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Iran का नया सुप्रीम लीडर: मोज़्तबा खामेनेई को मिली सर्वोच्च सत्ता, उठ रहे सवाल

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Published On: 4 March 2026
Iran
— ईरान का नया सुप्रीम लीडर: मोज़्तबा खामेनेई को मिली सर्वोच्च सत्ता

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Iran का नया सुप्रीम लीडर: मोज़्तबा खामेनेई को मिली सर्वोच्च सत्ता, उठ रहे सवाल

Iran के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के निधन के बाद देश ने अपना नया सुप्रीम लीडर चुन लिया है। अंतरराष्ट्रीय मीडिया और Iran इंटरनेशनल की रिपोर्ट के अनुसार, अयातुल्ला खामेनेई के बेटे मोज़्तबा अली खामेनेई को ईरान के नए सुप्रीम लीडर के रूप में चुना गया है। यह चयन ईरान में सत्ता की दिशा और भविष्य की नीति निर्धारण के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

सुप्रीम लीडर का पद खाली होने का कारण

हाल ही में इजरायल और अमेरिका द्वारा किए गए हवाई हमलों में ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की मौत की खबर आई थी। उनके निधन के बाद यह पद खाली हो गया और देश की सर्वोच्च राजनीतिक व धार्मिक सत्ता के भविष्य पर गंभीर ध्यान केंद्रित हो गया। ईरान में सुप्रीम लीडर की भूमिका केवल धार्मिक नहीं है, बल्कि देश की सैन्य, राजनीतिक और अंतरराष्ट्रीय नीतियों पर भी गहरा प्रभाव डालती है। ऐसे में नए नेता का चयन न केवल आंतरिक राजनीति बल्कि वैश्विक परिदृश्य के लिए भी अहम माना जा रहा है।

मोज़्तबा खामेनेई की नियुक्ति

Iran में सुप्रीम लीडर का चयन करने वाली 80 विद्वानों की समिति ने मोज़्तबा खामेनेई के नाम पर मुहर लगा दी है। मोज़्तबा अली खामेनेई इस पद पर पिता की जगह लेंगे और उन्हें ईरान की सर्वोच्च धार्मिक और राजनीतिक शक्ति का अधिकार मिलेगा। उनके चयन से यह संकेत मिलता है कि ईरान में वंशवाद की राजनीति एक बार फिर सामने आ रही है, क्योंकि मोज़्तबा का नाम पहले से सूचीबद्ध उत्तराधिकारियों में नहीं था।

फैसले पर उठ रहे सवाल

मोज़्तबा खामेनेई के चयन को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। बताया जा रहा है कि इस निर्णय में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) का बड़ा दबाव था। IRGC ईरान की सैन्य और राजनीतिक प्रणाली में बेहद प्रभावशाली संगठन है और इसकी भूमिका इस प्रकार के निर्णयों में अक्सर निर्णायक साबित होती रही है।

विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान की इस्लामिक रिपब्लिक लंबे समय से वंशवादी राजनीति की आलोचना करती रही है और खुद को न्यायसंगत और धर्मनिरपेक्ष प्रणाली बताती है। ऐसे में पिता से बेटे को सत्ता हस्तांतरण करना परंपरागत राजनीति की दृष्टि से विवादास्पद माना जा रहा है।

उत्तराधिकारियों की सूची में मोज़्तबा का नाम नहीं

मोज़्तबा खामेनेई के चयन को और अधिक विवादास्पद बनाने वाला तथ्य यह है कि पिछले साल अली खामेनेई ने संभावित उत्तराधिकारियों की जो सूची तैयार की थी, उसमें मोज़्तबा का नाम शामिल नहीं था। इस परंपरा के अनुसार, सुप्रीम लीडर के निधन या पद खाली होने पर संभावित उत्तराधिकारी की सूची के आधार पर चयन होना चाहिए।

शिया मुस्लिम धर्मगुरुओं और विद्वानों के बीच भी इस फैसले को लेकर चर्चा चल रही है। कई विद्वान इसे पारंपरिक धर्मशास्त्रीय प्रक्रिया का उल्लंघन मान रहे हैं। हालांकि समिति ने इसे औपचारिक रूप से वैध माना है।

मोज़्तबा खामेनेई का राजनीतिक और धार्मिक अनुभव

मोज़्तबा खामेनेई Iran के राजनीतिक और धार्मिक परिदृश्य में लंबे समय से सक्रिय हैं। उन्हें ईरानी राजनीतिक परिवार और धार्मिक संरचना का गहरा अनुभव है। उनके पिता अली खामेनेई ने उन्हें कई महत्वपूर्ण धार्मिक और राजनीतिक मामलों में प्रशिक्षित किया था।

विशेषज्ञों का मानना है कि मोज़्तबा खामेनेई की नियुक्ति से ईरान की विदेश नीति और सैन्य नीतियों में निरंतरता बनी रहेगी, विशेषकर अमेरिका और इजरायल के साथ संबंधों के संदर्भ में।

वैश्विक प्रतिक्रिया

मोज़्तबा खामेनेई के चुनाव के बाद अंतरराष्ट्रीय समुदाय की निगाहें ईरान की नीतियों और क्षेत्रीय स्थिरता पर हैं। अमेरिका, इजरायल और अन्य पश्चिमी देशों ने अभी तक औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन विश्लेषकों का कहना है कि यह नियुक्ति मध्य पूर्व की राजनीतिक स्थिति और सुरक्षा मामलों पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकती है।

आंतरिक राजनीतिक चुनौतियां

Iran के भीतर इस नियुक्ति के कई राजनीतिक और सामाजिक प्रभाव होंगे। वंशवादी राजनीति की वापसी और IRGC की भूमिका को लेकर आंतरिक आलोचनाएं बढ़ सकती हैं। इसके साथ ही धर्मगुरुओं और विद्वानों के बीच भी सत्ता हस्तांतरण को लेकर मतभेद बने रहने की संभावना है।

विशेषज्ञों का कहना है कि मोज़्तबा खामेनेई को अब न केवल राजनीतिक और सैन्य निर्णय लेने होंगे, बल्कि धार्मिक और सामाजिक नेतृत्व भी निभाना होगा। उनकी रणनीति और निर्णय अगले कुछ महीनों में देश की दिशा और वैश्विक नीतियों को प्रभावित कर सकते हैं।

निष्कर्ष

मोज़्तबा खामेनेई का Iran का सुप्रीम लीडर बनना न केवल देश के आंतरिक राजनीतिक ढांचे के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह क्षेत्रीय और वैश्विक राजनीति पर भी प्रभाव डाल सकता है। उनके चयन को लेकर सवाल उठ रहे हैं, लेकिन यह स्पष्ट है कि अब ईरान की सर्वोच्च सत्ता उनके हाथों में है और आने वाले समय में उनके निर्णय देश और क्षेत्र की दिशा तय करेंगे।

 

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