महाशिवरात्रि पर आयोजित मुक्तेश्वर महादेव मेला नागदा में केंद्रीय राज्यमंत्री डॉ. एल मुरुगन पहुंचे, मंदिर दर्शन किए, चंबल तट की परंपरा और आस्था की सराहना।
केंद्रीय मंत्री का नागदा आगमन
महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर आयोजित मुक्तेश्वर महादेव मेला नागदा इस वर्ष विशेष रूप से ऐतिहासिक बन गया, जब भारत सरकार के सूचना एवं प्रसारण तथा संसदीय कार्य मंत्रालय के राज्यमंत्री डॉ. एल. मुरुगन मेले में पहुंचे और भगवान मुक्तेश्वर महादेव के दर्शन किए।
डॉ. मुरुगन समीपस्थ ग्राम रूपेटा में भूमि पूजन कार्यक्रम में शामिल होने के बाद कर्नाटक के राज्यपाल महामहिम डॉ. थावरचंद गहलोत, जिलाध्यक्ष राजेश धाकड़ तथा पूर्व कैबिनेट मंत्री सुल्तान सिंह शेखावत के साथ चंबल तट स्थित मंदिर पहुंचे।
मुक्तेश्वर महादेव मंदिर का धार्मिक महत्व
चंबल नदी के पावन तट पर स्थित यह प्राचीन मंदिर क्षेत्र की गहरी आस्था का केंद्र है।
मुक्तेश्वर महादेव मेला नागदा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि लोकसंस्कृति, परंपरा और सामाजिक एकता का प्रतीक है।
मान्यता है कि यहां दर्शन करने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और शिवभक्तों को आध्यात्मिक शांति प्राप्त होती है। महाशिवरात्रि पर यहां हजारों श्रद्धालु दूर-दूर से पहुंचते हैं।
महाशिवरात्रि का आठ दिवसीय मेला
महाशिवरात्रि के अवसर पर आयोजित आठ दिवसीय मुक्तेश्वर महादेव मेला नागदा धार्मिक अनुष्ठानों, भजन-कीर्तन, पूजा-अर्चना और सांस्कृतिक कार्यक्रमों से जीवंत बना हुआ है।
यह मेला वर्षों से क्षेत्रीय पहचान का हिस्सा रहा है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी सशक्त करता है। स्थानीय व्यापार, हस्तशिल्प, प्रसाद और पारंपरिक वस्तुओं की दुकानों से मेले में विशेष रौनक दिखाई देती है।
अतिथियों का भव्य स्वागत
मंदिर प्रांगण में अतिथियों का पारंपरिक तरीके से स्वागत किया गया।
नगर पालिका अध्यक्ष संतोष ओ.पी. गहलोत, मेला अध्यक्ष बबीता रघुवंशी, उपाध्यक्ष सुभाष चंद्र शर्मा, सांसद प्रतिनिधि सहित आयोजन समिति ने दुपट्टा ओढ़ाकर एवं बाबा मुक्तेश्वर की तस्वीर भेंट कर सम्मान किया।
इस अवसर पर
सुभाष रावल,
सुबोध स्वामी,
नरेंद्र कोठारी,
विजयसिंह सिसोदिया,
मनीष कारिया
सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
चंबल तट की आध्यात्मिक पहचान
दर्शन के पश्चात केंद्रीय मंत्री डॉ. एल. मुरुगन ने मंदिर की प्राचीन मान्यताओं और चंबल नदी के ऐतिहासिक व सांस्कृतिक महत्व पर चर्चा की।
उन्होंने कहा कि ऐसे धार्मिक स्थल भारत की सांस्कृतिक धरोहर हैं, जो समाज को जोड़ते हैं और आध्यात्मिक पर्यटन को बढ़ावा देते हैं।
जनप्रतिनिधियों और श्रद्धालुओं की सहभागिता
मुक्तेश्वर महादेव मेला नागदा में जनप्रतिनिधियों, संत-महात्माओं और श्रद्धालुओं की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली।
यह आयोजन प्रशासन, जनप्रतिनिधि और स्थानीय समाज के समन्वय का उत्कृष्ट उदाहरण बना।
श्रद्धालुओं का मानना है कि यह मेला केवल धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि
सामाजिक मिलन
सांस्कृतिक संरक्षण
क्षेत्रीय पहचान
आस्था और विश्वास का उत्सव है।
क्षेत्रीय आस्था और पर्यटन की संभावनाएँ
यदि इस ऐतिहासिक स्थल को योजनाबद्ध तरीके से विकसित किया जाए तो मुक्तेश्वर महादेव मेला नागदा धार्मिक पर्यटन का प्रमुख केंद्र बन सकता है।
चंबल तट, प्राचीन मंदिर और विशाल मेला—ये तीनों मिलकर इसे आध्यात्मिक पर्यटन सर्किट में शामिल करने की क्षमता रखते हैं।
निष्कर्ष
महाशिवरात्रि पर आयोजित मुक्तेश्वर महादेव मेला नागदा में केंद्रीय मंत्री डॉ. एल. मुरुगन का आगमन इस आयोजन की महत्ता को राष्ट्रीय स्तर तक ले गया।
यह मेला केवल परंपरा नहीं, बल्कि आस्था, संस्कृति और सामाजिक एकता का जीवंत उत्सव है।
संवाददाता: जीवनलाल जैन, नागदा
मो.: 9179662633



