Nagda-खाचरौद क्षेत्र में विकास की कमी पर कांग्रेस नेता बसंत मालपानी का आरोप, पदयात्रा के माध्यम से ग्रामीणों की समस्याओं को किया उजागर
Nagda – Nagda-खाचरौद विधानसभा क्षेत्र के वर्तमान एवं पूर्व जनप्रतिनिधियों की क्षेत्र विकास के प्रति दूरदृष्टि की कमी के कारण इस क्षेत्र में अब भी बुनियादी सुविधाओं की भारी कमी देखी जा रही है। कांग्रेस नेता बसंत मालपानी ने यह गंभीर आरोप लगाए हैं और इसके समर्थन में ग्रामीणों के साथ पदयात्रा आयोजित की, जिसमें क्षेत्रवासियों की समस्याओं और मांगों को सीधे तौर पर प्रशासन तक पहुंचाने का प्रयास किया गया।
बुनियादी सुविधाओं की कमी
बसंत मालपानी ने पदयात्रा के दौरान ग्रामीणों को बताया कि शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में सड़कों, साफ पानी, बिजली और चिकित्सा एवं शिक्षण संस्थानों जैसी बुनियादी सुविधाओं की स्थिति बेहद असंतोषजनक है। उन्होंने विशेष रूप से यह उल्लेख किया कि एक ही पंचायत के दो गांवों के बीच पक्की सड़क का अभाव यह दर्शाता है कि वोट लेने के बाद जनप्रतिनिधि जनता की समस्याओं के प्रति संवेदनशील नहीं रहते।
मालपानी ने कहा कि पिछले लगभग 22 वर्षों से भाजपा की सरकार है और क्षेत्र में भाजपा के कई बड़े नेता हैं, लेकिन इसके बावजूद नागदा-खाचरौद विधानसभा क्षेत्र अभी भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित है। उन्होंने कहा कि यह केवल ग्रामीणों के लिए असुविधाजनक ही नहीं है, बल्कि क्षेत्र के विकास में भी बड़ी बाधा उत्पन्न कर रहा है।

पदयात्रा का आयोजन
युवा कांग्रेस जिला उपाध्यक्ष लखनसिंह ठाकुर ने जानकारी दी कि कांग्रेस नेता बसंत मालपानी के नेतृत्व में 25 मार्च 2026 को Nagdaदोपहर 11 बजे ग्राम मड़ावदी से पदयात्रा शुरू हुई। यह पदयात्रा ग्राम दुपड़ावदा तक चली और ग्रामीणों की समस्याओं और मांगों को उजागर करने का उद्देश्य रखा गया।
पदयात्रा के बाद खाचरौद में अनुविभागीय अधिकारी को जिलाधीश के नाम ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन में बताया गया कि दोनों गांव एक ही पंचायत के अधीन आते हैं, और पंचायत भवन ग्राम दुपड़ावदा में स्थित होने के कारण ग्राम मड़ावदी के वासियों को पंचायत से जुड़े सभी कामों के लिए दुपड़ावदा आना पड़ता है।
मार्ग की स्थिति और आवश्यकताएं
ज्ञापन में विशेष रूप से यह उल्लेख किया गया कि ग्राम मड़ावदी और दुपड़ावदा के बीच मार्ग की स्थिति बेहद जीर्ण-शीर्ण है। खासकर बारिश के दिनों में इस मार्ग पर चलना मुश्किल हो जाता है। यह मार्ग ढाई किलोमीटर लंबा है और दुपड़ावदा से कई गांवों को जोड़ता है। इसके अलावा, यह मार्ग खाचरौद पहुंचने के लिए सबसे कम दूरी वाला रास्ता भी है।
ज्ञापन में अधिकारियों से अनुरोध किया गया कि इस मार्ग का जल्द से जल्द निर्माण किया जाए, जिससे न केवल क्षेत्रवासियों को राहत मिले बल्कि क्षेत्र का समुचित विकास भी सुनिश्चित हो सके। ज्ञापन की एक प्रति क्षेत्रीय विधायक डॉ. तेजबहादुरसिंह चौहान को भी डाक के माध्यम से भेजी गई। ज्ञापन का वाचन युवा कांग्रेस प्रदेश महासचिव रवि मुकाती ने किया।
ग्रामीणों की सहभागिता
पदयात्रा में क्षेत्र के कई वरिष्ठ और पूर्व जनप्रतिनिधि शामिल हुए। इनमें पूर्व सरपंच कैलाश मालवीय, प्रकाश पप्पु चौधरी, हरीश मालवीय, फिरोज पटेल, इरफान पटेल, शाहरूख पटेल, अर्जुन राव, मुकेश मकवाना, सादिक शाह, भेरूलाल पाटीदार, ईश्वरलाल गोयल, निर्भयराम पाटीदार, रामचन्द्र गोयल, नाथु नाथ, कृष्णा मालीवाड, मांगीलाल मालवीय, रोहित मालवीय, श्रवण सोलंकी, शशिकांत सोलंकी, विनय सिंगोटिया, भरत भावद्रिया, बलबहादुरसिंह गोहिल, प्रहलाद डाबी, शेखर वर्मा, विक्रम मकवाना आदि लोग शामिल थे।
इस पदयात्रा में ग्रामीणों ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और अपने अनुभवों और समस्याओं को साझा किया। ग्रामीणों का कहना था कि पिछले कई वर्षों से सड़क और अन्य मूलभूत सुविधाओं की कमी के कारण उनका जीवन कठिनाई भरा रहा है।
कांग्रेस नेता की अपील
बसंत मालपानी ने कहा कि क्षेत्र के विकास के लिए सड़कों, बिजली, पानी, स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्रों में तत्काल कदम उठाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि अगर इन समस्याओं पर ध्यान नहीं दिया गया, तो ग्रामीण और क्षेत्रीय विकास प्रभावित होगा।
मालपानी ने यह भी कहा कि कांग्रेस स्थानीय मुद्दों को प्राथमिकता देती है और क्षेत्रीय जनता की समस्याओं को प्रशासन और सरकार तक पहुंचाने में हमेशा सक्रिय रहती है।
निष्कर्ष
Nagda-खाचरौद विधानसभा क्षेत्र में विकास की गति धीमी होने और बुनियादी सुविधाओं की कमी ने ग्रामीणों को परेशान कर रखा है। कांग्रेस नेता बसंत मालपानी द्वारा आयोजित यह पदयात्रा इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिससे प्रशासन तक ग्रामीणों की वास्तविक समस्याएं पहुँच सकें।
इस पहल ने यह स्पष्ट किया कि जनप्रतिनिधियों की दूरदृष्टि और सक्रियता की कमी के कारण क्षेत्र में विकास की गति धीमी रह गई है। ग्रामीणों की समस्याओं को समझने और उनके समाधान के लिए निरंतर प्रयास किए जाने की आवश्यकता है।
पदयात्रा और ज्ञापन सौंपने जैसी गतिविधियों से यह संदेश भी गया कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया में सक्रिय सहभागिता और जनप्रतिनिधियों पर निगरानी महत्वपूर्ण है, ताकि क्षेत्रवासियों को उनके अधिकार और सुविधाएँ समय पर मिल सकें।
