Rishikesh से अष्टापद की ओर आर्यिका संघ का मंगल विहार, हजारों श्रद्धालुओं की भावपूर्ण विदाई
Rishikesh, 21 मार्च:
धार्मिक आस्था, श्रद्धा और समर्पण का अद्भुत दृश्य उस समय देखने को मिला जब आर्यिका रत्न 105 पूर्णमति माताजी के पावन सानिध्य में उनके संघ का मंगल विहार ऋषिकेश से अष्टापद (बद्रीनाथ) की ओर शुभ मुहूर्त में प्रारंभ हुआ। यह विहार दोपहर 12:44 बजे विधि-विधान और मंत्रोच्चार के बीच आरंभ हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
भक्ति और उत्साह का अनूठा संगम
इस ऐतिहासिक और आध्यात्मिक क्षण का साक्षी बनने के लिए हजारों की संख्या में गुरु भक्त परिवार ऋषिकेश में एकत्रित हुए। श्रद्धालुओं में अपार उत्साह और भावनात्मक लगाव स्पष्ट रूप से देखा जा सकता था। जैसे ही माताजी का संघ विहार के लिए आगे बढ़ा, पूरा वातावरण “जय जिनेंद्र” और धार्मिक जयघोषों से गूंज उठा।
विपरीत मौसम में भी अडिग श्रद्धा
इस मंगल विहार के दौरान मौसम ने भी अपनी परीक्षा ली। अचानक बारिश और बिगड़े मौसम के बावजूद न तो माताजी का संकल्प डगमगाया और न ही श्रद्धालुओं की आस्था में कोई कमी आई। भीगते हुए भी श्रद्धालु पूरे मार्ग में माताजी के साथ चलते रहे, जो उनके अटूट विश्वास और समर्पण का प्रतीक है।
धर्म ध्वजा के साथ शोभायात्रा का दृश्य
विहार के दौरान सबसे आगे धर्म ध्वजा लेकर चल रहे श्रद्धालु आकर्षण का केंद्र बने रहे। कलेक्टर प्रतीक जैन धर्म ध्वजा धारण कर मार्गदर्शन करते हुए आगे-आगे चल रहे थे। उनके पीछे आर्यिका संघ और श्रद्धालुओं की लंबी कतार थी, जो एक भव्य धार्मिक यात्रा का रूप ले चुकी थी।
प्रमुख समाजसेवियों की गरिमामयी उपस्थिति
इस अवसर पर समाज के कई प्रतिष्ठित और गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। आरके मार्बल परिवार से श्री विमल जैन, तारिका जैन, राजेंद्र कटारिया, योगेश जैन, अजय जैन सहित अनेक श्रद्धालुओं ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। इसके साथ ही बद्रीनाथ अष्टापद क्षेत्र के अध्यक्ष आदित्य कुमार सिंह कासलीवाल, महामंत्री कीर्ति पांड्या, ट्रस्टी विजय काला और सहारनपुर से विशेष रूप से पहुंचे राजीव जैन भी इस पावन अवसर के साक्षी बने।
अष्टापद तीर्थ के पोस्टर का विमोचन
इस शुभ अवसर पर अष्टापद तीर्थ के प्रचार-प्रसार के उद्देश्य से एक विशेष पोस्टर का विमोचन भी किया गया। यह विमोचन समाज के वरिष्ठजनों के करकमलों द्वारा आर्यिका रत्न 105 पूर्णमति माताजी के संघ के सानिध्य में संपन्न हुआ। इस आयोजन ने कार्यक्रम को और भी विशेष बना दिया।
धर्म प्रचारक ने दी महत्वपूर्ण जानकारी
धर्म समाज प्रचारक राजेश जैन ‘दद्दू’ ने इस विहार के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यह यात्रा केवल एक स्थान से दूसरे स्थान तक जाने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह आत्मशुद्धि, तप और धर्म साधना की एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है। उन्होंने बताया कि इस प्रकार के विहार से समाज में धर्म के प्रति जागरूकता बढ़ती है और नई पीढ़ी को भी प्रेरणा मिलती है।
मंगल प्रवेश की संभावित तिथि घोषित
राजेश जैन ‘दद्दू’ ने जानकारी देते हुए बताया कि आर्यिका संघ का अष्टापद क्षेत्र में मंगल प्रवेश 21 अप्रैल की शाम या 22 अप्रैल की सुबह संभावित है। इस अवसर को लेकर समाज में पहले से ही उत्साह का माहौल है।
समाजजनों से अधिक से अधिक संख्या में पहुंचने का आह्वान
अष्टापद क्षेत्र के महामंत्री कीर्ति पांड्या ने समाज के सभी लोगों से अपील करते हुए कहा कि वे अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर इस ऐतिहासिक क्षण के साक्षी बनें। उन्होंने कहा कि आर्यिका संघ की मंगल अगवानी करना अपने जीवन को धन्य बनाने का एक दुर्लभ अवसर है।
आध्यात्मिक यात्रा का संदेश
यह विहार केवल एक धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि जीवन को सही दिशा देने वाला संदेश भी है। आर्यिका संघ का यह प्रयास समाज को संयम, साधना और सेवा के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। कठिन परिस्थितियों में भी अडिग रहकर अपने लक्ष्य की ओर बढ़ते रहना इस यात्रा का मुख्य संदेश है।
निष्कर्ष: आस्था, समर्पण और साधना का प्रतीक
Rishikesh से अष्टापद की ओर आर्यिका रत्न 105 पूर्णमति माताजी का यह मंगल विहार श्रद्धा, समर्पण और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत उदाहरण है। हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति, विपरीत मौसम में भी अटूट आस्था और समाज के प्रमुख लोगों की सहभागिता ने इस आयोजन को अविस्मरणीय बना दिया। आने वाले दिनों में अष्टापद क्षेत्र में होने वाला मंगल प्रवेश निश्चित रूप से एक ऐतिहासिक और आध्यात्मिक उत्सव के रूप में मनाया जाएगा।
