Jabalpur LPG Cylinder Crisis के कारण हॉस्टलों में रहने वाले छात्रों की रसोई बंद हो गई है। रेस्टोरेंट के बढ़ते दाम और गैस की कमी से एग्जाम के बीच छात्रों को भोजन संकट का सामना करना पड़ रहा है।
जबलपुर LPG सिलेंडर संकट: हॉस्टलों में ठंडी हुई रसोई, रेस्टोरेंट महंगे, एग्जाम के बीच भोजन के लिए परेशान छात्र
Jabalpur LPG Cylinder Crisis क्या है
मध्यप्रदेश के जबलपुर शहर में इन दिनों LPG सिलेंडर की भारी किल्लत देखने को मिल रही है। यह संकट सिर्फ घरों तक सीमित नहीं है बल्कि इसका सबसे ज्यादा असर उन छात्रों पर पड़ रहा है जो शहर के प्राइवेट हॉस्टलों में रहकर पढ़ाई कर रहे हैं।Jabalpur LPG Cylinder Crisis के चलते हॉस्टलों की रसोई ठंडी पड़ चुकी है। कई हॉस्टलों में कमर्शियल गैस सिलेंडर खत्म हो चुके हैं और नए सिलेंडर के लिए लंबी वेटिंग के बावजूद नंबर नहीं आ रहा है।परिणाम यह है कि छात्रों को खाने के लिए बाहर के रेस्टोरेंट का सहारा लेना पड़ रहा है, लेकिन वहां भी स्थिति सामान्य नहीं है।
हॉस्टलों में छात्रों की रसोई क्यों बंद हुई
जबलपुर के कई प्राइवेट हॉस्टलों में खाना बनाने के लिए कमर्शियल LPG सिलेंडर का इस्तेमाल किया जाता है। लेकिन गैस की कमी के कारण इन हॉस्टलों में सिलेंडर खत्म हो चुके हैं।छात्रा करिश्मा ठाकुर बताती हैं कि वह अपने हॉस्टल में 5 किलो के सिलेंडर का इस्तेमाल करती थीं। लेकिन अब गैस खत्म हो चुकी है और नया सिलेंडर लेने के लिए कई दिनों से इंतजार करना पड़ रहा है।
उनका कहना है कि
“हमने कई बार सिलेंडर के लिए नंबर लगाया लेकिन अभी तक गैस नहीं मिली। मजबूरी में बाहर जाकर स्नैक्स खाना पड़ रहा है।”
समस्या यह भी है कि कई हॉस्टलों में इंडक्शन चूल्हे की अनुमति नहीं है, जिससे छात्रों के पास खाना बनाने का दूसरा विकल्प भी नहीं बचा है।
रेस्टोरेंट और ढाबों पर भी पड़ा LPG संकट का असर
Jabalpur LPG Cylinder Crisis का असर अब शहर के रेस्टोरेंट और ढाबों पर भी दिखाई देने लगा है।कमर्शियल गैस सिलेंडर की कमी के कारण कई छोटे रेस्टोरेंट बंद होने की कगार पर पहुंच गए हैं। वहीं जो रेस्टोरेंट अभी खुले हैं उन्होंने खाने के दाम बढ़ा दिए हैं।कई जगहों पर खाना बनाने के लिए इंडक्शन और इलेक्ट्रिक उपकरणों का इस्तेमाल किया जा रहा है। लेकिन इससे केवल सीमित भोजन जैसे स्नैक्स ही तैयार किए जा रहे हैं।
छात्रों का कहना है कि
- पहले जहां ₹60–₹70 में खाना मिल जाता था
- अब वही भोजन ₹120–₹150 तक पहुंच गया है
जो छात्रों के लिए काफी महंगा साबित हो रहा है।
छात्रों की परेशानी और बढ़ती चिंता
हॉस्टल में रहने वाली छात्रा विद्या खटीक बताती हैं कि उन्होंने इससे पहले ऐसी स्थिति कभी नहीं देखी।
उनका कहना है कि
“नोटबंदी और कोरोना के समय भी लंबी लाइनें देखी थीं, लेकिन उस समय खाने की कमी नहीं थी। आज खाना है लेकिन गैस नहीं है।”
उन्होंने बताया कि जिस रेस्टोरेंट में वे खाना खाने जाती हैं वहां भी अब सिर्फ स्नैक्स मिल रहे हैं क्योंकि गैस नहीं है।छात्रों का कहना है कि वे घर भी नहीं जा सकते क्योंकि कई जिलों में गैस की स्थिति लगभग यही है।
एग्जाम के समय बढ़ी मुश्किलें
यह संकट ऐसे समय में सामने आया है जब अधिकांश छात्रों के एग्जाम नजदीक हैं।छात्रा सृष्टि पांडे बताती हैं कि वे कई दिनों से बची हुई गैस को बहुत संभालकर इस्तेमाल कर रही थीं, लेकिन अब वह भी खत्म हो चुकी है।
उनका कहना है
“हमारे पास सीमित पैसे होते हैं जो घर से मिलते हैं। रोज रेस्टोरेंट में खाना खाना बहुत महंगा पड़ रहा है।”
छात्रों के माता-पिता भी लगातार फोन कर चिंता जता रहे हैं और घर आने के लिए कह रहे हैं, लेकिन एग्जाम के कारण छात्र वापस नहीं जा पा रहे।
प्रशासन से राहत की उम्मीद
Jabalpur LPG Cylinder Crisis को लेकर अब शहर में चर्चा तेज हो गई है।छात्रों और हॉस्टल संचालकों का कहना है कि प्रशासन को जल्द से जल्द गैस सप्लाई की व्यवस्था करनी चाहिए ताकि स्थिति सामान्य हो सके।
यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो इसका असर
- छात्रों की पढ़ाई
- हॉस्टल व्यवस्था
- शहर के रेस्टोरेंट कारोबार
तीनों पर पड़ सकता है।छात्रों की मांग है कि कम से कम एग्जाम के समय गैस की विशेष सप्लाई सुनिश्चित की जाए ताकि उन्हें भोजन की समस्या से जूझना न पड़े।
