परमरस मालवा यात्रा के माध्यम से मुनिभगवंतों ने मालवा में धर्म, साधना और सेवा का अद्भुत संगम प्रस्तुत कर गुरु गच्छ का गौरव बढ़ाया।
परमरस मालवा यात्रा का परिचय
परमरस मालवा यात्रा केवल एक धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि आध्यात्मिक ऊर्जा, साधना और समाज सेवा का दिव्य संगम है। राष्ट्रसंत पुण्यसम्राट गुरुदेव श्रीमद् विजय जयंतसेन सूरीश्वरजी महाराजा के शिष्यरत्न परमरस द्विशतावधानी मुनिराज श्री प्रत्यक्षरत्न विजयजी म.सा. एवं मुनिराज श्री पवित्ररत्न विजयजी म.सा. के मार्गदर्शन में यह यात्रा मालवा क्षेत्र में धर्म जागरण का महत्वपूर्ण माध्यम बनी।इस यात्रा ने श्रद्धालुओं के जीवन में आध्यात्मिक चेतना, आस्था और समर्पण का संचार किया।
मुनिभगवंतों का प्रेरणादायी विहार
हर स्थान पर मुनियों ने
- प्रवचन दिए
- श्रद्धालुओं को मार्गदर्शन दिया
- समाज में संस्कारों का संचार किया
प्रमुख धार्मिक आयोजन
- आलोट में श्री नागेश्वर तीर्थ की परमरस स्पर्शना
- पिटोल में नागेश्वर पार्श्वनाथ दादा की पुनः प्रतिष्ठा
- बाग में मौन साधना कुटीर में प्रतिमा प्रतिष्ठा
- कुक्षी में सिमंधर स्वामी जिनालय का शताब्दी ध्वजारोहण
- बड़नगर में महावीर स्वामी जिनालय ध्वजारोहण
- नागदा में भव्य चातुर्मास एवं द्विशतावधान आयोजन
- नीमच में त्रिदिवसीय गुरूसप्तमी महोत्सव
- नेमि जयन्तराज विहारधाम का उद्घाटन
इन आयोजनों ने समाज में धर्म के प्रति नई ऊर्जा और जागरूकता उत्पन्न की।
मालवा में धर्म प्रभावना
परमरस मालवा यात्रा ने मालवा क्षेत्र को आध्यात्मिक रूप से समृद्ध किया।
मुनिभगवंतों के प्रवचनों से:
- श्रद्धालुओं में भक्ति भावना बढ़ी
- युवाओं में संस्कार जागृत हुए
- समाज में एकता और सेवा का भाव विकसित हुआ
यह यात्रा गुरु गच्छ के गौरव को नई ऊंचाइयों तक ले जाने में सफल रही।
निर्माण एवं प्रेरणादायी कार्य
- 4 विहारधाम निर्माण
- गहुली हेतु 2 रथ निर्माण
- उपाश्रय स्थापना
- जिनालय जीर्णोद्धार
ये कार्य समाज के लिए स्थायी धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहर बनेंगे।
आध्यात्मिक प्रभाव और संदेश
अखिल भारतीय श्री राजेन्द्र जैन नवयुवक परिषद के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी ब्रजेश बोहरा के अनुसार,
परमरस मालवा यात्रा एक ऐसी यात्रा है जिसने धर्म, सेवा और संस्कारों को एक साथ जोड़ा।
इस यात्रा का मुख्य संदेश है:
जीवन में धर्म, संयम और सेवा का महत्व
समाज में सकारात्मक ऊर्जा का प्रसार
आध्यात्मिक जागरण के माध्यम से आत्म विकास
वर्तमान स्थिति और आगामी योजनाएं
22 मार्च से मुनिभगवंतों की स्थिरता मोहनखेड़ा तीर्थ स्थित जयंतसेन म्यूजियम में रहेगी।आगामी चातुर्मास की आज्ञा प्राप्त होने के पश्चात वे पुनः विभिन्न संघों में विहार कर जिनशासन का प्रचार-प्रसार करेंगे।

