अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे युद्ध को 24 दिन हो चुके हैं, लेकिन अमेरिकी जनता का बड़ा तबका इस जंग के खिलाफ है। जानिए क्यों ट्रंप के लिए यह युद्ध राजनीतिक संकट बनता जा रहा है और मिड-टर्म चुनाव पर क्या होगा असर।
युद्ध की वर्तमान स्थिति: ईरान-इजरायल जंग के 24 दिन
मध्य पूर्व में इन दिनों भीषण युद्ध जारी है। अमेरिका और इजरायल की ओर से ईरान के खिलाफ जारी इस जंग को आज 24 दिन हो गए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप सीजफायर के मूड में नहीं हैं और वह ईरान के खिलाफ पूरी जीत चाहते हैं। वहीं दूसरी ओर ईरान ने भी साफ कर दिया है कि वह इस युद्ध में नहीं झुकेगा और लगातार जवाबी कार्रवाई कर रहा है।
इस युद्ध की शुरुआत 28 फरवरी को हुई थी, जब अमेरिका और इजरायल ने संयुक्त रूप से ईरान पर हमले शुरू किए। अब तक इस संघर्ष में अमेरिका के 13 सैनिक मारे जा चुके हैं। इराक में ईरान समर्थित मिलिशिया समूहों ने अमेरिकी सैन्य अड्डों पर ड्रोन हमले किए हैं, जिससे यह संघर्ष और भी व्यापक होता जा रहा है।
अमेरिकी जनता का रुख: 66% लोग क्यों हैं युद्ध के खिलाफ?
हाल ही में कराए गए सर्वेक्षणों में यह साफ हो गया है कि अमेरिकी जनता का बड़ा हिस्सा ईरान के खिलाफ इस युद्ध के पक्ष में नहीं है। विभिन्न मीडिया संस्थानों और शोध संगठनों द्वारा किए गए सर्वेक्षणों के अनुसार, लगभग दो-तिहाई अमेरिकी नागरिक इस युद्ध का विरोध कर रहे हैं।
अलग-अलग सर्वेक्षणों में आंकड़े थोड़े भिन्न हैं, लेकिन सभी में एक ही बात सामने आती है – युद्ध के विरोध में जनता का स्पष्ट बहुमत है:
- NPR/PBS News/Marist Poll (मार्च 2026): 56% अमेरिकी युद्ध के विरोध में, 44% समर्थन में
- Quinnipiac University Poll (मार्च 2026): 53% विरोध, 40% समर्थन
- CNN/SSRS Poll (मार्च 2026): 59% विरोध, 41% समर्थन
- NBC News Poll (मार्च 2026): 52% विरोध, 41% समर्थन
- Reuters/Ipsos Poll (मार्च 2026): 43% विरोध, 27% समर्थन
इन आंकड़ों को देखते हुए यह कहना गलत नहीं होगा कि 66% के आसपास अमेरिकी जनता ईरान युद्ध के खिलाफ है, जबकि केवल 34% ही इस जंग को जरूरी मानते हैं।
सर्वेक्षणों में साफ हुई ट्रंप के खिलाफ नाराजगी
सिर्फ युद्ध का विरोध ही नहीं, बल्कि अमेरिकी जनता डोनाल्ड ट्रंप के युद्ध प्रबंधन से भी काफी नाराज है। विभिन्न सर्वेक्षणों में ट्रंप की ईरान नीति को लेकर लोगों की राय जानी गई और परिणाम चौंकाने वाले रहे।
| सर्वेक्षण | ट्रंप के ईरान प्रबंधन को स्वीकार | ट्रंप के ईरान प्रबंधन को अस्वीकार |
|---|---|---|
| The Economist/YouGov | 39% | 52% |
| PBS News/NPR/Marist | 36% | 54% |
| NBC News | 41% | 52% |
यह आंकड़े बताते हैं कि आधे से अधिक अमेरिकी नागरिक ट्रंप के ईरान नीति से संतुष्ट नहीं हैं। दिलचस्प बात यह है कि ट्रंप की कुल स्वीकार्यता रेटिंग (overall approval rating) भी लगातार गिर रही है। RealClearPolitics के अनुसार ट्रंप की स्वीकार्यता दर 43.2% है, जबकि अस्वीकार्यता दर 54.3% है।
महंगाई और पेट्रोल-गैस की कीमतें: जनता के गुस्से की मुख्य वजह
अमेरिकी जनता के युद्ध विरोध के पीछे सबसे बड़ी वजह है आर्थिक दबाव और बढ़ती महंगाई। युद्ध शुरू होने के बाद से पेट्रोल-गैस की कीमतों में तेजी से इजाफा हुआ है। न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, जॉर्जिया राज्य में पिछले एक महीने में पेट्रोल की कीमतों में लगभग 40% की वृद्धि हुई है।
अमेरिकी जनता का मानना है कि:
- युद्ध की वजह से पेट्रोल-गैस की कीमतें बढ़ रही हैं
- दुनियाभर में तेल-गैस का संकट पैदा हो गया है
- अमेरिकी सेना की कार्रवाई पर हर दिन अरबों डॉलर खर्च हो रहे हैं
- लंबा युद्ध अमेरिकी अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ सकता है
डेमोक्रेटिक नेता इस मुद्दे को जोर-शोर से उठा रहे हैं। हाउस माइनॉरिटी लीडर हकीम जेफ्रीज ने अपने सहयोगियों से कहा है कि वे रिपब्लिकन और युद्ध के खिलाफ “जवाबदेही और सस्ती कीमतों” (Accountability and affordability) का नारा दें।
ट्रंप की परवाह नहीं: ‘तेल-गैस की कीमत बढ़ने दो’
अमेरिकी जनता की चिंताओं के बीच राष्ट्रपति ट्रंप का रुख काफी सख्त है। उन्होंने साफ कर दिया है कि अगर तेल-गैस की कीमतें बढ़ती हैं, तो बढ़ने दो। उनका मानना है कि ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई पूरी तरह से सही और जरूरी है।ट्रंप ने हाल ही में कहा, “यह जल्द ही खत्म हो जाएगा। यह बुरा नहीं है”। व्हाइट हाउस ने भी युद्ध को लेकर स्पष्ट संदेश दिया है – प्रेस सेक्रेटरी करोलीन लेविट ने कहा कि अमेरिकी सेना भेजने का विकल्प भी टेबल पर है।हालांकि, रिपब्लिकन पार्टी के भीतर ही कुछ नेता चिंतित हैं। कोलोराडो की सांसद लॉरेन बोबर्ट ने सीएनएन से कहा, “मैं थक गई हूं कि इंडस्ट्रियल-वार कॉम्प्लेक्स हमारी कड़ी मेहनत से कमाई गई टैक्स डॉलर ले जा रहा है”।
मिड-टर्म चुनाव पर युद्ध का संभावित प्रभाव
इस साल अमेरिका में मिड-टर्म चुनाव होने हैं, जहां कांग्रेस की दोनों सीटों – सीनेट और हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव – के लिए चुनाव होंगे। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह युद्ध रिपब्लिकन पार्टी को भारी नुकसान पहुंचा सकता है।
मुख्य चुनावी मुद्दे:
- महंगाई और रोजगार – अमेरिकी जनता की पहली प्राथमिकता अर्थव्यवस्था है
- युद्ध का खर्च – प्रतिदिन लगभग $1 बिलियन का खर्च
- जनता का असंतोष – 66% लोग युद्ध के खिलाफ
पूर्व कांग्रेसी स्टीव इजरायल कहते हैं कि मिड-टर्म चुनाव आमतौर पर सिटिंग प्रेसिडेंट पर जनमत संग्रह की तरह होते हैं। 2002 में बुश को इराक युद्ध से फायदा हुआ था, लेकिन 2006 में इसी युद्ध ने उनकी पार्टी को बड़ा नुकसान पहुंचाया था।
अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर बढ़ता दबाव
ईरान युद्ध का असर सिर्फ राजनीति तक सीमित नहीं है, बल्कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर भी इसका गहरा प्रभाव पड़ रहा है। फेडरल रिजर्व के अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि युद्ध के कारण ऊर्जा बाजारों में उथल-पुथल से मौद्रिक नीति का दृष्टिकोण धुंधला हो गया है।फेड गवर्नर क्रिस्टोफर वालर ने कहा कि अगर ऊर्जा की ऊंची कीमतें मुद्रास्फीति को बढ़ाने लगती हैं, तो फेड को जवाब देना होगा। उन्होंने यह भी कहा कि अगर श्रम बाजार कमजोर रहता है, तो वे ब्याज दरों में कटौती की वकालत करेंगे।
आर्थिक मोर्चे पर चुनौतियां:
- फरवरी 2026 में 92,000 नौकरियों का नुकसान
- बढ़ती पेट्रोल कीमतों से आम जनजीवन प्रभावित
- उर्वरक की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर – किसानों पर दबाव
- सप्लाई चेन प्रभावित होने से महंगाई और बढ़ने की आशंका
निष्कर्ष: क्या ट्रंप को चुकाना पड़ सकता है युद्ध का खामियाजा?
ईरान के खिलाफ युद्ध पर डोनाल्ड ट्रंप अमेरिका में ही घिरते जा रहे हैं। 66% अमेरिकी जनता इस जंग के खिलाफ है और आधे से अधिक लोग ट्रंप के युद्ध प्रबंधन से नाखुश हैं। बढ़ती महंगाई, पेट्रोल-गैस के दाम और युद्ध पर हो रहे अरबों डॉलर के खर्च ने जनता का गुस्सा बढ़ाया है।राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर यह युद्ध लंबा खिंचता है और अमेरिकी सैनिकों की मौत का आंकड़ा बढ़ता है, तो मिड-टर्म चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।ट्रंप के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह है कि उनके अपने वोटर बेस का एक बड़ा हिस्सा भी “अमेरिका फर्स्ट” की नीति के तहत विदेशी युद्धों का विरोध करता है। अब देखना यह होगा कि ट्रंप जनता के इस विरोध के बीच अपनी रणनीति बदलते हैं या फिर चुनाव में इसका खामियाजा भुगतने को तैयार रहते हैं।
