33वां आईएमए इंटरनेशनल मैनेजमेंट कॉन्क्लेव 2026: स्वदेशी नवाचार और स्टार्टअप संवर्धन पर जोर
Indore । 33वें आईएमए इंटरनेशनल मैनेजमेंट कॉन्क्लेव 2026 का आयोजन शहर में बड़े उत्साह और व्यापक सहभागिता के साथ हुआ। कॉन्क्लेव का मुख्य विषय इस वर्ष “इननोवेटिंग इंडिया: स्वदेशी, स्वाभाविक, स्वनिर्मित” रखा गया। दूसरे दिन स्टार्टअप संवर्धन कार्यक्रम की सफलता के बाद मुख्य सत्र आयोजित किए गए। कार्यक्रम की शुरुआत शास्त्रीय संगीत की प्रस्तुति से हुई, जिसने उपस्थित लोगों का मन मोह लिया। आईएमए के अध्यक्ष नवीन खंडेलवाल ने स्वागत भाषण में कहा कि स्वदेशी और नवाचार का संयोजन ही भारत को वैश्विक स्तर पर अग्रणी बना सकता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत को अपनी जड़ों से जुड़े रहकर और भारतीय मूल्यों को ध्यान में रखते हुए विकास करना चाहिए।
डॉ. निरंजन हिरानंदानी को लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड
कॉन्क्लेव के दौरान रियल एस्टेट क्षेत्र में अतुलनीय योगदान के लिए डॉ. निरंजन हिरानंदानी को आईएमए लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। उन्होंने कहा कि सफलता व्यक्तिगत प्रयास का परिणाम नहीं, बल्कि सामूहिक प्रयासों का परिणाम होती है। डॉ. हिरानंदानी ने प्रतिदिन एक प्रतिशत सुधार के मंत्र को साझा करते हुए नैतिक नेतृत्व और सतत सुधार की आवश्यकता पर जोर दिया। उनके अनुसार, नेतृत्व केवल पद और सत्ता का नाम नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की क्षमता है।
वैश्विक अनिश्चितताओं में भारत के लिए अवसर
उद्घाटन सत्र में आईआईएम इंदौर के निदेशक डॉ. हिमांशु राय ने वर्तमान वैश्विक अनिश्चितताओं के संदर्भ में साहस, अनुकूलन क्षमता और त्वरित निर्णय लेने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि उद्योग और शिक्षा जगत के बीच बेहतर तालमेल भारत की प्रगति के लिए अनिवार्य है। फोर्स मोटर्स के चेयरमैन डॉ. अभय फिरोदिया ने भारतीय मूल्यों पर आधारित सामाजिक व्यवस्था की महत्ता बताई और कहा कि आधुनिकता के साथ सांस्कृतिक पहचान का संरक्षण भी आवश्यक है।
भारत जुगाड़ से आगे बढ़कर विश्वस्तरीय नवाचार कर रहा
कूलिंग इंडिया, पावरिंग इंडिया, कनेक्टिंग इंडिया सत्र में वोल्टास लिमिटेड के प्रबंध निदेशक मुकुंदन मेनन ने कहा कि भारत अब केवल जुगाड़ आधारित समाधान नहीं बल्कि विश्वस्तरीय नवाचार कर रहा है। उन्होंने नए उद्योग और तकनीकी नवाचार के लिए टियर-2 और टियर-3 शहरों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।
टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स के मुरली रंगनाथन ने डेटा सेंटर्स की आवश्यकता और टियर-2 शहरों में इसके विकास की भूमिका पर जोर दिया।
सिफी टेक्नोलॉजीज के शरद अग्रवाल ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के प्रभावी कार्यान्वयन और इसके लिए आवश्यक बुनियादी ढांचे पर विस्तृत विचार साझा किए।
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गुणवत्ता और ब्रांडिंग का महत्व
टर्निंग ट्रेडिशन्स इंटू ब्रांड्स सत्र में कैफे नीलोफर के शशांक अनुमुला और निलॉन्स के दीपक संघवी ने कहा कि किसी पारंपरिक उत्पाद को बड़ा ब्रांड बनाने के लिए गुणवत्ता और उपभोक्ता के साथ भावनात्मक जुड़ाव आवश्यक है। उन्होंने बताया कि मजबूत नींव, निरंतरता और ग्राहक संतुष्टि व्यापार की सफलता का आधार हैं। इस सत्र ने भारतीय व्यवसायियों और स्टार्टअप्स के लिए पारंपरिक उत्पादों में नवाचार और ब्रांडिंग पर ध्यान देने का संदेश दिया।
विकसित भारत 2047 के लिए निर्यात और तकनीक
मनी इन मोशन सत्र में इलेक्ट्रम कैपिटल के तेजस गुटका ने कहा कि विनिर्माण और निर्यात में वृद्धि विकसित भारत 2047 के लिए आवश्यक है। भारत को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाए रखने के लिए निर्यात वृद्धि और तकनीकी नवाचार पर ध्यान देना होगा।
आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के रितेश गुप्ता ने बैंकिंग क्षेत्र में तकनीक और डिजिटल भुगतान की सुलभता पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि डिजिटल तकनीक बैंकिंग को सशक्त बनाने और वित्तीय समावेशन को बढ़ाने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है।
जीवन के अनुभव और नेतृत्व
स्व से स्व की बात सत्र में स्वानंद किरकिरे ने अपने जीवन के अनुभव और संघर्षों से सीख साझा की। उन्होंने कहा कि असफलताएं ही जीवन में आगे बढ़ने और सीखने की प्रेरणा देती हैं।
अतुल सत्य कौशिक ने भारतीय नेतृत्व की अवधारणा को नैतिक मूल्यों और कर्तव्य के साथ जोड़ते हुए कहा कि एक सच्चा नेता वही है जो समाज में नए नेतृत्व का निर्माण करे और नैतिक दिशा निर्देश का पालन करे।
एआई रोबोट ने खींचा ध्यान
कार्यक्रम में मुंबई की एक टेक कंपनी ने जापान से आए एआई रोबोट का प्रदर्शन किया। यह रोबोट छात्रों को AI के बारे में शिक्षा देने के लिए बुलाया गया था। इस तकनीकी प्रदर्शन ने उपस्थित छात्रों और प्रतिभागियों का ध्यान आकर्षित किया और उन्हें नवाचार के क्षेत्र में संभावनाओं से अवगत कराया।
अंतिम दिन और भविष्य की रूपरेखा
कॉन्क्लेव के अंतिम दिन, 28 फरवरी को आचार्य मनीष, अमन गुप्ता और सुहानी शाह जैसे प्रमुख वक्ता अपने विचार साझा करेंगे। इस आयोजन ने न केवल स्टार्टअप संवर्धन और नवाचार को बढ़ावा दिया, बल्कि भारतीय मूल्यों और तकनीकी प्रगति के बीच संतुलन पर भी प्रकाश डाला।
कुल मिलाकर, 33वां आईएमए कॉन्क्लेव 2026 भारत में नवाचार, स्टार्टअप संस्कृति, गुणवत्ता और नैतिक नेतृत्व को बढ़ावा देने में सफल रहा। कार्यक्रम ने यह स्पष्ट कर दिया कि भारतीय जड़ों से जुड़े रहकर और स्वदेशी नवाचार को अपनाकर देश वैश्विक स्तर पर नेतृत्व कर सकता है।

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