सीधी जिला सहकारी केंद्रीय बैंक के CEO PS धनवाल निलंबित: गंभीर गड़बड़ियों का हुआ खुलासा, जांच में नहीं किया सहयोग
सीधी (मध्य प्रदेश): जिला सहकारी केंद्रीय बैंक के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) पीएस धनवाल को सहकारिता विभाग ने सस्पेंड (निलंबित) कर दिया है। यह कार्रवाई सीधे उस समय की गई जब 21 मार्च 2025 को बैंक के कामकाज में गंभीर गड़बड़ियों का खुलासा एक निरीक्षण के दौरान हुआ। विभाग की ओर से जारी किए गए आदेश के अनुसार CEO धनवाल ने निरीक्षण प्रक्रिया में जरूरी सहयोग नहीं किया और कई महत्वपूर्ण दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए, जिससे जांच प्रभावित हुई।
यह मामला न केवल बैंक के अंदर आर्थिक अनुशासन और प्रशासनिक जवाबदेही पर सवाल उठाता है बल्कि सहकारी बैंकिंग व्यवस्था में पारदर्शिता तथा भरोसे की भावना पर भी गंभीर प्रभाव डालता है।
निरीक्षण के दौरान क्या हुआ?
21 मार्च 2025 को सहकारिता विभाग की टीम ने सीधी जिला सहकारी केंद्रीय बैंक में एक नियमित निरीक्षण शुरू किया। यह निरीक्षण बैंक के वित्तीय रिकॉर्ड, प्रशासनिक प्रक्रिया, लेन‑देन की पारदर्शिता, तथा नियमों के पालन की जांच के लिए किया गया था।
लेकिन जैसे ही टीम ने बैंक के खातों, एंट्रीज़, लेन‑देन और अनुपालन से जुड़े दस्तावेजों की समीक्षा शुरू की, उन्हें कई गंभीर अनियमितताएँ और खामियाँ दिखीं। इन गड़बड़ियों ने तुरंत अधिकारियों का ध्यान खींचा और उन्होंने जब बैंक के CEO से रिकॉर्ड प्रस्तुत करने को कहा, तो शुरुआत में आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए।
डॉक्यूमेंटेशन और रिकॉर्ड की उपलब्धता नहीं होने के कारण निरीक्षण टीम को अपनी जांच जारी रखने में कठिनाई आई। यह स्थिति विभाग के लिए चिंताजनक थी क्योंकि बैंकिंग संचालन में दस्तावेजों का समयबद्ध और स्पष्ट रूप से उपलब्ध होना अनिवार्य होता है।
CEO के सहयोग का अभाव और विभाग की प्रतिक्रिया
निरीक्षण टीम की ओर से जब बार‑बार अनुरोध किया गया कि आवश्यक रिकॉर्ड प्रस्तुत किया जाए, CEO पीएस धनवाल ने इसका समुचित सहयोग नहीं किया। विभाग की रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से उल्लेख है कि रिकॉर्ड की मांग के बावजूद दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए, और जांच की प्रक्रिया प्रभावित हुई।
सहकारिता विभाग ने इस व्यवहार को गंभीर लापरवाही और प्रशासनिक कमजोरी माना। दस्तावेजों के अभाव में विभाग की टीम सही तरीके से बैंक के कामकाज की जांच नहीं कर पा रही थी, जिससे बैंक की वित्तीय और प्रशासनिक गतिविधियों में पारदर्शिता का अभाव माना गया।
इस तरह की परिस्थितियों में सक्षम अधिकारियों ने फैसला लिया कि जांच को प्रभावी रूप से जारी रखने के लिए CEO धनवाल के खिलाफ कार्रवाही करनी आवश्यक है।
कारण बताओ” नोटिस और असंतोषजनक जवाब
सहकारिता विभाग ने CEO पीएस धनवाल को “कारण बताओ” नोटिस जारी किया। इस नोटिस में उनसे कारण पूछा गया कि गड़बड़ी और दस्तावेज़ों का अनुपलब्ध होना क्यों हुआ, और क्यों उन्होंने जांच में उचित सहयोग नहीं किया।
आम तौर पर जब किसी बैंक अधिकारी या किसी भी संस्था का कर्मचारी ऐसी जांच का सामना करता है, तो वह विभाग को संतोषजनक जवाब देता है या अपने पक्ष की व्याख्या पेश करता है। लेकिन इस मामले में धनवाल ने हितधारकों तथा विभाग को जो उत्तर दिया, वो संतोषजनक नहीं माना गया।
उनके उत्तर में बैंक की गड़बड़ियों की व्याख्या स्पष्ट नहीं थी, न ही रिकॉर्ड उपलब्ध न कराए जाने का ठोस कारण बताया गया। विभाग की रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि धनवाल के बचाव‑तर्क में आवश्यक तथ्यात्मक आधार नहीं दिखे, जिससे यह अनुमान लगाया गया कि वह नियमों और प्रक्रियाओं का पालन करने में गंभीर रूप से चूक कर रहे हैं।
निलंबन का आदेश और असर
इन सब तथ्यों के आधार पर सहकारिता विभाग ने CEO पीएस धनवाल को निलंबित यानी सस्पेंड कर दिया। अधिकारीयों ने स्पष्ट किया कि यह कदम बैंकिंग व्यवस्था की अखंडता, पारदर्शिता और नियमों के पालन को सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है।
निलंबन के आदेश के बाद से ही बैंक के कामकाज में बदलाव दिखने लगे हैं। सहकारिता विभाग ने यह भी निर्देश दिए हैं कि बैंक के संचालन की जांच स्वतंत्र रूप से जारी रहे, और नए प्रभारित अधिकारी जल्द ही और स्पष्ट रिपोर्ट प्रस्तुत करें।
बैंक के कर्मचारियों और स्थानीय ग्राहकों के बीच इस निलंबन को लेकर मिश्रित प्रतिक्रियाएँ हैं। कई लोगों का कहना है कि यह कदम बैंक को बेहतर, जवाबदेह और भरोसेमंद बनाने की दिशा में सही था, वहीं कुछ लोगों ने चिंता जताई कि बैंक के रोज‑रोज़ के कामकाज पर इसका असर पड़ेगा।
क्या हैं गड़बड़ियों के मायने?
सहकारिता विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक निरीक्षण के दौरान जो गड़बड़ियाँ सामने आईं, उनमें शामिल हैं:
- वित्तीय रिकॉर्ड का व्यवस्थित न होना।
- लेन‑देन के दस्तावेजों का अभाव या अधूरा होना।
- नियमों और प्रक्रियाओं के अनुपालन में ढिलाई।
- प्रबंधन और प्रशासनिक कार्यों में पारदर्शिता का अभाव।
- जांच में आवश्यक सहयोग नहीं देना।
ये सभी चीजें एक ऐसी स्थिति का संकेत देती हैं जहाँ बैंक के संचालन में मानक बैंकिंग नियमों और वित्तीय अनुशासन का सही पालन नहीं हुआ।
पारदर्शिता और जवाबदेही का महत्व
कोई भी बैंक, खासकर सहकारी बैंक, जनता के योगदान और भरोसे पर आधारित होता है। ग्राहकों की जमा राशियाँ, ऋण योजनाएँ और बैंक के संचालन में नियमों का सख्ती से पालन होना जरूरी होता है।
जब तक बैंक में पारदर्शिता और लेखा‑जोखा (Audit Trail) का स्पष्ट पालन नहीं होता, तब तक ग्राहक और विभाग दोनों के लिए विश्वास की भावना कठिन हो जाती है। निलंबन का कदम इसी विश्वास को बनाए रखने और बैंकिंग व्यवस्थाओं को मजबूत बनाने की दिशा में एक निर्णायक कदम माना जा रहा है।
आगे क्या?
अब सहकारिता विभाग बैंक के अन्य रिकॉर्ड और संचालन का स्वतंत्र निरीक्षण जारी रखेगा। यदि आवश्यकता पड़ी, तो आगे और विभागीय कार्रवाही भी की जा सकती है।
बैंक के ग्राहकों को सुझाव दिया गया है कि वे अपने खातों, लेन‑देन और संबंधित दस्तावेजों पर विशेष ध्यान दें तथा किसी भी अनियमितता की सूचना समय‑समय पर संबंधित अधिकारियों को दें।
बैंकिंग क्षेत्र में ऐसी कार्रवाइयाँ यह याद दिलाती हैं कि पारदर्शिता, उत्तरदायित्व और जवाबदेही किसी भी वित्तीय संस्था के लिए अनिवार्य हैं।
