इंदौर सराफा चौपाटी गैस संकट गहराया। एलपीजी सिलेंडर न मिलने से दुकानें बंद, कोयला महंगा और ब्लैक में 5000 का सिलेंडर। जानें व्यापारियों का हाल।
इंदौर सराफा चौपाटी गैस संकट: ब्लैक में 5000 का सिलेंडर, कोयले से सेंकी जा रही मिठाई
इंदौर: होर्मुज स्ट्रेट से एलपीजी के जहाज भले ही भारत पहुंचने लगे हों, लेकिन इंदौर की सबसे पहचानी जाने वाली फूड स्ट्रीट इंदौर सराफा चौपाटी गैस संकट से अब भी उबर नहीं पाई है। पिछले एक सप्ताह से चल रही इस किल्लत ने यहां के व्यापारियों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। सिलेंडर न मिलने से करीब एक दर्जन दुकानें बंद हो चुकी हैं, जबकि बचे हुए व्यापारी महंगे कोयले और जुगाड़ से काम चलाने को मजबूर हैं। इस वजह से मिठाई और चाट की कीमतों में भी बढ़ोतरी होने की आशंका है।
ब्लैक मार्केट का कहर: 5000 रुपए में बिक रहा सिलेंडर
इंदौर सराफा चौपाटी गैस संकट का सबसे बड़ा शिकार छोटे दुकानदार हुए हैं। आम दिनों में 800 से 1800 रुपए के बीच मिलने वाले एलपीजी सिलेंडर की कीमत ब्लैक मार्केट में आसमान छू रही है। सराफा में पनीर टिक्का बेचने वाले अखिलेश ने बताया कि ब्लैक में एक सिलेंडर 5000 रुपए तक में बिक रहा है। उन्होंने कहा, “इतने महंगे सिलेंडर से दुकान चलाना संभव नहीं है। हमें मजबूरी में इंडक्शन और कोयले पर शिफ्ट होना पड़ रहा है।”
कोयला भी हुआ महंगा, बढ़ेगी मिठाई की कीमत
गैस की जगह कोयले का सहारा लेना भी व्यापारियों के लिए राहत भरा नहीं है। सराफा बाजार में पिछले 40 सालों से मिठाई की दुकान लगाने वाले धर्मेंद्र यादव बताते हैं कि कोयला भी गैस से कम महंगा नहीं है। उन्होंने कहा, “कोयला 60 रुपए किलो मिल रहा है। लगातार भट्टियां चलाने से खर्च बहुत बढ़ गया है। अगर हालात ऐसे ही रहे, तो मिठाइयों की लागत बढ़ानी पड़ेगी।” उनके पास अभी रिजर्व सिलेंडर था, लेकिन वह भी खत्म होने की कगार पर है। अगर अगले 24 घंटे में सिलेंडर नहीं मिला, तो उन्हें अपनी दुकान बंद करनी पड़ेगी।
तीन दिन से बंद थी जलेबी की मशहूर दुकान
इंदौर सराफा चौपाटी गैस संकट का असर यहां की मशहूर जलेबी वालों पर भी पड़ा है। 21 सालों से यहां बड़ी जलेबी की दुकान लगाने वाले प्रवीण ने बताया कि पिछले तीन दिनों से उनकी दुकान बंद थी। आखिरकार कहीं से जुगाड़ कर 2 किलो का छोटा सिलेंडर मिला, जिससे दुकान खुल पाई। प्रवीण ने बताया, “अगर फिर सिलेंडर नहीं मिला तो दुकान फिर से बंद करनी पड़ेगी। घर पर भी हम लकड़ी के चूल्हे पर खाना बना रहे हैं ताकि गैस दुकान के लिए बचा सकें।”
बिजली की ओर रुख: इंडक्शन और इलेक्ट्रिक चूल्हे पर निर्भरता
इस लगातार बने रहने वाले संकट से निजात पाने के लिए सराफा व्यापारी अब स्थायी समाधान की तलाश में हैं। सराफा व्यापारी चाट चौपाटी एसोसिएशन अब पारंपरिक गैस चूल्हों की जगह बड़े इलेक्ट्रिक चूल्हों और इंडक्शन पर शिफ्ट होने पर विचार कर रहा है। एसोसिएशन का मानना है कि इससे दो फायदे होंगे। एक तो भविष्य में होने वाले गैस संकट से निजात मिल जाएगी, दूसरे लंबे समय में बिजली से परिचालन करना व्यापारियों के लिए सस्ता भी पड़ सकता है।
व्यापारियों की मजबूरी: बंद दुकान या महंगा कोयला
इंदौर सराफा चौपाटी गैस संकट ने व्यापारियों के सामने दो कठिन विकल्प खड़े कर दिए हैं। या तो वे दुकान बंद कर दें, या फिर महंगे कोयले से काम चलाकर उत्पादों की कीमतें बढ़ा दें। दोनों ही स्थितियां अंतिम उपभोक्ता यानी ग्राहकों को नुकसान पहुंचाएंगी। अगर दुकानें बंद होंगी तो सराफा की रौनक कम हो जाएगी, और अगर कीमतें बढ़ेंगी तो आम आदमी की जेब पर असर पड़ेगा।
निष्कर्ष
हालांकि प्रशासन का दावा है कि एलपीजी की आपूर्ति सामान्य हो रही है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि इंदौर सराफा चौपाटी गैस संकट अभी खत्म नहीं हुआ है। जब तक सप्लाई चेन पूरी तरह से बहाल नहीं हो जाती और ब्लैक मार्केटिंग पर लगाम नहीं लग जाती, तब तक यहां के व्यापारी और उनके ग्राहक मुश्किलों का सामना करते रहेंगे। फिलहाल, यहां की चाट और मिठाई का स्वाद लेने आने वाले लोगों को भी इसका खामियाजा भुगतना पड़ सकता है, क्योंकि महंगी होती लागत का बोझ आखिरकार उन्हीं पर आकर गिरेगा।
