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Indore में थाना प्रभारियों की ‘रैंकिंग परीक्षा’, विजयनगर टॉपर तो सेंट्रल कोतवाली फेल

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Published On: 26 February 2026
indore
— इंदौर में पुलिसिंग सुधार की नई पहल के तहत पुलिस कमिश्नर Santosh Kumar Singh ने थाना प्रभारियों की 100 अंकों की रैंकिंग परीक्षा ली। विजयनगर थाना बना टॉपर, जबकि सेंट्रल कोतवाली रहा फेल।

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Indore में थाना प्रभारियों की ‘रैंकिंग परीक्षा’, विजयनगर टॉपर तो सेंट्रल कोतवाली फेल

मध्य प्रदेश के Indore शहर में पुलिसिंग को अधिक जवाबदेह और प्रभावी बनाने के लिए एक अनोखी पहल की गई है। शहर के पुलिस कमिश्नर Santosh Kumar Singh ने थाना प्रभारियों की कार्यप्रणाली का मूल्यांकन करने के लिए 100 अंकों की एक विशेष ‘रैंकिंग परीक्षा’ शुरू की है। इस व्यवस्था के तहत शहर के सभी थानों का प्रदर्शन तय मानकों के आधार पर आंका जा रहा है। जनवरी माह के मूल्यांकन परिणाम जारी हो चुके हैं, जिनमें विजयनगर थाना पहले स्थान पर रहा, जबकि सेंट्रल कोतवाली थाना अंतिम पायदान पर पहुंच गया।

100 अंकों की परीक्षा, माइनस मार्किंग भी

पुलिस कमिश्नरेट प्रणाली के तहत Indore के 32 थानों का मूल्यांकन 20 अलग-अलग पैरामीटर पर किया गया। इस परीक्षा की खास बात यह है कि इसमें माइनस मार्किंग की व्यवस्था भी लागू की गई है। यानी यदि किसी आदतन अपराधी ने थाना क्षेत्र में गंभीर अपराध को अंजाम दिया, तो संबंधित थाने के अंकों में 50 तक की कटौती की जा सकती है।

सबसे अधिक अंक महिला एवं बाल अपराधों में बेहतर कार्रवाई, सीएम हेल्पलाइन की शिकायतों के त्वरित और संतोषजनक निराकरण, और कानून-व्यवस्था बनाए रखने जैसे बिंदुओं पर दिए गए। महिला सुरक्षा और सीएम हेल्पलाइन मामलों में अच्छे प्रदर्शन पर 15 अंक तक प्रदान किए गए।

विजयनगर बना टॉपर

जारी रैंकिंग सूची में 95 अंकों के साथ विजयनगर थाना प्रथम स्थान पर रहा। थाना प्रभारी चंद्रकांत पटेल के नेतृत्व में बेहतर अपराध नियंत्रण, शिकायतों का त्वरित निराकरण और सक्रिय पुलिसिंग के चलते यह थाना शीर्ष पर पहुंचा। दूसरे स्थान पर खजराना थाना रहा, जिसे 90 अंक प्राप्त हुए।

वहीं सेंट्रल कोतवाली थाना मात्र 15 अंक हासिल कर सबसे निचले पायदान पर रहा और उसे ‘फेल’ घोषित किया गया। इसके अलावा एमआईजी, छोटी ग्वालटोली और द्वारकापुरी थाने ग्रेस मार्क्स के सहारे पास हो सके।

किन आधारों पर हुआ मूल्यांकन?

थानों का मूल्यांकन जिन प्रमुख बिंदुओं पर किया गया, उनमें शामिल हैं:

  • महिला एवं बाल अपराधों में कार्रवाई
  • सीएम हेल्पलाइन शिकायतों का निस्तारण
  • मोहल्ला समिति की नियमित बैठक
  • आम जनता की शिकायतों का समाधान
  • सीसीटीएनएस रिकॉर्ड अपडेट
  • शराब की अवैध बिक्री पर कार्रवाई
  • चोरी का माल बरामदगी
  • लंबित वारंटों का निष्पादन
  • प्रीवेंटिव और प्रतिबंधात्मक कार्रवाई
  • कानून-व्यवस्था की स्थिति

इन सभी मानकों पर थानों के प्रदर्शन की समीक्षा कर अंक दिए गए। जहां अच्छे काम के लिए अंक बढ़े, वहीं लापरवाही या अपराध बढ़ने पर अंक घटाए गए।

क्यों शुरू की गई यह व्यवस्था?

पुलिस कमिश्नर संतोष कुमार सिंह का मानना है कि बेहतर पुलिसिंग के लिए जवाबदेही और पारदर्शिता जरूरी है। इसी सोच के तहत यह मूल्यांकन प्रणाली लागू की गई है। इसका उद्देश्य थानों की कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और परिणाम आधारित बनाना है।

इस व्यवस्था से पुलिस अधिकारियों में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा का माहौल बनेगा और वे अपने क्षेत्र में अपराध नियंत्रण तथा जनसंतोष बढ़ाने के लिए अधिक गंभीरता से काम करेंगे।

कमजोर प्रदर्शन पर कार्रवाई

इस परीक्षा का मकसद केवल रैंकिंग जारी करना नहीं है, बल्कि सुधार की दिशा में ठोस कदम उठाना भी है। जिन थाना प्रभारियों का प्रदर्शन कमजोर पाया गया है, उन्हें विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। कमिश्नर स्वयं फेल हुए थाना प्रभारी की 10 दिन तक क्लास लेंगे, ताकि उनकी कार्यशैली में सुधार हो सके।

यदि प्रशिक्षण के बाद भी अपेक्षित सुधार नहीं होता है, तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी। जरूरत पड़ने पर उन्हें लाइन अटैच भी किया जा सकता है। यानी अब खराब प्रदर्शन का सीधा असर पद और जिम्मेदारी पर पड़ेगा।

पुलिसिंग में नई सोच

Indore पुलिस की यह पहल प्रदेश में पहली बार इस तरह लागू की गई है। पुलिस कमिश्नरेट के तहत थानों की रैंकिंग प्रणाली को एक मॉडल के रूप में देखा जा रहा है। इससे न केवल अपराध नियंत्रण में सुधार की उम्मीद है, बल्कि आम नागरिकों का पुलिस पर भरोसा भी मजबूत होगा।

पुलिस प्रशासन का कहना है कि आम जनता की सुरक्षा सर्वोपरि है और थाना प्रभारी उस व्यवस्था की पहली कड़ी हैं। इसलिए उनका जवाबदेह और सक्रिय रहना बेहद जरूरी है। यह मूल्यांकन प्रणाली इसी दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।

जनता के भरोसे की कसौटी

कमिश्नर ने साफ संदेश दिया है कि थाना प्रभारी की जिम्मेदारी केवल अपराध दर्ज करना नहीं, बल्कि उन्हें रोकना और जनता में सुरक्षा का भरोसा कायम रखना भी है। यही वजह है कि इस परीक्षा में पास होना केवल अंक पाने का मामला नहीं, बल्कि जनता के विश्वास पर खरा उतरने की कसौटी भी है।

Indore पुलिस की यह पहल आने वाले समय में अन्य शहरों के लिए भी उदाहरण बन सकती है। अगर यह प्रयोग सफल रहता है, तो संभव है कि राज्य के अन्य जिलों में भी इसी तरह की मूल्यांकन प्रणाली लागू की जाए।

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