CM निवास पर भव्य होलिका दहन, गौ-काष्ठ का हुआ उपयोग
भोपाल: होली का पर्व न केवल रंगों और उल्लास का प्रतीक है, बल्कि यह भाईचारे, प्रेम और सामाजिक समरसता का संदेश भी देता है। इस पावन अवसर पर मध्य प्रदेश के CM डॉ. मोहन यादव ने सोमवार को मुख्यमंत्री निवास पर भव्य होलिका दहन का आयोजन किया। यह आयोजन पारंपरिक वैदिक मंत्रोच्चार और विधिपूर्वक पूजा-अर्चना के साथ संपन्न हुआ।
गौ-काष्ठ का विशेष उपयोग
इस वर्ष होलिका दहन में गौ-काष्ठ का विशेष उपयोग किया गया। गौ-काष्ठ का प्रयोग धार्मिक अनुष्ठानों में प्राचीन काल से होता आ रहा है। यह न केवल पारंपरिक महत्व रखता है, बल्कि पर्यावरण के दृष्टिकोण से भी अधिक सुरक्षित माना जाता है। मुख्यमंत्री निवास पर आयोजित इस कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने इस पहल की जमकर सराहना की।
गौ-काष्ठ का उपयोग होलिका दहन में धुआँ कम करने और प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण सुनिश्चित करने के लिए किया गया। यह पहल राज्य में होली जैसे पर्वों को पारंपरिक, सुरक्षित और पर्यावरण के अनुकूल बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
सपत्नीक पूजा-अर्चना के साथ आयोजन
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने होलिका दहन से पहले सप्तपर्ण पूजा-अर्चना की। मंत्रोच्चार और पारंपरिक अनुष्ठानों के साथ होलिका को अग्नि में समर्पित किया गया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री की धर्मपत्नी मती सीमा यादव, परिवारजन और म.प्र. हिंदी ग्रंथ अकादमी के निदेशक अशोक कड़ेल भी उपस्थित रहे।
पूजा-अर्चना और मंत्रोच्चार के दौरान उपस्थित लोग उत्साह और श्रद्धा के साथ इस कार्यक्रम में शामिल हुए। मुख्यमंत्री ने कहा कि होली का पर्व केवल रंगों और उत्सव का प्रतीक नहीं है, बल्कि यह हमें आपसी मतभेद भुलाकर एकजुट रहने की सीख भी देता है।
अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए विशेष पहल
मुख्यमंत्री निवास में पदस्थ सभी अधिकारियों, कर्मचारियों और सुरक्षाकर्मियों को भी होली की बधाई दी गई। डॉ. यादव ने उन्हें गुझिया वितरण कर पर्व की मिठास साझा की। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि होली का पर्व हम सभी के लिए प्रेम, सौहार्द और भाईचारे का संदेश लेकर आता है।
उन्होंने सभी से आग्रह किया कि वे अपने मतभेद भूलकर प्रेम और सद्भाव के साथ होली और रंगपंचमी तक यह पर्व मनाएं। उनका यह संदेश न केवल व्यक्तिगत जीवन में प्रेम और समरसता बनाए रखने का है, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक स्तर पर भी एकजुटता को बढ़ावा देने वाला है।
पर्यावरण और संस्कृति का संगम
मुख्यमंत्री निवास पर होलिका दहन में गौ-काष्ठ का उपयोग धार्मिक महत्व के साथ-साथ पर्यावरण के दृष्टिकोण से भी सराहनीय रहा। प्राकृतिक सामग्री से होलिका दहन करने पर धुआँ कम होता है और प्रदूषण में भी कमी आती है। यह कदम मध्य प्रदेश में पारंपरिक और टिकाऊ पर्वों की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है।
इस अवसर पर उपस्थित गणमान्य नागरिकों ने भी कार्यक्रम में भाग लेकर परंपरा और संस्कृति को बनाए रखने का संदेश दिया। इससे यह स्पष्ट हुआ कि राज्य में सांस्कृतिक आयोजनों को केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि सामाजिक और धार्मिक चेतना बढ़ाने का माध्यम भी माना जाता है।
होली का सामाजिक और सांस्कृतिक संदेश
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि होली केवल रंगों और गीत-संगीत का पर्व नहीं है। यह सामाजिक समरसता, भाईचारा और प्रेम का प्रतीक है। उन्होंने उपस्थित लोगों से कहा कि हम सभी को अपने मतभेद भूलकर होली का पर्व प्रेम और सौहार्द के साथ मनाना चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि होली हमें याद दिलाती है कि आपसी प्रेम और सहयोग से समाज में शांति और एकता बनी रहती है। इस अवसर पर उपस्थित सभी लोग इस संदेश से प्रेरित हुए और उन्होंने अपने व्यक्तिगत जीवन में इसे अपनाने का संकल्प लिया।
कार्यक्रम में सांस्कृतिक गतिविधियां
मुख्यमंत्री निवास पर होलिका दहन के बाद सांस्कृतिक गतिविधियां भी आयोजित की गईं। पारंपरिक गीत, संगीत और नृत्य के माध्यम से इस पर्व की महत्ता को और अधिक जीवंत रूप में प्रस्तुत किया गया। उपस्थित गणमान्य नागरिकों और कर्मचारियों ने उत्साहपूर्वक कार्यक्रम में भाग लिया।
इस प्रकार का आयोजन न केवल धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण था, बल्कि यह सामाजिक समरसता और भाईचारे को बढ़ावा देने का कार्य भी कर रहा था।
प्रदेशवासियों के लिए संदेश
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेशवासियों को रंग और उल्लास के पर्व की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि होली का पर्व हमें यह सीख देता है कि हम अपने मतभेदों को भूलकर एक-दूसरे के साथ प्रेमपूर्वक और सौहार्दपूर्ण व्यवहार करें।
डॉ. यादव ने सभी से अनुरोध किया कि वे होली से लेकर रंगपंचमी तक अपने घरों, मोहल्लों और समाज में प्रेम, भाईचारा और सकारात्मक ऊर्जा फैलाने का प्रयास करें।
निष्कर्ष
मुख्यमंत्री निवास पर होलिका दहन का यह भव्य आयोजन धार्मिक, सांस्कृतिक और पर्यावरणीय दृष्टि से महत्वपूर्ण रहा। गौ-काष्ठ का उपयोग, सपत्नीक पूजा-अर्चना और उपस्थित गणमान्य नागरिकों की भागीदारी ने इसे और भी भव्य और यादगार बना दिया।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेशवासियों को होली और रंगपंचमी की मंगलकामनाएं दीं और सभी से आग्रह किया कि वे प्रेम, भाईचारे और सौहार्द के साथ इस पावन पर्व को मनाएं। इस प्रकार का आयोजन न केवल धार्मिक परंपरा का पालन करता है, बल्कि समाज में भाईचारे और प्रेम का संदेश भी फैलाता है।
इस आयोजन ने स्पष्ट किया कि मध्य प्रदेश में सांस्कृतिक और सामाजिक गतिविधियों के माध्यम से समाज में एकजुटता और प्रेम की भावना को बढ़ावा दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री निवास पर होली का यह पर्व राज्यवासियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गया है, जो आने वाले वर्षों में भी इसी तरह भव्य रूप में मनाया जाएगा।
