—Advertisement—

AI समिट शर्टलेस प्रोटेस्ट केस में उदय भानु चिब को जमानत, कांग्रेस को राहत

Author Picture
Published On: 28 February 2026
AI Summit Protest Case: Court Rejects Police Plea for Extended Remand, Chib Gets Bail
— AI Summit Protest Case: Court Rejects Police Plea for Extended Remand, Chib Gets Bail

—Advertisement—

AI समिट शर्टलेस प्रोटेस्ट केस: उदय भानु चिब को जमानत, कांग्रेस को बड़ी राहत

दिल्ली में आयोजित AI समिट के दौरान हुए शर्टलेस विरोध प्रदर्शन मामले में बड़ा कानूनी घटनाक्रम सामने आया है। इस मामले में उदय भानु चिब को पटियाला हाउस कोर्ट से जमानत मिल गई है। अदालत ने उन्हें 50 हजार रुपये के निजी मुचलके पर रिहा करने का आदेश दिया। इस फैसले को कांग्रेस के लिए महत्वपूर्ण राहत माना जा रहा है, क्योंकि गिरफ्तारी के बाद से ही पार्टी इसे राजनीतिक और असंवैधानिक कार्रवाई बता रही थी।

क्या है पूरा मामला?

दिल्ली में आयोजित एआई समिट के दौरान भारत मंडपम परिसर में इंडियन यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ताओं द्वारा विरोध प्रदर्शन किया गया था। बताया गया कि प्रदर्शन के दौरान कुछ कार्यकर्ताओं ने शर्टलेस होकर नारेबाजी की और सरकार के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराया। इसी दौरान माहौल तनावपूर्ण हो गया और पुलिस ने हस्तक्षेप करते हुए कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया।

इस कार्रवाई के तहत इंडियन यूथ कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय भानु चिब को भी गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने उन पर कानून-व्यवस्था भंग करने और अनुमति के बिना विरोध प्रदर्शन करने जैसे आरोप लगाए थे।

रिमांड बढ़ाने की मांग

गिरफ्तारी के बाद दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने अदालत में पेशी के दौरान उदय भानु चिब की पुलिस कस्टडी रिमांड सात दिन और बढ़ाने की मांग की थी। पुलिस का तर्क था कि मामले की गहराई से जांच के लिए हिरासत आवश्यक है और अन्य आरोपियों से आमने-सामने पूछताछ करनी है।

इसके अलावा, मामले में शामिल दो अन्य आरोपियों की रिमांड के लिए भी अलग-अलग आवेदन दायर किए गए थे। पुलिस ने दावा किया कि प्रदर्शन की योजना और उसके पीछे की रणनीति को समझने के लिए अतिरिक्त समय जरूरी है।

कोर्ट का फैसला

पटियाला हाउस कोर्ट के ड्यूटी मजिस्ट्रेट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अपना आदेश सुनाया। अदालत ने पाया कि क्राइम ब्रांच रिमांड बढ़ाने के लिए पर्याप्त और ठोस कारण प्रस्तुत नहीं कर पाई। इसी आधार पर अदालत ने उदय भानु चिब को जमानत दे दी।

कोर्ट ने 50 हजार रुपये के निजी मुचलके पर जमानत मंजूर की। हालांकि, अदालत ने जांच प्रक्रिया को प्रभावित होने से रोकने के लिए कुछ शर्तें भी लगाईं।

जमानत की शर्तें

अदालत ने अपने आदेश में कहा कि उदय भानु चिब को अपना पासपोर्ट अदालत में जमा कराना होगा। साथ ही, उन्हें अपने इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स भी कोर्ट के समक्ष सरेंडर करने होंगे। इन शर्तों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आरोपी जांच में सहयोग करें और साक्ष्यों से छेड़छाड़ न हो।

यह भी स्पष्ट किया गया कि यदि जमानत की शर्तों का उल्लंघन होता है, तो जमानत रद्द की जा सकती है।

राजनीतिक प्रतिक्रियाएं

इस मामले ने राजनीतिक गलियारों में भी हलचल मचा दी थी। भारतीय जनता पार्टी ने एआई समिट के दौरान हुए विरोध प्रदर्शन की कड़ी आलोचना की थी। पार्टी नेताओं ने इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर के कार्यक्रम की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाला कदम बताया था और कांग्रेस पर राजनीतिक स्टंट करने का आरोप लगाया था।

वहीं दूसरी ओर इंडियन यूथ कांग्रेस और कांग्रेस नेतृत्व ने गिरफ्तारी को असंवैधानिक बताया। कांग्रेस ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बयान जारी कर कहा कि देश का संविधान हर नागरिक को शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार देता है। पार्टी का कहना था कि इस तरह की गिरफ्तारी लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन है।

कांग्रेस का पक्ष

कांग्रेस ने कहा कि युवा नेताओं की आवाज दबाने की कोशिश की जा रही है। पार्टी का आरोप था कि विरोध प्रदर्शन लोकतांत्रिक ढांचे का हिस्सा है और इसे अपराध की तरह पेश करना उचित नहीं है।

कांग्रेस नेताओं ने यह भी कहा कि वे जनहित के मुद्दों को उठाते रहेंगे और इस तरह की कार्रवाई से डरने वाले नहीं हैं। पार्टी के मुताबिक, यह मामला राजनीतिक प्रतिशोध की भावना से प्रेरित है।

कानून और विरोध का अधिकार

यह मामला एक बार फिर इस बहस को सामने लाता है कि विरोध प्रदर्शन की सीमा क्या होनी चाहिए और कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी कैसे संतुलित की जाए। एक ओर सरकार और प्रशासन का तर्क है कि सार्वजनिक कार्यक्रमों की सुरक्षा और व्यवस्था सर्वोपरि है, वहीं विपक्ष का कहना है कि लोकतंत्र में असहमति व्यक्त करना मूल अधिकार है।

अदालत का यह फैसला फिलहाल उदय भानु चिब के लिए राहत भरा है, लेकिन कानूनी प्रक्रिया अभी समाप्त नहीं हुई है। जांच जारी रहेगी और आने वाले समय में मामले में और कानूनी कदम उठाए जा सकते हैं।

आगे की स्थिति

जमानत मिलने के बाद अब उदय भानु चिब को जांच में सहयोग करना होगा। क्राइम ब्रांच इस मामले से जुड़े अन्य पहलुओं की भी जांच कर रही है, जिसमें प्रदर्शन की योजना, आयोजकों की भूमिका और सुरक्षा प्रोटोकॉल के उल्लंघन जैसे मुद्दे शामिल हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मामला आने वाले दिनों में भी राजनीतिक विमर्श का हिस्सा बना रहेगा। एक तरफ कानून व्यवस्था और सुरक्षा का सवाल है, तो दूसरी ओर लोकतांत्रिक अधिकारों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का मुद्दा है।

निष्कर्ष

एआई समिट शर्टलेस प्रोटेस्ट केस में पटियाला हाउस कोर्ट से जमानत मिलना कांग्रेस और इंडियन यूथ कांग्रेस के लिए राहत भरा कदम माना जा रहा है। हालांकि, मामला अभी न्यायिक प्रक्रिया में है और अंतिम निर्णय आगे की सुनवाई और जांच पर निर्भर करेगा।

इस घटनाक्रम ने एक बार फिर लोकतंत्र में विरोध की भूमिका, कानून के दायरे और राजनीतिक टकराव पर व्यापक चर्चा को जन्म दिया है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है और अदालत में इस मामले का अंतिम परिणाम क्या रहता है।

कुमकुम सोनी स्वराज वाणी न्यूज मे कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है। इन्होंने स्नातक पत्रकारिता एवं जनसंचार से की है। यह विशेषतः राजनीति एवं भू-राजनीति से जुड़े मुद्दों का गहन विशलेषण कर सरल भाषा में आम जनता के समक्ष प्रस्तुत करने का प्रयास करती है।… Read More

Related News
Breaking News हमेशा आपके पास

SwarajVani App Install करें

Latest India News & Breaking Updates — सीधे Home Screen पर

Offline पढ़ें Breaking Alerts बिल्कुल Free
SwarajVani को iPhone पर install करें:
📤 Share बटन दबाएं → "Add to Home Screen" select करें
Home
Web Stories
Instagram
WhatsApp