श्री सिद्ध चक्र महा मंडल विधान का आयोजन: एक दिव्य धार्मिक उत्सव
22 फरवरी से 3 मार्च 2026 तक कोटा में विशेष आयोजन
Kota (राजस्थान), आर के पुरम स्थित जंगल वाले बाबा मुनि चिन्मय सागर जी महाराज की प्रेरणा से श्री 1008 मुनिसुब्रतनाथ दिगंबर जैन त्रिकाल चौबीसी में श्री सिद्ध चक्र महा मंडल विधान का आयोजन भव्यता के साथ किया जाएगा। यह आयोजन 22 फरवरी से 3 मार्च 2026 तक किया जाएगा, जिसमें परम पूज्य गणिनी आर्यिका श्री 105 विभाश्री माताजी ससंघ (13 पिच्छी) के पावन सानिध्य में सिद्धों की आराधना की जाएगी।
मंदिर समिति के अध्यक्ष अंकित जैन ने इस विशेष आयोजन के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस धार्मिक कार्यक्रम में भक्ति, श्रद्धा और समर्पण के साथ सिद्ध चक्र महा मंडल विधान का आयोजन किया जाएगा। इस आयोजन का उद्देश्य न केवल धार्मिक महत्ता को बढ़ाना है बल्कि समाज में शांति, सद्भाव और समृद्धि की भावना को भी जागृत करना है।
आयोजन की विस्तृत रूपरेखा
इस आयोजन की शुरुआत 22 फरवरी, रविवार को प्रातः काल मंगल अभिषेक और शांतिधारा से की जाएगी। उसके बाद एक विशाल घटयात्रा गाजे-बाजे के साथ मंदिर परिसर से निकाली जाएगी, जो श्रद्धालुओं का ध्यान आकर्षित करेगी। घटयात्रा का आयोजन मंदिर के वातावरण में एक दिव्य माहौल बनाएगा, जिससे श्रद्धालुओं का मन और आत्मा शुद्ध हो सके।
यात्रा के बाद मंडप उद्घाटन, मंडप शुद्धि और ध्वजारोहण की विशेष प्रक्रिया संपन्न की जाएगी, जो आयोजन की शुद्धता और पवित्रता को दर्शाएगा। इसके पश्चात मंगल प्रवचन होंगे, जिनमें धार्मिक गुरु और विद्वान पंडित अपने धार्मिक अनुभवों और उपदेशों के माध्यम से श्रद्धालुओं का मार्गदर्शन करेंगे।
विधि और पूजा की प्रक्रिया
पंडित जितेन्द्र शास्त्री, पंडित रविंद्र शास्त्री और पंडित स्वतंत्र जैन द्वारा विधिपूर्वक मांगलिक क्रियाएं संपन्न करवाई जाएंगी। इन क्रियाओं में जैन धर्म की विशेष पूजा विधियों और मंत्रोच्चारण के माध्यम से समस्त वातावरण को पवित्र किया जाएगा।
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धार्मिक संगीत और भक्ति
धार्मिक संगीत का महत्व किसी भी धार्मिक आयोजन में अत्यधिक होता है। इस आयोजन के लिए धर्मप्राण पिडावा से हरीश जैन एवं पार्टी को आमंत्रित किया गया है। वे अपने मधुर संगीत से वातावरण को उल्लासमयी और भक्तिमय बनाएंगे। इस संगीत कार्यक्रम में श्रद्धालु धार्मिक भावनाओं से अभिभूत होंगे और ध्यानमग्न होकर सिद्ध चक्र महा मंडल विधान में भाग लेंगे।
समापन और विश्व शांति महायज्ञ
इस आयोजन का समापन 3 मार्च 2026 को मंगलवार के दिन होगा, जब मंगलाचरण, मंगलाअष्ट शांति धारा और नित्य पूजन के साथ विश्व शांति महायज्ञ का आयोजन किया जाएगा। इस महायज्ञ में गुरु मां विभा श्री माता जी ससंघ का पावन सानिध्य होगा। यज्ञ का उद्देश्य न केवल स्थानीय समाज में शांति का संदेश देना है, बल्कि वैश्विक स्तर पर शांति और सद्भावना का आह्वान करना भी है।
महायज्ञ के बाद गजरथ, गाजे-बाजे और बग्घियों के साथ विशाल शोभा यात्रा मंदिर परिसर से निकाली जाएगी, जिसमें इंद्र-इंद्राणीयों सहित विभिन्न धार्मिक और सांस्कृतिक तत्वों की भागीदारी होगी। इस शोभा यात्रा में श्रद्धालु सक्रिय रूप से भाग लेंगे और इससे माहौल में और अधिक दिव्यता का संचार होगा।
विशाल पांडाल और आयोजन की भव्यता
मंदिर समिति के निदेशक विनोद जैन टोरडी ने जानकारी दी कि श्री सिद्ध चक्र महा मंडल विधान के आयोजन के लिए मंदिर के सामने एक विशाल पांडाल तैयार किया गया है। इस पांडाल की सजावट देखते ही बनती है, जो धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहर को प्रदर्शित करेगी। पांडाल में आधुनिकता और पारंपरिकता का संयोजन किया गया है, ताकि यह धार्मिक आयोजन को दर्शाने के साथ-साथ श्रद्धालुओं को एक आदर्श धार्मिक वातावरण प्रदान करे।
समाज में सकारात्मक बदलाव की दिशा में योगदान
इस धार्मिक आयोजन के आयोजन से न केवल धार्मिक गतिविधियों को प्रोत्साहन मिलेगा, बल्कि यह समाज में सकारात्मक बदलाव की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा। जब हम किसी धार्मिक उत्सव में भाग लेते हैं, तो यह हमारी मानसिकता और सोच को शुद्ध करता है। इस आयोजन के माध्यम से न केवल जैन धर्म के सिद्धांतों को मजबूत किया जाएगा, बल्कि यह समाज में शांति, सद्भाव और आत्मनिर्भरता की भावना भी बढ़ाएगा।
आयोजन की अहमियत
श्री सिद्ध चक्र महा मंडल विधान का आयोजन न केवल धार्मिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह समाज की सांस्कृतिक और धार्मिक समृद्धि को भी बढ़ावा देता है। इस प्रकार के आयोजन समाज के विभिन्न वर्गों को एकत्र कर धर्म और संस्कृति के क्षेत्र में उत्कृष्टता की दिशा में कार्य करने के लिए प्रेरित करते हैं।
आध्यात्मिक उन्नति और समाज सेवा का समागम
आध्यात्मिक उन्नति के साथ-साथ इस आयोजन में समाज सेवा का भी तत्व जुड़ा हुआ है। यह आयोजन न केवल एक धार्मिक क्रिया के रूप में संपन्न होगा, बल्कि इसमें समाज सेवा के विभिन्न पहलुओं को भी शामिल किया गया है, जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य और गरीबों के लिए सहायता। ऐसे आयोजनों से समाज में एकता, सहयोग और समानता की भावना विकसित होती है।
निष्कर्ष
कुल मिलाकर, श्री सिद्ध चक्र महा मंडल विधान का आयोजन एक विशेष धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक अवसर होगा, जो भक्ति, श्रद्धा, समाज सेवा और आत्म-सुधार का प्रतीक बनेगा। इस आयोजन के माध्यम से जैन समाज अपनी धार्मिक समृद्धि को न केवल पुनः स्थापित करेगा, बल्कि समाज में शांति, सद्भाव और सहयोग की भावना को भी बढ़ावा देगा।
हम सभी को इस अद्भुत आयोजन में सक्रिय रूप से भाग लेकर अपने जीवन को समृद्ध और शुद्ध बनाने का प्रयास करना चाहिए।
