भारतीय रुपया Dollar के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर पर, जानिए प्रमुख कारण
भारतीय रुपया शुक्रवार को अमेरिकी Dollar के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया है, जिससे निवेशकों और आम जनता दोनों के लिए चिंता बढ़ गई है। अंतर-दिवसीय कारोबार में रुपया 74 पैसे गिरकर 94.70 रुपये प्रति डॉलर पर बंद हुआ, जो अब तक का सबसे निचला स्तर है। शुरुआती कारोबार में भी रुपया 28 पैसे कमजोर होकर 94.24 रुपये पर आ गया था, और यह लगातार तीसरे सत्र में गिरावट पर रहा। इस लगातार कमजोरी के पीछे मुख्य रूप से दो प्रमुख कारण माने जा रहे हैं। पहला, विदेशी संस्थागत निवेशकों की भारतीय बाजारों से लगातार पूंजी की निकासी, जिसने रुपये पर दबाव बढ़ाया। दूसरा, मध्य पूर्व में ईरान और अन्य क्षेत्रों में जारी भू-राजनीतिक तनाव, जिसने वैश्विक निवेशकों की धारणा को नकारात्मक रूप से प्रभावित किया। रुपये में इस गिरावट का असर न सिर्फ विदेशी निवेशकों बल्कि घरेलू व्यापारियों और आम जनता पर भी पड़ा है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने जनवरी में हाजिर बाजार से 2.52 अरब डॉलर की खरीदारी की थी, ताकि मुद्रा को स्थिर किया जा सके, लेकिन वैश्विक परिस्थितियों और निवेशकों के रुझान के कारण रुपये में कमजोरी लगातार जारी है।
शुरुआती कारोबार में भी गिरावट
शुरुआती कारोबार में रुपया पहले ही 28 पैसे गिरकर 94.24 रुपये प्रति डॉलर पर आ गया था। मंगलवार और बुधवार को भी रुपये में गिरावट दर्ज की गई थी:
- मंगलवार को रुपया 23 पैसे कमजोर होकर 93.76 पर बंद हुआ।
- बुधवार को अंतरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में रुपया 93.94 पर खुला और 93.86 से 94.08 के बीच कारोबार के बाद अब तक के सबसे निचले बंद स्तर पर पहुंचा।
इस लगातार गिरावट का असर बाजार धारणा और निवेशकों के मनोबल पर पड़ रहा है।
गिरावट के प्रमुख कारण
विशेषज्ञों के अनुसार, रुपया कमजोर होने के पीछे मुख्य रूप से दो कारण हैं:
- विदेशी संस्थागत निवेशकों की निकासी: भारतीय शेयर और बॉन्ड बाजारों से विदेशी निवेशकों द्वारा लगातार पूंजी की निकासी हो रही है, जिससे रुपये पर दबाव बना है।
- मध्य पूर्व में भू-राजनीतिक तनाव: ईरान संकट और पश्चिम एशिया में जारी तनाव ने वैश्विक निवेशकों की धारणा को नकारात्मक रूप से प्रभावित किया है।
इन दो कारकों के चलते रुपये में लगातार कमजोरी दर्ज की जा रही है और यह डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुँच गया है।
RBI की प्रतिक्रिया
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने जनवरी में हाजिर बाजार से 2.52 अरब अमेरिकी डॉलर खरीदे थे, ताकि रुपये पर दबाव कम किया जा सके। इसके बावजूद, वैश्विक बाजार में अस्थिरता और निवेशकों की धारणा में नकारात्मक बदलाव के कारण रुपये में गिरावट बनी हुई है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि RBI समय-समय पर विदेशी मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप करता रहेगा, ताकि रुपये की स्थिति को स्थिर किया जा सके।
निवेशकों के लिए संकेत
विदेशी निवेशकों की निकासी और मध्य पूर्व संकट जैसी परिस्थितियों के कारण रुपये में कमजोरी बनी हुई है। निवेशकों को इस समय सतर्क रहने और बाजार में उतार-चढ़ाव की संभावना को ध्यान में रखने की सलाह दी जा रही है।
वहीं, आम जनता और व्यापारियों के लिए भी यह संकेत है कि विदेशी और अंतरराष्ट्रीय बाजार की घटनाओं का असर घरेलू मुद्रा पर तुरंत दिख सकता है।
निष्कर्ष
भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले लगातार गिरावट का सामना कर रहा है। इसके पीछे विदेशी निवेशकों की निकासी और पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव मुख्य कारण हैं।
RBI की नीतियों और वैश्विक बाजार की स्थिति पर निगरानी बनी रहेगी। लंबे समय में मुद्रा स्थिरता लाने के लिए यह कदम आवश्यक हैं, लेकिन निवेशकों को फिलहाल सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है।
