इंदौर IPO ठगी में टेलिकॉम वेंडर से 9.5 लाख की साइबर ठगी। फेसबुक लिंक और फर्जी ऐप के जरिए निवेश का झांसा। जानिए पूरी घटना, पुलिस कार्रवाई और बचाव के उपाय।
इंदौर IPO ठगी: फेसबुक लिंक से 9.5 लाख की साइबर ठगी का खुलासा
फेसबुक लिंक, व्हाट्सएप ग्रुप और फर्जी निवेश एप के जरिए रचा गया यह पूरा जाल साइबर अपराधियों की नई रणनीति को उजागर करता है।
क्या है इंदौर IPO ठगी मामला?
इंदौर IPO ठगी में सुदामा नगर निवासी नितेश पुत्र नंदकिशोर पोरवाल को निशाना बनाया गया। नितेश पेशे से टेलिकॉम वेंडर हैं।20 दिसंबर 2025 को उनके फेसबुक अकाउंट पर एक लिंक आई। लिंक पर क्लिक करते ही उन्हें निवेश से जुड़ा एक आकर्षक प्रस्ताव दिखाई दिया — दावा किया गया कि IPO में निवेश कर कुछ ही दिनों में कई गुना मुनाफा कमाया जा सकता है।यहीं से शुरू हुई इंदौर IPO ठगी की कहानी।
फेसबुक लिंक से कैसे फंसा पीड़ित?
फेसबुक लिंक पर क्लिक करने के बाद नितेश को एक व्हाट्सएप ग्रुप में जोड़ लिया गया।इस ग्रुप में कई अंतरराष्ट्रीय नंबर जुड़े थे, जिससे भरोसा और बढ़ा।ग्रुप में “मोहन पाटिल” नामक व्यक्ति रोज सुबह 9 बजे शेयर बाजार में निवेश की टिप्स देता था।इसके बाद एक एप इंस्टॉल करवाई गई, जिसमें IPO निवेश का डैशबोर्ड दिखता था।यह पूरी प्रक्रिया इंदौर IPO ठगी की सुनियोजित रणनीति का हिस्सा थी।
50 हजार से शुरुआत, 12 लाख तक पहुंचा निवेश
14 जनवरी को नितेश ने 50 हजार रुपये निवेश कर आईडी बनाई।शुरुआती रिटर्न दिखाकर भरोसा जीत लिया गया।इसके बाद 7 बार में कुल 12 लाख रुपये जमा करवा लिए गए।हालांकि नितेश ने 3 लाख रुपये निकाल भी लिए, जिससे उन्हें लगा कि प्लेटफॉर्म असली है।लेकिन साढ़े तीन लाख रुपये अटक गए और बाकी रकम भी फ्रीज हो गई।तभी उन्हें एहसास हुआ कि वे इंदौर IPO ठगी का शिकार हो चुके हैं।
इंटरनेट कॉलिंग से किया संपर्क
पुलिस के अनुसार आरोपियों ने इंटरनेट कॉलिंग का इस्तेमाल किया, जिससे उनकी लोकेशन ट्रेस करना मुश्किल हो जाता है।व्हाट्सएप कॉल और फर्जी एप के जरिए यह पूरा नेटवर्क संचालित किया गया।अन्नपूर्णा थाना प्रभारी अजय नायर के अनुसार साइबर सेल की मदद से जांच जारी है।
BSF एएसआई भी बने शिकार
इसी तरह का एक और मामला सामने आया, जिसमें सीमा सुरक्षा बल (BSF) के एएसआई शौकत खान से 1 लाख 60 हजार रुपये की धोखाधड़ी हुई।एरोड्रम थाना क्षेत्र में दर्ज इस केस में भी व्हाट्सएप कॉल के जरिए निवेश का झांसा दिया गया था।यह बताता है कि इंदौर IPO ठगी केवल आम नागरिक ही नहीं, बल्कि सुरक्षाबलों तक को निशाना बना रही है।
IPO निवेश ठगी कैसे काम करती है?
आजकल IPO निवेश का ट्रेंड बढ़ा है। इसी का फायदा उठाकर साइबर अपराधी:
- फर्जी ऐप बनाते हैं
- सोशल मीडिया विज्ञापन चलाते हैं
- व्हाट्सएप ग्रुप बनाते हैं
- शुरुआती फर्जी मुनाफा दिखाते हैं
- बड़ी रकम जमा करवाकर अकाउंट ब्लॉक कर देते हैं
असली IPO निवेश केवल अधिकृत प्लेटफॉर्म जैसे BSE और NSE के माध्यम से ही किया जा सकता है।
पुलिस की कार्रवाई
अन्नपूर्णा थाना पुलिस ने धारा 420 सहित आईटी एक्ट के तहत मामला दर्ज किया है।साइबर सेल बैंक खातों और कॉल रिकॉर्ड की जांच कर रही है।विशेषज्ञों का मानना है कि यह गिरोह अंतरराज्यीय या अंतरराष्ट्रीय हो सकता है।
कैसे बचें इंदौर IPO ठगी जैसी घटनाओं से?
- 1. अनजान लिंक पर क्लिक न करें
- 2. केवल अधिकृत ऐप का उपयोग करें
- 3. SEBI रजिस्टर्ड प्लेटफॉर्म पर ही निवेश करें
- 4. गारंटीड रिटर्न के दावे से सावधान रहें
- 5. साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत करें
विशेषज्ञों की राय
साइबर विशेषज्ञों के अनुसार:
- IPO में “डबल मुनाफा” जैसी कोई गारंटी नहीं होती
- असली ट्रेडिंग ऐप कभी व्हाट्सएप ग्रुप से लिंक नहीं होती
- निवेश से पहले कंपनी का SEBI रजिस्ट्रेशन जांचना जरूरी है
निष्कर्ष
इंदौर IPO ठगी का यह मामला एक गंभीर चेतावनी है।सिर्फ 50 हजार रुपये से शुरू हुआ निवेश 12 लाख तक पहुंच गया और अंततः साढ़े नौ लाख की ठगी में बदल गया।सोशल मीडिया के इस दौर में जागरूकता ही सबसे बड़ा हथियार है।यदि कोई भी प्लेटफॉर्म असामान्य मुनाफे का वादा करे, तो सतर्क हो जाएं।इंदौर की यह घटना बताती है कि साइबर अपराधी लगातार नए तरीके अपना रहे हैं।सवाल यह है — क्या हम पर्याप्त सतर्क हैं?

