संघ ने जताया आभार
गणेश शंकर विद्यार्थी पत्रकार संघ ने इस पहल का स्वागत करते हुए सांसद के प्रति आभार व्यक्त किया।संघ के सदस्यों ने कहा कि यह मांग केवल एक सम्मान नहीं, बल्कि देश की पत्रकारिता और स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास को सम्मान देने का प्रयास है।
स्वतंत्रता संग्राम में योगदान
शहादत और गांधीजी की श्रद्धांजलि
25 मार्च 1931 को कानपुर दंगों के दौरान लोगों की जान बचाते हुए उन्होंने अपना सर्वोच्च बलिदान दिया।उनकी शहादत पर महात्मा गांधी ने भावपूर्ण श्रद्धांजलि देते हुए कहा था कि उन्हें भी ऐसी ही मृत्यु प्राप्त हो।गांधीजी ने यह भी माना था कि स्वतंत्र भारत में प्रधानमंत्री पद के लिए गणेश शंकर विद्यार्थी एक प्रमुख दावेदार हो सकते थे।
स्मारक और संग्रहालय की मांग
सांसद अवस्थी ने आगे मांग रखी कि:
- कानपुर स्थित उनकी शहादत स्थली का सुंदरीकरण किया जाए
- भव्य स्मारक एवं स्मृति वाटिका बनाई जाए
- ‘प्रताप प्रेस’ को राष्ट्रीय पत्रकारिता संग्रहालय के रूप में विकसित किया जाए
यह कदम नई पीढ़ी को उनके आदर्शों से जोड़ने में मदद करेगा।
प्रतिमा स्थापना की मांग
संघ के वरिष्ठ सदस्य शिरीष सकलेचा ने मांग की कि दिल्ली के लोकसभा परिसर में गणेश शंकर विद्यार्थी की प्रतिमा स्थापित की जाए।यह उनके योगदान को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा।
श्रद्धांजलि सभा का आयोजन
25 जनवरी को उनकी पुण्यतिथि पर एक ऑनलाइन श्रद्धांजलि सभा आयोजित की गई।
इसमें प्रदेशभर के पत्रकारों ने भाग लेकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की और गणेश शंकर विद्यार्थी भारत रत्न मांग को समर्थन दिया।
आज के समय में प्रेरणा
आज के समय में जब पत्रकारिता कई चुनौतियों से गुजर रही है, उनका जीवन मार्गदर्शन और प्रेरणा प्रदान करता है।
